scorecardresearch
 

देवभूमि से इंडस्ट्रियल डेस्टिनेशन तक, उत्तराखंड का बदलता आर्थिक चेहरा

उत्तराखंड अपनी पर्यटन-आधारित पहचान से आगे बढ़ रहा है, वह मैन्युफैक्चरर्स को आकर्षित करने और अपने आर्थिक आधार को मजबूत करने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक नीतियों का इस्तेमाल कर रहा है.

Advertisement
X
अब सिर्फ देवभूमि नहीं, इंडस्ट्रियल डेस्टिनेशन भी है उत्तराखंड (Photo-ITG)
अब सिर्फ देवभूमि नहीं, इंडस्ट्रियल डेस्टिनेशन भी है उत्तराखंड (Photo-ITG)

देवभूमि यानी देवताओं की धरती से एक उभरते औद्योगिक केंद्र तक, उत्तराखंड आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, बेहतर कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से अपनी नजदीकी का लाभ उठाते हुए राज्य विनिर्माण क्षेत्र के विकास को गति देने की कोशिश कर रहा है.

यह बदलाव बिजनेस टुडे के India@100 Summit में चर्चा के केंद्र में रहा, जहां Business Today Manufacturing Special का अनावरण उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया. इस मैगजीन का अनावरण इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर इन चीफ कली पुरी, इंडिया टुडे ग्रुप के ग्रुप CEO दिनेश भाटिया, बिजनेस टुडे के COO आलोक नायर और ग्रुप एडिटर सिद्धार्थ जराबी की मौजूदगी में हुआ. 

समिट में बोलते हुए धामी ने कहा कि हाल के वर्षों में निवेश गंतव्य के तौर पर उत्तराखंड की छवि में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कंपनियों के लिए कारोबार शुरू करना आसान बनाने के साथ-साथ कनेक्टिविटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर काम कर रही है.

राज्य के आर्थिक आंकड़े भी इस बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं. Deloitte India की एक स्टडी के मुताबिक, पिछले एक दशक में उत्तराखंड का ग्रॉस स्टेट वैल्यू एडेड (GSVA) 143% बढ़ा है, जो राज्य में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार को दर्शाता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: क्या राजनीति में एंट्री करेंगे तुकाराम मुंढे, FDA कमिश्नर बोले- ‘वह भी तो जनसेवा ही है’

दिल्ली से देहरादून की दूरी घटी

इस बदलाव में NCR से बढ़ती कनेक्टिविटी की अहम भूमिका है. धामी ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का जिक्र करते हुए कहा कि अब दिल्ली से देहरादून की दूरी करीब दो से ढाई घंटे में पूरी की जा सकती है. उन्होंने देहरादून से हवाई कनेक्टिविटी के साथ-साथ पंतनगर के आसपास सड़क, रेल और हवाई बुनियादी ढांचे के विकास को भी रेखांकित किया.

सरकार अब औद्योगिक गतिविधियों को मैदानी इलाकों के पार राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों तक ले जाने की भी कोशिश कर रही है. धामी ने कहा कि बागेश्वर, चमोली और अल्मोड़ा में इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना है. वहीं, ‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स’ पहल के जरिए उद्यमिता और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है.

यह विनिर्माण विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय राज्य बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए एक-दूसरे से कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र ने ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों में बड़े विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार किए हैं, उत्तराखंड के सामने चुनौती यह होगी कि सीमित भूमि और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद वह निवेशकों को किस तरह आकर्षित करता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'पलायन रोकना और निराशा खत्म करना प्राथमिकता', बंगाल की आर्थिक स्थिति पर बोले स्वपन दासगुप्ता

धामी ने निवेशक समिट को लेकर उठने वाली उस आम आलोचना का भी जवाब देने की कोशिश की, जिसमें कहा जाता है कि बड़े-बड़े MoU तो साइन हो जाते हैं, लेकिन परियोजनाएं जमीन पर नहीं उतरतीं. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने निवेशकों के सामने आने वाली बाधाओं को कम करने के लिए नीतियों और प्रक्रियाओं पर पहले से काम किया है, ताकि कंपनियों के लिए राज्य में अपना संचालन शुरू करना आसान हो.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement