साइबर सिटी गुरुग्राम में मूसलाधार बारिश के बाद 24 घंटे तक जलभराव की समस्या दूर नहीं होने पर नगर निगम ने सख्त कार्रवाई की है. शहर के कई हिस्सों में बारिश का पानी भरने की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन ज्यादातर इलाकों में समय रहते जल निकासी कर दी गई. वहीं, ओल्ड डीएलएफ और सेक्टर 17-C में बारिश के 24 घंटे बाद भी भारी मात्रा में पानी जमा रहा.
जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए नगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया ने खुद मौके का मुआयना किया. इस दौरान जल निकासी व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया गया और जिम्मेदार अधिकारियों तथा ठेकेदार की भूमिका की जांच की गई. जांच में सामने आया कि ओल्ड डीएलएफ और सेक्टर 17-C में जलभराव से निपटने के लिए तैनात जूनियर इंजीनियर ने अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया.
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नगर निगम के मुताबिक, इन इलाकों में ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त रखने और बारिश के दौरान जल निकासी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की थी. इसके बावजूद स्थिति लंबे समय तक बनी रही. मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम कमिश्नर ने लापरवाही के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए.
24 घंटे बाद भी नहीं निकला पानी
गुरुग्राम में दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश ने शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या पैदा कर दी थी. सिद्धपीठ शीतला माता रोड, ओल्ड डीएलएफ, सेक्टर 17-C और डूंडाहेड़ा समेत कई इलाकों से पानी भरने की शिकायतें सामने आई थीं. बारिश रुकने के बाद नगर निगम की टीमें जल निकासी के काम में जुट गई थीं.
नगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया के अनुसार, शहर के अधिकांश हिस्सों में जल निकासी समय पर कर दी गई थी. हालांकि, ओल्ड डीएलएफ और सेक्टर 17-C में हालात सामान्य नहीं हो सके. बारिश के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी इन इलाकों में भारी मात्रा में पानी जमा रहा, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
लगातार जलभराव की शिकायतों के बाद कमिश्नर ने खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया. मौके पर जल निकासी की व्यवस्था और तैनात कर्मचारियों की भूमिका की जांच की गई. निरीक्षण के दौरान सामने आई लापरवाही के बाद संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया गया.
JE सुमित चहल सस्पेंड
जांच में नगर निगम ने पाया कि ओल्ड डीएलएफ और सेक्टर 17-C में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए तैनात जूनियर इंजीनियर सुमित चहल ने अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन नहीं किया. जलभराव की समस्या लंबे समय तक बनी रहने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को गंभीर लापरवाही माना गया.
नगर निगम प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करते हुए JE सुमित चहल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया. इस कार्रवाई के बाद निगम के उन कर्मचारियों और अधिकारियों में भी संदेश गया है, जिन्हें बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था की निगरानी और तत्काल कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है.
कमिश्नर प्रदीप दहिया ने साफ कर दिया कि बारिश के दौरान जलभराव जैसी स्थिति से निपटने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
ठेकेदार पर 10% जुर्माना, पेमेंट भी रोकी
जांच में ठेकेदार की भूमिका भी सामने आई. जिस ठेकेदार की जिम्मेदारी बारिश के दौरान समय पर मोटर और पंप चलाकर जल निकासी सुनिश्चित करने की थी, उसने भी कथित तौर पर अपनी ड्यूटी में भारी कोताही बरती. समय पर पंपिंग और मोटर नहीं चलाए जाने के कारण जल निकासी प्रभावित हुई.
नगर निगम ने ठेकेदार के खिलाफ भी कड़ा कदम उठाया है. नियमों के तहत ठेकेदार पर 10 प्रतिशत का भारी जुर्माना लगाया गया है. इसके अलावा निगम ने ठेकेदार की बची हुई सभी पेमेंट्स को भी रोक दिया है. यानी जब तक मामले में आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, ठेकेदार को लंबित भुगतान नहीं किया जाएगा.
इतना ही नहीं, नगर निगम ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. प्रशासन के इस कदम से साफ है कि बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था में लापरवाही को लेकर निगम अब सख्त रुख अपना रहा है. अधिकारियों का कहना है कि जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ व्यवस्था में सुधार पर भी जोर दिया जा रहा है.
जलभराव पर निगम की जीरो टॉलरेंस नीति
गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में बारिश के दौरान जलभराव लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है. मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में पानी जमा होने से यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है. ऐसे में समय पर पंप और मोटर चलाकर पानी निकालना बेहद जरूरी हो जाता है.
इस मामले में नगर निगम ने साफ संदेश दिया है कि जल निकासी व्यवस्था में लापरवाही करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ओल्ड डीएलएफ और सेक्टर 17-C में 24 घंटे तक जलभराव रहने के बाद की गई कार्रवाई इसी सख्त नीति का हिस्सा है.
फिलहाल JE सुमित चहल को सस्पेंड किया जा चुका है, जबकि ठेकेदार पर 10 प्रतिशत जुर्माना लगाने के साथ उसकी पेमेंट रोक दी गई है और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. नगर निगम प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि आने वाली बारिश में ऐसे इलाकों में जल निकासी की व्यवस्था समय पर और प्रभावी तरीके से की जा सके.