“अगर आपको और चीते चाहिए तो आप चीतों के घर में हैं", दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा का ये बयान सुनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर हंस पड़े थे. लेकिन ये कहानी ब्रिक्स 2026 की न हो कर ब्रिक्स 2023 की है. जब ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में किया गया था.
इस बार ब्रिक्स का आयोजन दिल्ली में हो रहा है. और रोल बदला हुआ है. इस बार भारत मेजबान है और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा मेहमान हैं.
हम आपको 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आए एक हल्के-फुल्के पल की कहानी बता रहे हैं.
राष्ट्रपति रामफोसा ब्रिक्स समिट के प्लेनरी सेशन में बोलते हुए भारत के बिग कैट संरक्षण प्रयासों की सराहना कर रहे थे.
इस दौरान राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा था, “अगर आपको और चीते चाहिए तो आप चीतों के घर में हैं.” यह सुनते ही पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर जोर से हंस पड़े. पूरा माहौल हंसी-मजाक से भर गया.
राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने तब कहा था, " बिग कैट के मुद्दे की चर्चा करने के लिए बहुत धन्यवाद, हमें खुशी है कि भारत को दक्षिण अफ्रीका ने चीता डोनेट किया था, और आपने मुझे बताया कि चीते पहुंच गए हैं, और वो ठीक हैं, मैंने आपको बताया ही है कि दक्षिण अफ्रीका और चीते देने के लिए राजी है, क्योंकि आपका देश बिग कैट्स की अच्छी हिफाजत करता है, हम आपको इसके लिए धन्यवाद देते हैं."
उन्होंने आगे कहा, " अगर आपको और चीते चाहिए, तो आप चीतों के घर में आ गए हैं."
इतना सुनते ही पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर हंसने लगे थे.
इस सम्मेलन में PM मोदी ने ब्रिक्स देशों से बिग कैट्स के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस के तहत संयुक्त प्रयास करने का आह्वान किया था. उन्होंने कहा था कि ब्रिक्स के सभी देशों में कई बिग कैट प्रजातियां पाई जाती हैं और इनके संरक्षण के लिए मिलकर काम किया जा सकता है.
बता दें कि भारत में चीतों को फिर से बसाने का प्रोजेक्ट 2022 में शुरू हुआ था. नामीबिया से आठ और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश) लाए गए. इनमें से कुछ की तो मौत हो चुकी है, लेकिन कई बच्चे पैदा भी हुए हैं.
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए समझौते के अनुसार अगले 10 सालों तक हर साल साउथ अफ्रीका भारत को 12 चीते देगा.