झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर सियासत गरम हो गई है. JMM सांसद विजय हंसदक ने इस पूरे मामले पर अपनी सरकार का पक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि छात्रों का विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए था, लेकिन विधानसभा के दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश के चलते सरकार को व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाना पड़ा.
इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी हमेंत सोरेन सरकार के इस एक्शन पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद बीजेपी और JMM की तरफ से जवाबी हमला किया जा रहा है. सांसद ने यह भी दावा किया है कि विरोध प्रदर्शन में बाहर से, खासकर पश्चिम बंगाल से लोगों को लाया गया था, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को भटकाया जा सके.
पत्रकार से बातचीत में जब JMM सांसद विजय हंसदक से पूछा गया कि कांग्रेस लगातार यह कह रही है कि छात्रों के खिलाफ लाठीचार्ज और फोर्स का इस्तेमाल गलत था, तो उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना हमेशा से एक खुला रास्ता रहा है.
उन्होंने बताया कि जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त विधानसभा का सत्र चल रहा था. दोनों पक्षों के बीच पहले यह सहमति बनी थी कि बातचीत और विरोध प्रदर्शन दोनों ही शांतिपूर्ण तरीके से होंगे. लेकिन प्रदर्शनकारी विधानसभा के दरवाजे तक पहुंच गए, जिसके बाद सरकार को विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी.
हालांकि सांसद ने इस पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि जो छात्र शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे, उनके बीच कई ऐसे लोग भी देखे गए जो बाहर से आए थे. उनका कहना है कि यह मामला अभी जांच के दायरे में है, लेकिन शुरुआती तौर पर ऐसा लग रहा है कि कुछ लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन को गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रहे थे.
इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी आमने सामने आ गए हैं. कांग्रेस सांसदों का कहना है कि जिन अधिकारियों या नेताओं ने लाठीचार्ज करवाया, उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी को इस मुद्दे पर बयान देने से पहले माफी मांगनी चाहिए.
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इस पर सफाई देते हुए JMM सांसद ने कहा कि जिस लाठीचार्ज की तुलना की जा रही है, उसमें सिर्फ लाठी और वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ था. लेकिन झारखंड की इस घटना में हालात कहीं ज्यादा गंभीर थे. उन्होंने दावा किया कि यहां गोलियों का इस्तेमाल हुआ और लाठियों में कीलें तक लगी हुई थीं. इसके अलावा प्रतिबंधित इलाके में पत्थरों से भरे ट्रक भी खड़े मिले. सांसद ने साफ किया कि सरकार की मंशा किसी को नुकसान पहुंचाने की नहीं थी, बल्कि व्यवस्था को सुधारने की थी.
सबसे विवादित दावा यह है कि प्रदर्शन में शामिल कई लोग झारखंड के बाहर से, खासतौर पर पश्चिम बंगाल से लाए गए थे. जब आजतक ने इस दावे का आधार पूछा, तो सांसद ने कहा कि उनके पास इसके सबूत के तौर पर कई वीडियो मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि लगातार ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें ट्रकों और गाड़ियों में भरकर लोगों को लाया जाता दिख रहा है. उनका कहना है कि बाहरी राज्यों से लोगों के आने की जानकारी लगातार मिल रही है.
जब आजतक ने आगे सवाल पूछने की कोशिश की, तो सांसद ने कहा कि सरकार की तरफ से किसी सवाल से बचने की कोशिश नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि सामान्य माहौल में जो भी सवाल पूछे गए, उनके जवाब वहां से मिले वीडियो सबूतों के आधार पर ही दिए गए हैं. उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि पूरा मामला अभी जांच के दायरे में है और आगे की जांच में स्थिति साफ हो सकेगी.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. एक तरफ विपक्ष सरकार पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी तरफ सत्तारूढ़ पक्ष इसे व्यवस्था बनाए रखने की जरूरी कार्रवाई बता रहा है. साथ ही बाहरी राज्यों से लोगों को लाकर प्रदर्शन भड़काने के दावे ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है.