देश के 6 जिलों के 108 स्कूलों में पढ़ने वाले 6,168 छात्रों पर एक रिसर्च की गई है. इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के आधार पर यह समझने की कोशिश की गई कि स्कूल जाने वाले किन किशोरों में भविष्य में नशे की लत लगने का खतरा ज्यादा है. रिसर्च में पता चला है कि इनमें से हर 5 में से 1 से ज्यादा स्कूली छात्रों में भविष्य में नशे के खतरे की जद में है. स्टडी से जानकारी मिली कि गुवाहाटी के स्कूली छात्रों में नशे की लत का रिस्क सबसे ज्यादा और नागपुर और पुडुचेरी में सबसे कम खतरा है.
इस रिसर्च को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की फंडिंग से किया गया है और इसको मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित किया गया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि नशे तक आसान पहुंच और सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल इस खतरे को बढ़ा रहा है. रिसर्च में पता चला कि गुवाहाटी और नागपुर के स्कूली छात्रों में नशा करने के रिस्क में करीब 35 फीसदी का अंतर था, इस अंतर की बड़ी वजह स्कूल का माहौल और बच्चों के व्यक्तित्व से जुड़े कारण थे. लैंसेट में छपी स्टडी ने देश के स्कूली छात्रों में नशे के बढ़ते खतरे को उजागर किया है. स्टडी से पता चला है कि जिन स्कूली छात्रों को तंबाकू, शराब जैसे नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध थे, उनमें नशे का रिस्क 75 प्रतिशत तक अधिक पाया गया.
कैसे पता चला कि स्कूली छात्रों में है नशे करने का खतरा
जिन स्कूली छात्रों पर यह स्टडी की गई उनमें यह देखा गया है छात्रों में ऐसे गुण तो नहीं है जो जो उसे नशे की ओर ले जा सकते हैं,जैसे देखा गया है कि वह बहुत गुस्से में कोई फैसला तो नहीं लेते हैं. उनमें चिंता का लेवल क्या है. क्या उनको बहुत रोमांच पसंद है. इन सबके आधार पर यह तय किया गया कि भविष्य में बच्चा नशा कर सकता है या नहीं.
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इस दौरान यह पता चला कि कुल 6,168 छात्रों में से 20 फीसदी ऐसे हैं जिनमें यह सभी पैरामीटर भविष्य में नशीले पदार्थों के सेवन करने के खतरे को बताते हैं. रिसर्च में इन बच्चों को मॉडरेट से लेकर हाई रिस्क पर रखा गया है. इसका मतलब यह है कि उनमें नशा शुरू करने या जारी रखने की आशंका सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक है.इनका व्यवहार, माहौल या व्यक्तित्व ऐसा है जो सकते देता है कि यह भविष्य में नशे की ओर जा सकते हैं. हालांकि यह साफ बताया गया कि फिलहाल इनमें कोई बच्चा नशा नहीं कर रहा है, लेकिन भविष्य में रिस्क है.
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मोबाइल पर समय देना बन रहा है बड़ा कारण
इस रिसर्च में बताया गया है कि भविष्य में नशे की लत के बढ़ते खतरे का एक बड़ा कारण मोबाइल फोन है. जो बच्चे मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताते थे, उनमें भी नशे की ओर झुकाव अधिक देखा गया, शोधकर्ताओं का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नशे से जुड़े कंटेंट का होना इसका एक कारण हो सकता है. बच्चे मोबाइल पर कई तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूज करते हैं. जिससे उनको नशे के बारे में जानकारी मिलती है. जिससे नशे को लेकर उनमें उत्साह पैदा होता है. उनको लगता था कि नशा करना गलत नहीं है या इससे कोई नुकसान नहीं होता, जिससे भविष्य में नशे की लत के शिकार होने की आशंका रहती है.