NSUI और कांग्रेस नेता ने गुजरात यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति के खिलाफ 40 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. इसे लेकर आज NSUI और कांग्रेस नेता ने गुजरात यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन किया और इंचार्ज कुलपति को कार्रवाई के लिए आवेदन दिया है.
NSUI ने पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता के खिलाफ FIR दर्ज करवाकर भ्रष्टाचार की गई रकम रिकवर करने की मांग की है. NSUI के नेता और कार्यकर्ताओं ने गुजरात यूनिवर्सिटी में स्थित कुलपति के ऑफिस में 100, 200, 500 रुपये के नकली नोट उछाले. इस दौरान इंचार्ज कुलपति के ऑफिस और टेबल पर नकली नोटों की जैसे चादर बिछ गई.
केंद्र सरकार के ग्रांट के तौर पर गुजरात यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के तहत 40 करोड़ रुपये की ग्रांट दी गई थी. NSUI का गुजरात यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता पर आरोप है कि इसमें से 9.84 लाख रुपये पूर्व कुलपति ने अपने जर्मनी में रहने वाले बेटे के अकाउंट में फॉरेक्स के जरिए ट्रांसफर करवाये.
आरोप ये भी है कि खुद को प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर बनाकर उन्होंने अपने मूल वेतन से अलग हर माह 4.20 लाख रुपये सिंडिकेट की मंजूरी के बगैर ही सैलरी के तौर पर वसूले.
पूर्व कुलपति के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग
गुजरात यूनिवर्सिटी के इंचार्ज कुलपति जगदीश जोशी को NSUI और कांग्रेस के नेता ने आवेदन देकर पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता के खिलाफ निष्पक्ष कमिटी बनाकर भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है. उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के लिए पूर्व कुलपति के खिलाफ FIR दर्ज हो, साथ ही भ्रष्टाचार की गई रकम की वसूली इंटरेस्ट के साथ वापस ली जाए. अ
NSUI और कांग्रेस ने कहा है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी जाती है तो आने वाले दिनों में इंचार्ज कुलपति के यूनिवर्सिटीज में प्रवेशबंदी की जाएगी. इसके साथ ही जंतर मंतर से भी बड़ा आंदोलन किया जा सकता है.
कांग्रेस के नेता इंद्रविजय सिंह गोहिल ने कहा, 'जितना भारत की सभी यूनिवर्सिटियों में हुआ होगा, उससे ज्यादा भ्रष्टाचार गुजरात यूनिवर्सिटी में पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता ने किया है. गुजरात मॉडल की बात करने वाले समाज की यूनिवर्सिटी में क्या मॉडल अपनाया गया है. यूनिवर्सिटी शहर के सबसे प्राइम लोकेशन पर है, जिसका फायदा उठाते हुए यहां के कुलपति यूनिवर्सिटी की जमीन को 50/100 साल तक रेंट पर दे रहे है.'
जान-पहचान वालों को यूनिवर्सिटी में नौकरी देने के आरोप
उन्होंने आगे कहा, 'पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता ने किसी प्रक्रिया या मंजूरी के बगैर ही ONGC से निवृत्त अपने जान-पहचान वाले कर्मियों को यूनिवर्सिटी में नौकरी देकर लाखों की सैलरी चुकाई. जिसका विरोध हुआ तो इंचार्ज कुलपति ने कमिटी का गठन करके जांच करवाई, बाद में जिन्हें नौकरी पर रखा गया था, सभी को सस्पेंड किया गया.'
गोहिल ने कहा कि भ्रष्टाचार की रकम रिकवर होनी चाहिए. अगर कोई कार्रवाई नहीं होती तो इंचार्ज कुलपति का यूनिवर्सिटी में आना मुश्किल कर देंगे. जंतर मंतर से बड़ा आंदोलन शहर में करेंगे. आने वाले दिनों में गुजरात यूनिवर्सिटी के पैसों से कितने लाख की लिपस्टिक ली है, उसका भी हम रिकॉर्ड सबके सामने रखेंगे.
यूनिवर्सिटी के इंचार्ज कुलपति ने दिया कार्रवाई का भरोसा
गुजरात यूनिवर्सिटी के इंचार्ज कुलपति जगदीश जोशी ने कहा, 'छात्र नेता और कार्यकर्ताओं ने PMJVK की ग्रांट को लेकर आवेदन दिया है, हम उसपर पारदर्शी तरीके से जांच करके जरूरी कार्रवाई करेंगे. PMJVK को लेकर उसकी शर्तों को देखना पड़ेगा, अगर पैसे सैलरी के तौर पर लिए गए है तो उसकी वैद्यता को लेकर जांच करने के बाद ही कुछ कह सकता हूं. '
जोशी ने आगे बताया कि पूर्व कुलपति के समय में जिन कर्मियों को नौकरी पर रखा गया था, कमिटी की रिपोर्ट आने के बाद उन सभी को सस्पेंड कर दिया गया है. कमिटी इस हपते में फाइनल रिपोर्ट देगी और उसके बाद जरूरी कदम उठाये जायेंगे. कुछ मसलों पर लीगल ओपिनियन लेने के बाद हमारे अधिकार क्षेत्र में जो भी है, उस हिसाब से कदम उठायेंगे.