सरकार और पुलिस की तरफ से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. अहमदाबाद में साइबर ठगी का ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें एक रिटायर्ड फौजी की 79 वर्षीय पत्नी साइबर ठगों की चाल में फंस गईं. ठगों ने बुजुर्ग महिला को आतंकी से कनेक्शन होने का डर दिखाया. इसके बाद उन्हें जांच के नाम पर वीडियो कॉल पर लगातार बने रहने के लिए मजबूर किया गया. साइबर ठगों ने खुद को मुंबई एटीएस का अधिकारी बताया और महिला को भरोसे में लेकर उनके बैंक खाते से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली.
इसके बाद ठगों ने सरकारी बैंक खाते में रकम जमा कराने के नाम पर महिला से अलग-अलग किस्तों में कुल 38 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए. पैसे भेजने के बाद महिला को पूरे मामले पर शक हुआ. उन्होंने परिवार को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद पता चला कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं. पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, घटना 2 जुलाई की है. उस समय बुजुर्ग महिला अपने घर पर अकेली थीं. इसी दौरान उनके पास एक अनजान नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आया.
कॉल करने वाले ने अपनी पहचान मुंबई एटीएस के एसीपी अशोक यादव के रूप में बताई. उसने महिला से कहा कि एक आतंकी पकड़ा गया है. उसके पास से 58 करोड़ रुपये बरामद हुए हैं और इस रकम का 10 प्रतिशत पैसा महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर होने की बात सामने आई है. इस दावे के बाद महिला को डराया गया कि उनके बैंक खाते का संबंध आतंकी गतिविधि से जुड़ा हो सकता है. ठगों ने जांच के नाम पर महिला से पूछताछ शुरू कर दी.
मुंबई आने में असमर्थता जताई तो वीडियो कॉल पर रखा
महिला ने जब जांच के लिए मुंबई आने में असमर्थता जताई, तो साइबर ठगों ने ठगी का तरीका और आगे बढ़ा दिया. उन्होंने पुलिस की यूनिफॉर्म और एटीएस के लोगो के साथ वीडियो कॉल की. वीडियो कॉल के दौरान महिला को लगातार कैमरे के सामने बने रहने के लिए मजबूर किया गया. ठगों ने उनसे कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वीडियो कॉल चालू रखना होगा. इस दौरान ठगों ने महिला को ‘बुजुर्ग’ कहकर संबोधित किया और सम्मानजनक तरीके से बात करते हुए उनका भरोसा जीतने की कोशिश की. पुलिस और एटीएस अधिकारी होने का दावा करते हुए उन्होंने महिला को लगातार मानसिक दबाव में रखा.
वीडियो कॉल के दौरान साइबर ठगों ने महिला से उनके पहचान पत्र की जानकारी हासिल की. इसके साथ ही बैंक खाते से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी भी ले ली. इसके बाद ठगों ने महिला को बताया कि जांच के लिए उनके खाते में मौजूद रकम को एक सरकारी बैंक खाते में जमा करना होगा. उन्होंने महिला को भरोसा दिलाया कि अगर जांच में वह निर्दोष साबित होती हैं, तो उनकी पूरी रकम ब्याज सहित वापस कर दी जाएगी. महिला ठगों की बातों पर भरोसा कर बैठीं. पुलिस के फर्जी आधिकारिक पत्र और लगातार दी जा रही धमकियों के कारण वह डर गईं और ठगों के बताए बैंक खाते में पैसे भेजने लगीं.
बुजुर्ग महिला ने साइबर ठगों के बताए बैंक खाते में एक बार में नहीं, बल्कि अलग-अलग किस्तों में रकम जमा की. इस तरह उन्होंने कुल 38 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. ठगों ने महिला को यह भरोसा दिलाया था कि जांच पूरी होने के बाद उन्हें उनकी रकम ब्याज के साथ वापस मिल जाएगी. इसी भरोसे में महिला लगातार पैसे भेजती रहीं. जब पूरी रकम ट्रांसफर हो गई, तब महिला को इस पूरे मामले पर शक हुआ. उन्हें लगा कि उनके साथ धोखा हुआ है. इसके बाद उन्होंने अपने परिवार के लोगों को पूरी घटना की जानकारी दी.
महिला ने जब परिवार को बताया कि उनसे जांच के नाम पर 38 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए हैं, तो परिवार को पूरे मामले पर शक हुआ. इसके बाद सामने आया कि महिला साइबर ठगों की बड़ी साजिश का शिकार हो चुकी हैं. इसके बाद मामले की शिकायत अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. मामले में अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने शिकायत दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है. पुलिस का उद्देश्य इस साइबर ठगी से जुड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पता लगाना है.
ठगों ने महिला को डराने के लिए आतंकी कनेक्शन, मुंबई एटीएस और सरकारी जांच का सहारा लिया. पुलिस यूनिफॉर्म और एटीएस के लोगो वाली वीडियो कॉल के जरिए महिला को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि सामने अधिकारी ही हैं. इसके बाद जांच के नाम पर बैंक खाते की जानकारी ली गई और रकम सरकारी खाते में जमा कराने की बात कही गई. महिला से कुल 38 लाख रुपये अलग-अलग किस्तों में ट्रांसफर कराए गए.
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का नया तरीका
इस मामले में साइबर ठगों ने बुजुर्ग महिला को सिर्फ फोन पर डराया नहीं, बल्कि वीडियो कॉल के जरिए लगातार अपने सामने बनाए रखा. उन्हें कहा गया कि जांच पूरी होने तक वीडियो कॉल बंद नहीं करनी है. ठगों ने खुद को पुलिस और एटीएस अधिकारी बताकर महिला का भरोसा जीता. इसके बाद आतंकी से कनेक्शन का डर दिखाकर उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया. फर्जी आधिकारिक पत्रों और धमकियों के जरिए महिला से पैसे ट्रांसफर करवाए गए. आखिरकार महिला ने अलग-अलग किस्तों में 38 लाख रुपये भेज दिए. पैसे ट्रांसफर होने के बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने परिवार को इसकी जानकारी दी. अब अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन इस मामले की जांच कर रहा है. पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफा