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दिल्ली: काली माता मंदिर परिसर में मिले कंकाल की सच्चाई क्या? फॉरेंसिक जांच में खुला राज

दिल्ली के मिंटो रोड पर सफाई के दौरान मिले कंकाल मामले का खुलासा हो गया है. एक्सपर्ट के शुरुआती आकलन के अनुसार, वह इंसानी कंकाल नहीं है. इस तरह के ढांचे का इस्तेमाल पढ़ाई-लिखाई या स्कूल की लैब में किया जा सकता है.

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काली माता मंदिर परिसर में मिला बॉक्स. (Photo_ITG)
काली माता मंदिर परिसर में मिला बॉक्स. (Photo_ITG)

दिल्ली में मिंटो रोड पर काली माता मंदिर परिसर में स्वच्छता अभियान चल रहा था. ये सफाई अभियान भारतीय जनता पार्टी और एमसीडी की ओर से चलाया जा रहा था. इसमें उस वक्त हड़कंप मच गया, एक बॉक्स में मानव कंकाल जैसी चीज बरामद हुई. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच की. 

शुरुआती पड़ताल के बाद पुलिस प्रशासन ने कहा कि बरामद कंकाल असली है या नकली, इसका सटीक खुलासा फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा. इस बरामदगी पर कबाड़ खरीदने वाले ने बड़ी जानकारी दी है.

मोहम्मद अबरार ने बताया कि उसने एक स्कूल से कबाड़ खरीदा था, जो कि 9 जुलाई को लाया गया था. अबरार का कहना है कि वह स्कूल से ऐसे कई बक्से लाया था और वे पिछले कुछ महीनों से यहीं रखे हुए थे.

दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?

दिल्ली पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया. कबाड़ खरीदने वाले के बयानों की पुष्टि करने की कोशिश की. पुलिस ने कहा कि सफाई अभियान के दौरान कबाड़ के बीच कंकाल जैसी एक चीज मिली है. शुरुआती जांच से पता चला है कि ये स्क्रैप डीलर को एक स्कूल से मिला था.

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इंसानी नहीं, कृत्रिम हड्डियों से बना मॉडल

मामले की गहन जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने बताया कि फॉरेंसिक/क्राइम टीम ने मौके पर पहुंचकर बरामद ढांचे की जांच की.शुरुआती जांच में विशेषज्ञ ने इसे इंसानी हड्डियों का ढांचा नहीं, बल्कि कृत्रिम हड्डियों से बना मॉडल बताया.

यह शैक्षणिक इस्तेमाल के लिए बनाया गया हो सकता है. संभावना है कि इस तरह के मॉडल का इस्तेमाल स्कूल की लैब या शिक्षण संस्थान में अध्ययन के लिए किया जाता हो. प्रारंभिक जांच में मानव कंकाल मिलने की पुष्टि नहीं हुई है.

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