प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर वैल्यूएशन FY26 के 34 गुना पर, जबकि पीयर कंपनियां 41 गुना पर। खुलने से पहले ही बड़े निवेशकों ने करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की रुचि दिखाई है।
IPO खुलने से पहले ही जियो प्लेटफॉर्म्स सुर्खियों में है। 21 अक्टूबर को खुलने वाला यह इश्यू देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा और इसकी प्राइसिंग पर देश के जाने-माने बैंकर उदय कोटक ने अपनी राय रखी है।
देश का सबसे बड़ा IPO, आवेदन के लिए सिर्फ तीन दिन
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। यानी निवेशकों के पास आवेदन के लिए सिर्फ तीन दिन होंगे, जबकि एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगाएंगे।
प्राइस बैंड 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर है। ऊपरी स्तर पर कंपनी 27 करोड़ तक नए शेयर जारी कर 30,213 करोड़ रुपये जुटा सकती है। यह 2024 में आए ह्युंडई मोटर इंडिया के 27,858.75 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड से ज्यादा होगा।
"जियो अपनी तरह की अकेली कंपनी": उदय कोटक
कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर उदय कोटक मानते हैं कि प्राइसिंग समझदारी भरी है। उनके मुताबिक जियो अपनी तरह की अकेली कंपनी है और दूसरी कंपनियों की तुलना में निवेशकों के लिए आकर्षक है।
आंकड़े भी यही कहते हैं। प्राइस बैंड का ऊपरी स्तर FY26 के 34 गुना के बराबर बैठता है, जबकि पीयर कंपनियां 41 गुना पर हैं। आसान शब्दों में, निवेशकों को देश का सबसे बड़ा टेलीकॉम और डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलती-जुलती कंपनियों के मुकाबले कम मल्टीपल पर मिल रहा है। प्राइसिंग की कहानी में यही सापेक्ष डिस्काउंट अहम हिस्सा है।
खुलने से पहले ही भारी मांग
उत्साह सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। IPO खुला भी नहीं है, फिर भी बड़े निवेशकों ने करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की रुचि दिखाई है। ब्लूमबर्ग के हवाले से आई अलग रिपोर्ट्स में भी संस्थागत निवेशकों की संभावित बोलियां 20 अरब डॉलर से ऊपर बताई गई हैं।
बताया जा रहा है कि सिंगापुर, नॉर्वे, अबू धाबी और क़तर के सरकारी फंड हिस्सेदारी चाहते हैं। यह देशों के निवेश फंडों की लंबी अवधि की दिलचस्पी का संकेत है। घरेलू मोर्चे पर LIC, SBI म्यूचुअल फंड और HDFC म्यूचुअल फंड के साथ देश के टॉप 10 म्यूचुअल फंड और टॉप 5 बीमा कंपनियां शामिल हैं। BlackRock, Fidelity और Capital Group जैसे ग्लोबल निवेशक भी रुचि रखते बताए जा रहे हैं। वॉल स्ट्रीट से दलाल स्ट्रीट तक, हर तरह के निवेशकों में दिलचस्पी है।
ये रुचि के संकेत हैं, पक्की बोलियां नहीं। 19 अक्टूबर को एंकर बुक से साफ होगा कि कौन कितना निवेश करता है।
सिर्फ मोबाइल कंपनी नहीं
जियो की अहमियत टेलीकॉम से कहीं आगे है। फोन, इंटरनेट, क्लाउड, एंटरटेनमेंट और बिज़नेस सर्विसेज़ एक ही कंपनी में हैं और कंपनी AI में भी आगे बढ़ रही है। FY26 में जियो प्लेटफॉर्म्स का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 14.6 फीसदी बढ़कर 1,46,885 करोड़ रुपये रहा। मार्च 2026 की तिमाही में 52.4 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर थे और ARPU 214 रुपये रहा। देश के करीब 60 फीसदी मोबाइल डेटा ट्रैफिक को जियो संभालती है। प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी की वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये बैठती है।
जियो को सीधे खरीदने का पहला मौका
अब तक पब्लिक मार्केट के निवेशकों को जियो में हिस्सेदारी सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर के जरिए मिलती थी। IPO के बाद वे सीधे जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर खरीद सकेंगे।
प्राइस बैंड सबके लिए एक ही है। छोटा निवेशक हो या ग्लोबल फंड, सब 1,065 से 1,119 रुपये के दायरे में आवेदन करेंगे। जियो प्लेटफॉर्म्स के पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक और 14 अक्टूबर तक रिलायंस शेयर रखने वाले पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित हैं।
किन बातों पर रहेगी नजर
अब देखना यह है कि रुचि असली बोलियों में कितनी बदलती है। 19 अक्टूबर को एंकर आवंटन, 21 अक्टूबर को इश्यू खुलने पर सब्सक्रिप्शन और करीब एक हफ्ते बाद होने वाली लिस्टिंग पर नजर रहेगी। आवेदन से पहले रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जरूर पढ़ें और जोखिम समझें। यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं।