दिल्ली के सीमापुरी इलाके में चार मंजिला इमारत गिरने से बड़ा हादसा हो गया. हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि 8 लोगों को रेस्क्यू कर GTB अस्पताल पहुंचाया गया है. इनमें एक 3 साल का बच्चा, एक महिला और छह पुरुष शामिल हैं. सभी का इलाज चल रहा है. वहीं, मलबे में अभी 6 लोगों के फंसे होने की आशंका है.
DCP आर मिणा ने बताया कि यह इमारत करीब 25 गज के प्लॉट पर बनी थी. इमारत गिरने की सूचना मिलते ही राहत और बचाव टीम मौके पर पहुंची. मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है. रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है.
फिलहाल यह साफ नहीं है कि हादसे के वक्त इमारत के अंदर कुल कितने लोग मौजूद थे. मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या का भी अभी पता नहीं चल पाया है. इमारत किस वजह से गिरी, यह भी स्पष्ट नहीं है. बचाव टीम मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रही है.
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.मौके पर पहुंचीं दमकल की चार गाड़ियां
हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. रेस्क्यू टीम मलबे को हटाने में जुटी है. कोशिश है कि अगर कोई व्यक्ति अंदर फंसा है तो उसे जल्द बाहर निकाला जा सके.
कितने लोग फंसे हैं, अभी साफ नहीं
हादसे के बाद रेस्क्यू किए गए 8 लोगों को GTB अस्पताल ले जाया गया. इनमें 3 साल का बच्चा, एक महिला और छह पुरुष हैं. सभी का इलाज चल रहा है. उनकी हालत को लेकर फिलहाल ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. मौके पर राहत और बचाव का काम जारी है. टीम मलबे के अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रही है. प्रशासन की ओर से हादसे की वजह और इमारत में मौजूद लोगों की संख्या को लेकर आगे की जानकारी जुटाई जा रही है.
दिल्ली में इमारत गिरने का यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब हाल में सत्य निकेतन में एक बड़ी इमारत ढहने की घटना सामने आई थी. दरअसल, 6 सितंबर 2026 को दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत गिर गई थी. उस हादसे में 5 स्टूडेंट्स समेत 7 लोगों की मौत हुई थी. उस मामले में MCD के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया था. इनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल थे.
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने बिना अनुमति बनी पांचवीं मंजिल वाली इमारतों को सील करने का आदेश दिया था. आसपास के PG और दूसरी इमारतों की जांच की बात भी कही गई थी. नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई का निर्देश दिया गया था. इसके अलावा, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुरानी इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की बात कही थी. प्रस्तावित नियम के तहत 20, 30 या 40 साल पुरानी इमारतों की सुरक्षा जांच कराए जाने की बात सामने आई थी. हालांकि, सीमापुरी में गिरी इमारत की वजह अभी साफ नहीं है. फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
ऐसे में सीमापुरी का यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर जमीन पर कितनी सख्ती से जांच हो रही है.