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कश्मीरी पंडितों ने अनंतनाग में 28 साल बाद फूंका 'आतंक का रावण'

कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत इन्हें फिर से अनंतनाग में बसने का मौका मिला है. जिसके बाद उन्होंने 28 साल बाद यहां दशहरा मनाया.

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कश्मीरी पंडितों ने किया पुतला दहन
कश्मीरी पंडितों ने किया पुतला दहन

पूरे देश के साथ जम्मू-कश्मीर में भी दशहरे का त्योहार मनाया गया. मगर, इस बार ये मौका बेहद खास रहा, क्योंकि कश्मीरी पंडितों को भी यहां बुराई के प्रतीक रावण का पुतला दहन करने का गौरव प्राप्त हुआ.

ऐसा 28 साल बाद हुआ है. दक्षिण कश्मीर के जिस अनंतनाग जिले को आतंकियों का गढ़ माना जाता है वहां रावण का पुतला फूंका गया. ये पुतला दहन कश्मीरी पंडितों ने किया.

यहां विस्थापित पंडितों की कॉलोनी में शनिवार को दशहरा मनाया गया. इस दौरान लोग बेहद खुश नजर आए. उनकी आवाज में एक विश्वास नजर आया. वो बेहद खुश थे कि 28 साल बाद अपनी जन्मभूमि पर खड़े हैं और जश्न मना रहे हैं.

दरअसल, नब्बे के दशक में आतंकियों के खिलाफ चले ऑपरेशन के दौरान इन कश्मीरी पंडितों को अपना घर और विरासत छोड़कर जाना पड़ा था. जिस दौरान बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों की जान भी गई थीं. मगर, कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत इन्हें फिर से वहां बसने का मौका मिला है. हालांकि, अभी कई लोगों के पूरे परिवार यहां नहीं लौटे हैं.

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जम्मू में भी जश्न

जम्मू में लोगों ने पूरे हर्षोल्लास के साथ दशहरे का जुलूस निकाला और रावण के पुतले का दहन किया. त्योहार के मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. जम्मू के सभी जिलों में शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम संपन्न हो गया. वहीं सनातन धर्म सभा और सनातन धर्म नाटक समाज की तरफ से इस मौके पर शोभा यात्रा निकाली गई.

बता दें कि हाल ही में अनंतनाग में ही अमरनाथ यात्रियों के जत्थे को आतंकियों ने निशाना बनाया था.

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