बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हलफनामे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करने के लिए कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि ऐसी पोस्टिंग से कोर्ट की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है.
हाईकोर्ट की जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच ने माल्या की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. माल्या ने अपनी याचिका में दावा था कि उनकी सिविल देनदारियां (civil liabilities) पूरी हो चुकी हैं, क्योंकि बैंकों के समूह ने उनसे लगभग 15,000 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं जबकि ब्याज समेत मूल दावा लगभग 6,203 करोड़ रुपये का था. इसलिए उन्हें इस मामले से राहत मिलनी चाहिए.
प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले महीने वकील आशीष मेहता के जरिए जवाब दाखिल किया था. इसमें कहा गया था कि माल्या का भारत से लगातार बाहर रहना और सक्षम कोर्ट के आपराधिक अधिकार क्षेत्र (criminal jurisdiction) के सामने पेश न होना, उनके द्वारा मांगी गई राहत पर विचार करते वक्त महत्वपूर्ण बातें हैं. साथ ही माल्या से बैंक के बकाया की बाद में वसूली होने से PMLA की कार्यवाही या उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमों की शिकायतें बेकार या बेअसर नहीं हो जातीं.
'शाम को मिला हलफनामा'
वहीं, मंगलवार को माल्या के वकीलों ने ED के जवाब पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा. इस पर मेहता ने आपत्ति जताई और बेंच को बताया कि माल्या की कानूनी टीम को शाम 4:30 बजे हलफनामा ईमेल करने के बाद, माल्या ने उसी रात 11 बजे तक पूरा दस्तावेज़ अपने सोशल मीडिया एक्स पर अपमानजनक टिप्पणियों के साथ अपलोड कर दिया.
'अपने क्लाइंट को समझाएं'
मेहता ने कहा, 'ये आपकी अदालत के लिए सही नहीं है... आपको इसे देखने का मौका भी नहीं मिला. याचिकाकर्ता को अदालत में लड़ना चाहिए, ट्विटर पर नहीं.'
इसके बाद बेंच ने माल्या की कानूनी टीम को चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर कानूनी लड़ाई लड़ने से उनके अपने केस को नुकसान होता है. जस्टिस जाधव ने कहा, 'कृपया अपने क्लाइंट को समझाएं, ये तरीका सही नहीं है. इससे कोर्ट की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है.'
इस पर माल्या की ओर से पेश सीनियर वकील अमित देसाई ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वो अपने क्लाइंट तक ये मैसेज पहुंचा देंगे. उन्होंने ये भी बताया कि ED भी अक्सर माल्या के बारे में पोस्ट करती रहती है.
सुनवाई के दौरान जस्टिस जाधव ने SBI कंसोर्टियम को ED के खुलासों पर एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसके बाद माल्या को एक व्यापक संशोधन याचिका (comprehensive amendment application) दाखिल करने की मंजूरी दी गई. इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई को अगली सुनवाई 13 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया.