फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 में 174 मुसाफ़िर और 8 क्रू मेंबर में से एक वो ख़ुद भी था. यानि को-पायलट हमाम-अल-हमामी. हमामी अकेला था जिसे पता था कि कुछ देर बाद इस प्लेन में सवार सभी मुसाफिर और क्रू मेंबर मारे जाएगे. यहां तक कि खुद वो भी. हालांकि प्लेन के पायलट यानी कैप्टन स्मित मच्छार को सबसे पहले मरना था. क्योंकि हमामी प्लेन क्रैश करने से पहले ही कॉकपिट में कैप्टन को मारने वाला था.
इसके बाद इस प्लेन को क्रैश करने के लिए किसी तीन में से उसे ऐन वक्त पर एक टारगेट चुनना था. टारगेट मौके के हिसाब से था. तीन में से पहला टारगेट था तेलअवीव का बेन गुरियन एयरपोर्ट, दूसरा तेलअवीव की कोई ऊंची बिल्डिंग और तीसरा जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस. और ये सब कुछ हमाम अल हमामी इसलिए कर रहा था ताकि वो फिलिस्तीन के गाजा में इजराइली जुल्म का बदला ले सके.
जी हां, फ्लाई दुबई हाईजैकिंग और उसे क्रैश करने के छह दिन बाद ये खुलासा हुआ कि ओमानी नागरिक और फ्लाई दुबई का को-पायलट 30 सितंबर को जिस प्लेन को वो खुद उड़ा रहा था, उसे इसलिए क्रैश करना चाहता था ताकि वो इजराइल से गाजा का बदला ले सके. यानी 30 सितंबर को हमाम एक सुसाइडल मिशन पर था.
इजराइली मीडिया के हवाले से खबर आई है कि ये खुलासा हमाम ने यूएई अथॉरिटी के सामने पूछतााछ के दौरान किया है. उसने पूछताछ में ये भी बताया है कि इस सुसाइडल मिशन में वो अकेला था और ये सब कुछ उसने अकेले ही प्लान किया था. हमामा ने ये भी बताया कि प्लेन को इजराइल में क्रैश कर वो एक शहीद की मौत मरना चाहता था.
इजराइली न्यूज पोर्टल माको के मुताबिक यूएई जांच अधिकारियों ने हमाम से पूछताछ के बाद 30 सितंबर को फ्लाई दुबई की उड़ान में मौजूद क्रू मेंबरों से भी लंबी पूछताछ की. पूछताछ के बाद जांच अधिकारियों ने सभी क्रू मेंबर को क्लीन चिट देते हुए कहा कि उनमें से कोई भी हमाम के साथ इस साजिश में शामिल नहीं था. हालांकि इजरायल अब भी इस बात की जांच कर रहा है कि हमाम के पीछे कौन लोग हैं. उसे किसने ट्रैनिंग दी, किसने उसे हायर किया. कोई देश या कोई आतंकवादी संगठन तो हमाम का मददगार नहीं?
हमाम-अल-हमामी ने यूएई जांच अधिकारियों के सामने फ्लाई दुबई को इजरायल में क्रैश करने की अपनी पूरी प्लानिंग के बारे में तफ्सील से बताया. जांच अधिकारियों के हवाले से अमेरिकी और इजरायली मीडिया ने हमाम और उसकी साजिश की जो पूरी कहानी पेश की है वो कुछ यूं है.
हमाम-अल-हमामी का जन्म यूएई में ही हुआ था. पिता ओमान के नागरिक थे और मां सीरियाई नागरिक. शुरुआती पढ़ाई उसने यूएई में ही की. फिर एविएशन की पढ़ाई के लिए वो इंग्लैंड गया. कुछ वक्त उसने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भी पढ़ाई की. लेकिन कोर्स पूरा नहीं कर पाया. इसके बाद न्यूजीलैंड में पायलट की ट्रेनिंग ली. पायलट बनने के बाद उसने पहली नौकरी अपने देश यानि ओमान में की.
ओमान एयर में उसने बतौर पायलट काम करना शुरु किया. लेकिन कुछ साल बाद ही उसके मोबाइल, लैपटॉप से कई ऐसी तस्वीरें मिली जिससे पता चला कि वो अलकायदा के अल जवाहरी और फिलिस्तीन के लोगों को पूरी शिद्दत से फॉलो करता है. हमाम का ये सच और उसकी ये सोच जब ओमान एयर के अधिकारियों को पता चली तो उन्होंने उसके प्लेन उड़ाने पर रोक लगा दी. अब वो ओमान एयर में एडमिनिस्ट्रेटिव जॉब करने लगा.
करीब 7 साल बाद उसने ओमान एयर की नौकरी छोड़ दी. इसके बाद 2025 वो मोरक्को चला गया. उसने मोरक्को की एयरलाइन मारको एयर ज्वॉइन कर ली. पर यहां वो ज़्यादा दिनों तक नहीं रुका. फिर मारको एयर छोड़ वो यूएई आ गया. मार्च 2025 में उसे फ्लाई दुबई में नौकरी मिल गई. असल में हमाम के यूएई आने और फ्लाई दुबई ज्वॉइन करने का एक ख़ास मक़सद था.
हमाम ने कई महीने तक ये स्टडी किया कि तेल अवीव की फ्लाइट रेगुलर और सबसे ज्यादा कहां-कहां से जाती है. तब उसे पता चला लो कॉस्ट एयरलाइन्स फ्लाई दुबई की दुबई से तेल अवीव के लिए रोज़ाना उड़ान जाती है. बस इसीलिए उसने फ्लाई दुबई ज्वॉइन करने की ठान ली थी. हांलाकि ओमान एयर ने उसकी कट्टरपंथी सोच के चलते उसके उड़ान भरने पर रोक लगा दी थी लेकिन इसके बावजूद फ्लाई दुबई में उसे आसानी से नौकरी मिल गई.
इसकी वजह ये थी ना तो ओमान ने दुनिया को हमाम के बारे में बताया ना ही फ्लाई दुबई ने हमाम के बैकग्राउंड को जांचने की ज़हमत उठाई. फ्लाई दुबई ज्वॉइन करने के बाद हमाम पहली बार जून में तेल अवीव के लिए को-पायलट के तौर पर उड़ान भरता है. इसके बाद वो तीन चार बार और दुबई से तेल अवीव जाता है. इस दौरान उसने पूरे रूट की और खासकर तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट और उसके एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानि एटीसी की छोटी से छोटी जानकारी हासिल कर ली थी.
हमाम ने पहली बार इसी साल जुलाई में फ्लाई दुबई की फ्लाइट को तेल अवीव में क्रैश करने की योजना बनाई थी. तब भी वो उस फ्लाइट का को पायलट था. लेकिन पायलट तब कैप्टन स्मित मच्छार नहीं थे. पर साजिश वही थी. कॉकपिट में पायलट को मारकर प्लेन का कंट्रोल अपने हाथ में लेना और फिर तेल अवीव में क्रैश करना. लेकिन जब हमामी प्लेन में सवार हुआ तब अचानक उसे पता चला कि केबिन क्रू मेंबर में से एक उसका दोस्त था. वो दोस्त की जान लेना नहीं चाहता था, इसलिए ऐन वक्त पर इरादा बदल दिया.
फिर उसने अपनी साजिश पर अमल करने के लिए जो अगली तारीख चुनी वो 30 सितंबर थी. असल में सितंबर के दूसरे हफ्ते में फ्लाइट का रोस्टर तैयार हो चुका था. उसे पता था कि 30 सिंतबर को उसकी ड्यूटी दुबई से तेल अवीव की फ्लाइट में है. तभी से उसने साजिश बुननी शुरु कर दी. दुबई से तेल अवीव तक की उड़ान की सारी जानकारी उसके पास थी. हमाम का प्लान ये था कि दुबई से उड़ान भरने के ढाई घंटे बाद वो अपना ऑपरेशन शुरु करेगा.
असल में दुबई से तेल अवीव तक की उड़ान लगभग साढ़े तीन घंटे की है. ढाई घंटे बाद प्लेन जॉर्डन की वायुसीमा यानि एयरस्पेस में दाखिल हो जाती है. जॉर्डन के बाद इजरायल का एयरस्पेस शुरु होता है. प्लान ये था कि जॉर्डन के एयरस्पेस में दाखिल होते ही वो कॉकपिट में रखे क्रैश एक्स से कैप्टन स्मित मच्छार के सिर पर पीछे से हमला करेगा. फिर मच्छार को मारने के बाद प्लेन को अपने कंट्रोल में ले लेगा.
तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर किसी को शक ना हो इसलिए वो बिल्कुल नॉर्मल उड़ान भरेगा. फिर प्लेन को ले जाकर बेन गुरियन एयरपोर्ट पर क्रैश कर देगा. लेकिन उसे इस बात का भी अहसास था कि अगर ऐन वक्त पर कुछ गड़बड़ हुई तो उस सूरत में वो प्लेन को तेल अवीव की किसी इमारत से टकरा देगा. उसने ये भी तय कर रखा था कि अगर ये दोनों मिशन नाकाम रहा तो फिर वो जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस पर प्लेन को गिरा देगा.
इसी प्लान के तहत उड़ान के ठीक ढाई घंटे बाद उसने कैप्टन स्मित पर क्रैश एक्स से हमला किया. लेकिन कैप्टन स्मित मच्छार ने ग़ज़ब की बहादुरी दिखाते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया. जिससे प्लेन में सवार मुसाफिरों को हमाम की साजिश का पता चला और फिर हमाम को उन लोगों ने कंट्रोल में कर लिया. इत्तेफाक से इसी प्लेन में ऑफ ड्य़ूटी दो पायलट भी चल रहे थे. उन्होंने ही फिर प्लेन का कंट्रोल संभाला और उसे सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर बाहिफाज़त लैंड कर दिया.
इजरायल दुनिया के उन चुनिंदा देशों में है, जहां एयरपोर्ट के साथ-साथ तमाम इंटरनेशनल फ्लाइट पर सख्त नजर रखी जाती है. दुनियाभर के उन तमाम देशों की एयरलाइंस के साथ इजरायल का एक समझौता है. समझौता ये कि इजरायल आने वाले हर फ्लाइट के पायलट और को-पायलट की पूरी जानकारी यानि उनके नाम और उनकी नागरिकता 24 से 48 घंटे पहले इजरायल की ट्रांसपोर्ट सिक्योरिटी मिनिस्ट्री डिपार्टमेंट के साथ साझा की जाएगी.
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट इस लिस्ट को इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद और काउंटर इंटेलिजेंस एजेंसी शिनबेट को भेजती है जो ऐसे तमाम पायलट और को-पायलट की जानकारी निकालते हैं. दुनियाभर की एयरलाइंस के साथ इजरायल का एक और समझौता है. समझौता ये कि इजरायल आने वाली किसी भी उड़ान में कोई ऐसा पायलट या को-पायलट नहीं होगा, जिसके साथ इजरायल के राजनयिक रिश्ते नहीं हैं.
ओमान वो देश है, जिसने 1948 में इजरायल के जन्म के बाद से आजतक यानी पिछले 78 सालों से उसे एक देश के तौर पर अब तक मान्यता नहीं दी. इसीलिए इजरायल और ओमान के बीच कोई राजनयिक संबंध भी नहीं है, तो ऐसे में ये सवाल उठ रहे हैं कि फिर एक ओमानी नागरिक यानी को-पायलट हमाम अल हमामी को फ्लाई दुबई की इजराइल जाने वाली फ्लाइट को उड़ाने की इजाजत कैसे मिल गई?
हालांकि फ्लाई दुबई का कहना है कि उसने 28 सितंबर को ही फ्लाई दुबई के पायलट और को-पायलट के बारे में सारी जानकारी इजरायल को दे दी थी. यानी जानकारी मिलने के बाद भी मोसाद और शिन बेट से बड़ी चूक हो गई.
फिलहाल, यूएई अथॉरिटी हमाम अल हमामी से अबू धाबी में लगातार पूछताछ कर रही है. अगर हमाम इस मामले में दोषी करार दिया जाता है तो और उस पर आतंकवाद का मुकदमा चलता है तो यूएई के कानून के तहत उसे सजा-ए-मौत मिलना तय है. यूएई में सजा-ए-मौत फायरिंग स्वक्वायड के जरिए गोली मार कर दी जाती है.