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जिस दिन कंपनी ने लिया रिजाइन उसी दिन सुसाइड! कंपनी COO की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

बॉम्बे HC ने विराज प्रोफाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के COO की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. मामला कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की आत्महत्या से जुड़ा है. आरोप है कि जाधव को मौत वाले दिन कंपनी के MD के बंगले पर बुलाया गया था. उनसे हाथ से लिखा इस्तीफा लिया गया था.

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कंपनी के कर्मचारी के सुसाइड मामले में बॉब्मे हाई कोर्ट ने COO की जमानत याचिका खारिज कर दी है. (File Photo-ITG)
कंपनी के कर्मचारी के सुसाइड मामले में बॉब्मे हाई कोर्ट ने COO की जमानत याचिका खारिज कर दी है. (File Photo-ITG)

महाराष्ट्र में एक कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव की आत्महत्या के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई की. कोर्ट ने कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) जितेंद्र पी. गर्ग को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. मामले में कोर्ट ने एक अहम बात पर ध्यान दिया. कर्मचारी प्रदीप एस. जाधव को उनकी मौत वाले दिन कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के बंगले पर बुलाया गया था. आरोप है कि उसी दिन उनसे हाथ से लिखा इस्तीफा भी लिया गया था.

जस्टिस एनआर बोरकर ने कहा कि इस मामले में आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है. कोर्ट ने सुसाइड नोट भी देखा. इसमें गर्ग के खिलाफ खास आरोप लगाए गए थे.

मौत से पहले MD के बंगले पर बुलाए गए थे कर्मचारी

प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में बताया कि, प्रदीप एस. जाधव कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव थे. उन्होंने 2025 में नौकरी छोड़ दी थी. हालांकि, कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज कोचर के बुलाने पर वह 27 दिसंबर 2025 को दोबारा काम पर लौट आए थे.

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आरोप है कि इसके बाद कंपनी के COO जितेंद्र गर्ग ने जाधव को परेशान किया. जाधव की 19 जून 2026 को आत्महत्या से मौत हो गई. प्रॉसिक्यूशन का कहना है कि मौत वाले दिन उन्हें MD के बंगले पर बुलाया गया था. वहां उनसे हाथ से लिखा इस्तीफा लिया गया और उसी दिन उसे स्वीकार भी कर लिया गया.

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आरोपी के वकीलों ने आरोपों को बताया गलत

जितेंद्र गर्ग की ओर से पेश वकीलों ने इन आरोपों का विरोध किया. उनका कहना था कि जाति के आधार पर परेशान करने का आरोप बाद में जोड़ा गया है. FIR और सुसाइड नोट में जाति से जुड़े उत्पीड़न का जिक्र नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि गर्ग को जाधव की जाति के बारे में जानकारी थी.

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता. इसलिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है. वकीलों ने यह भी बताया कि 13 जून को एक महिला कर्मचारी ने जाधव पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस का जवाब देने को कहा गया था.

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याचिका का विरोध करते हुए शिकायतकर्ता के वकील राजीव कुमार पांडे और अतिरिक्त सरकारी वकील योगेश डबके ने कोर्ट में दलीलें रखीं. उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में गर्ग के खिलाफ साफ आरोप हैं. कोर्ट ने भी नोट देखने के बाद कहा कि इसमें उनके खिलाफ खास आरोप दर्ज हैं.

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन तथ्यों को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए गर्ग को 10 दिन की अंतरिम राहत दी गई है. मामला बोइसर पुलिस स्टेशन में दर्ज है. इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 और SC/ST एक्ट के प्रावधान लगाए गए हैं.
 

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