हिमाचल प्रदेश में स्कूलों में शिक्षकों की कमी का बड़ा मामला सामने आया है. विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई. सदन में बताया गया कि प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं. बड़ी संख्या में स्कूल ऐसे भी हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहा है. इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा है.
सिरमौर के 12 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं
सिरमौर जिले के पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक रीना कश्यप ने सदन में यह मुद्दा उठाया. उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र के 12 प्राथमिक स्कूलों में एक भी शिक्षक तैनात नहीं है.
उन्होंने सरकार से इन स्कूलों में जल्द शिक्षक नियुक्त करने की मांग की. शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी मामले में हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है.
विधानसभा में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब 150 स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षक नहीं हैं. वहीं करीब 3500 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक के सहारे पढ़ाई चल रही है.
सिरमौर के पांवटा साहिब क्षेत्र के एक स्कूल में भी सुविधाओं की कमी है. यहां छठी से दसवीं कक्षा तक के करीब 130 बच्चे टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं. स्कूल में करीब 230 बच्चे पढ़ते हैं. इनके लिए सिर्फ पांच कमरे हैं. एक ही भवन में प्री-नर्सरी से दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई चल रही है.
विधायक रीना कश्यप के अनुसार सिरमौर के कई स्कूलों में लंबे समय से शिक्षक नहीं हैं. इससे साफ है कि हिमाचल के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी बड़ी चुनौती बन गई है.
अब सरकार के सामने इन स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध कराने की चुनौती है. साथ ही बच्चों के लिए सुरक्षित भवन और पर्याप्त कमरे उपलब्ध कराना भी जरूरी है. तभी दूरदराज के इलाकों में बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी.
कुल्लू में 314 स्कूलों का भी यही हाल
कुल्लू जिले में भी शिक्षकों की कमी गंभीर है. जिले के 314 प्राथमिक स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक तैनात है. कुल्लू के बनोगी प्राथमिक स्कूल की स्थिति भी ऐसी ही है. यहां प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक 21 बच्चे पढ़ते हैं. पिछले करीब दो साल से एक ही शिक्षक पूरे स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रहा है.
टीचर अनीता ठाकुर ने बताया कि उन्हें सभी क्लासेज को पढ़ाना पड़ता है. स्कूल के दूसरे काम भी देखने पड़ते हैं. अलग-अलग कक्षाओं का अलग सिलेबस होने से बच्चों पर पूरा ध्यान देना मुश्किल होता है.
स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान रामनाथ ने कहा कि दूसरे शिक्षक की मांग कई बार की गई है. हमें बताया गया कि फिलहाल शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. SMC ने अपनी तरफ से भी एक टीचर की व्यवस्था की थी. लेकिन अब वह भी स्कूल छोड़ चुकी हैं.
चंबा में 98 बच्चों पर सिर्फ दो शिक्षक
चंबा के सलूणी क्षेत्र के भेड़ोई प्राथमिक स्कूल में करीब 98 बच्चे पढ़ते हैं. यहां केवल दो शिक्षक तैनात हैं. SMC के अनुसार इनमें से एक शिक्षक सरकारी ड्यूटी पर है. ऐसे में दूसरे शिक्षक पर पूरे स्कूल की जिम्मेदारी आ जाती है. इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
स्कूल का मैदान भी भूस्खलन की चपेट में है. इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है. SMC ने शिक्षा विभाग से जल्द समाधान की मांग की है. समिति ने वार्निंग दी है कि समस्या दूर नहीं हुई तो बच्चों के साथ जिला कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा.
वहीं बिलासपुर के सलोआ राजकीय प्राथमिक स्कूल में करीब 13 बच्चे पढ़ते हैं. यहां पिछले करीब एक साल से कोई नियमित शिक्षक नहीं है. स्कूल को कभी किसी शिक्षक की डेपुटेशन से चलाया जाता है. कुछ समय बाद शिक्षक बदल दिया जाता है. SMC का कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अरुण गौतम ने बताया कि एक नियमित शिक्षक की नियुक्ति के आदेश हुए थे. लेकिन वह शिक्षक स्कूल में नहीं गया. बाद में दूसरे शिक्षक को भेजा गया. यह मामला अदालत में चला गया. फिलहाल स्कूल में डेपुटेशन पर शिक्षक भेजे जा रहे हैं.