झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर तेज हो गया है. हाई कोर्ट ने 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षा के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने वाली अधिसूचना पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही फूड सेफ्टी ऑफिसर्स की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगाई गई है. इस फैसले के बाद जेपीएससी जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के छात्र नेताओं ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सरकार को शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पुतले फूंकने का ऐलान किया है.
जेपीएससी जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के नेताओं का कहना है कि सरकार ने परीक्षार्थियों को धोखा दिया है. मंच नेता कुणाल प्रताप सिंह ने कहा कि गुरुवार को हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष रखने के लिए न तो महाधिवक्ता पहुंचे और न ही कोई वरिष्ठ वकील. जो वकील मौजूद थे, उन्होंने भी सरकार के फैसले के बचाव में एक शब्द नहीं बोला. सिंह ने इसे एक जाल बताते हुए कहा कि यह आंदोलन को खत्म करने की चाल थी.
गौरतलब है कि परीक्षार्थियों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 26 दिनों तक धरना दिया था. सरकार द्वारा 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बाद उन्होंने अपना आंदोलन दो महीने के लिए स्थगित कर दिया था. मंच नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि उन्हें लगा था कि सरकार भर्ती परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई करना चाहती है, लेकिन यह गलत साबित हुआ. उन्होंने कहा कि सरकार ने हजारों परीक्षार्थियों को धोखा दिया है.
हाईकोर्ट में इन याचिकाओं पर सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन ने की. उन्होंने राज्य सरकार को 15 सितंबर तक अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी.
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इसी बीच जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिनों की भूख हड़ताल के बाद अपना अनशन तोड़ दिया. उन्होंने कहा कि वे हाईकोर्ट के इस फैसले का सम्मान करते हैं जिसमें 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षाओं और फूड सेफ्टी ऑफिसर्स की नियुक्ति रद्द करने वाले आदेश पर रोक लगाई गई है.
महतो ने कहा कि यह आंदोलन किसी उम्मीदवार के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, गड़बड़ियों और खामियों के खिलाफ शुरू किया गया था. उन्होंने कहा कि वे अपनी मूल मांगों पर पूरी तरह कायम हैं.
महतो ने यह भी साफ किया कि योग्य और निर्दोष परीक्षार्थियों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जाएगा.