गुजरात के सूरत जिले के कोसंबा में करीब चार साल पुराने एक हत्याकांड का राज खुला तो पुलिस भी हैरान रह गई. एक शख्स अपनी पत्नी और उसके रिश्तेदार पर हत्या का आरोप लगाकर पुलिस के पास पहुंचा था, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई उसी पर घूम गई. पूछताछ में उसने पत्नी के साथ मिलकर तीन महिलाओं की हत्या करने की बात कबूल की.
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस कोसंबा के पुराने मकान तक पहुंची. जमीन की खुदाई कराई गई तो सीमेंट से भरा एक ड्रम बरामद हुआ. ड्रम को तोड़ने पर उसके भीतर मानव अवशेष, खोपड़ी, हड्डियां और बाल मिले. कपड़ों और कंगन के आधार पर परिजनों ने अवशेषों की पहचान शांताबेन के तौर पर की. इन अवशेषों को फॉरेंसिक जांच और DNA परीक्षण के लिए भेजा गया है.
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पुलिस के मुताबिक, माधवदास भक्तिराम साधु ने शुरुआत में दावा किया था कि उसकी दादी सास शांताबेन गंभीरभाई वसावा की हत्या उसकी पत्नी उर्मिलाबेन उर्फ जया और एक रिश्तेदार ने की थी. उसने यह भी बताया था कि शव घर के अंदर सीमेंट के नीचे दफन है. पुलिस ने बताए गए रिश्तेदार से पूछताछ की, लेकिन उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला. इसके बाद जांच का रुख सूचना देने वाले माधवदास की तरफ हो गया.
पत्नी को फंसाने की चाल, पूछताछ में खुला ट्रिपल मर्डर
पूछताछ में माधवदास के बयानों में विरोधाभास सामने आए. पुलिस के मुताबिक, इसके बाद उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने पत्नी उर्मिला के साथ मिलकर शांताबेन की हत्या की थी. 7 अक्टूबर 2022 की रात शांताबेन घर में सो रही थीं. आरोप है कि दंपति ने तकिए से उनका मुंह दबाकर हत्या कर दी और शव को एक ड्रम में रख दिया.
इसके बाद ड्रम में सीमेंट और पानी डालकर उसे पूरी तरह बंद कर दिया गया. करीब साढ़े तीन महीने तक शव इसी तरह घर में रखा रहा. मौका मिलने पर दंपति ने ड्रम को खोलकर शव और सीमेंट के अवशेषों को घर के आंगन में खोदे गए गड्ढे में दफना दिया. पुलिस के मुताबिक, ऊपर से सीमेंट की मोटी परत भी बना दी गई, ताकि किसी को शक न हो.
शांताबेन की मौत को छिपाने के लिए रिश्तेदारों को अलग-अलग कहानी बताई गई. पुलिस के अनुसार, किसी को उनकी मौत कोरोना से होने की बात बताई गई तो किसी को दूसरी जगह मौत की जानकारी दी गई. जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि शांताबेन की हत्या के पीछे संपत्ति और कीमती सामान हासिल करने का इरादा होने का आरोप है.
एक हत्या से खुला दूसरा और तीसरा राज
पूछताछ आगे बढ़ी तो कहानी सिर्फ शांताबेन की हत्या तक सीमित नहीं रही. पुलिस के मुताबिक, माधवदास और उर्मिला ने वर्ष 2022 में दो और महिलाओं की जान ली थी. इनमें माधवदास की मां मंजुलाबेन भक्तिराम साधु और उर्मिला की बहन भारतीबेन उर्फ भगवती कमलेशभाई वसावा शामिल थीं. तीनों मृतक महिलाएं आरोपी दंपति के परिवार से जुड़ी थीं.
पुलिस के अनुसार, मंजुलाबेन करीब 65 वर्ष की थीं और लंबे समय से लकवे की बीमारी से पीड़ित थीं. उनकी देखभाल और इलाज का खर्च उठाना आरोपी दंपति के लिए मुश्किल बताया गया. आरोप है कि 19 जुलाई 2022 की रात दोनों ने तकिए से उनका मुंह दबाकर हत्या कर दी. इसके बाद परिवार और गांव के लोगों को बीमारी से स्वाभाविक मौत की बात बताई गई और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया.
तीसरी मृतक भारतीबेन उर्फ भगवती थीं, जो उर्मिला की बहन थीं और टीबी से पीड़ित थीं. पुलिस के मुताबिक, उनके इलाज और देखभाल से बचने के लिए 25 फरवरी 2022 की रात उनकी भी कथित तौर पर तकिए से मुंह दबाकर हत्या की गई. बाद में उनकी मौत को बीमारी से जोड़ते हुए अंतिम संस्कार कर दिया गया.
चार साल बाद जमीन के नीचे से निकला राज
शांताबेन के शव की तलाश में पुलिस ने सरकारी पंचों, FSL अधिकारियों, मेडिकल टीम और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में खुदाई कराई. करीब चार से पांच फीट तक जमीन खोदने के बाद सीमेंट से दबा अवशेष बरामद हुआ. कपड़े और कंगन मिलने के बाद रिश्तेदारों ने इसे शांताबेन के रूप में पहचाना, हालांकि पुलिस ने वैज्ञानिक पुष्टि के लिए अवशेष FSL और DNA जांच के लिए भेजे हैं.
पुलिस के मुताबिक, माधवदास और उर्मिला पिछले कुछ समय से अलग रह रहे थे. इसी दौरान माधवदास ने पत्नी और उसके रिश्तेदार को हत्या में फंसाने के लिए कथित तौर पर पुलिस को सूचना दी थी. लेकिन जिस व्यक्ति का नाम उसने लिया, उसकी भूमिका नहीं मिली. यही जांच का वह मोड़ था, जिसने करीब चार साल पुराने तीन हत्याकांड की परतें खोल दीं.
पुलिस ने माधवदास भक्तिराम साधु और उर्मिलाबेन उर्फ जया को गिरफ्तार किया है. दोनों से पूछताछ के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है. पुलिस तीनों मौतों से जुड़े बयानों, बरामद अवशेषों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और दूसरे साक्ष्यों को जोड़ रही है. जांच मांगरोल के डिप्टी एसपी बी.के. वनार के मार्गदर्शन में चल रही है.
पुलिस के अनुसार, माधवदास मूल रूप से अहमदाबाद ग्रामीण के धोलका क्षेत्र के वालथेरा गांव का रहने वाला है और उसका कोई स्थायी व्यवसाय नहीं था. वह मजदूरी के लिए कभी कोसंबा तो कभी कलोल-छत्राल के औद्योगिक इलाके में रहता था. उर्मिला और माधवदास की शादी करीब 17 साल पहले हुई थी और उनके एक बेटा तथा एक बेटी हैं. पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है.
फॉरेंसिक रिपोर्ट बताएगी अवशेषों का सच
अब पुलिस की जांच का अहम हिस्सा बरामद मानव अवशेषों की वैज्ञानिक पहचान है. FSL जांच और DNA परीक्षण से यह स्पष्ट किया जाएगा कि सीमेंट से भरे ड्रम से मिले अवशेष शांताबेन के ही हैं या नहीं. इसके साथ ही पुलिस तीनों हत्याओं में आरोपियों की भूमिका और घटनाओं से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है.
इस केस में सबसे बड़ा मोड़ वही सूचना बनी, जिसके जरिए माधवदास ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और उसके रिश्तेदार को फंसाने की कोशिश की. जिस हत्या का आरोप लेकर वह पुलिस के पास पहुंचा था, उसी की जांच ने उसके खिलाफ तीन हत्याओं की कहानी खोल दी. अब फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अदालत में मामले की चार्जशीट मजबूत करने की तैयारी में है.