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FCRA संशोधन बिल सोमवार को लोकसभा में हो सकता है पेश, विदेशी फंड पाने वाले NGOs पर सख्त निगरानी की तैयारी

केंद्र सरकार FCRA कानून में संशोधन का बिल सोमवार को लोकसभा में पेश कर सकती है. इसका मकसद विदेशी फंड लेने वाले NGO पर निगरानी बढ़ाना है. नए बिल में नामित प्राधिकरण बनाने, रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर संपत्ति सरकार को सौंपने, संपत्ति बेचने का अधिकार, फंड इस्तेमाल की समय सीमा तय करने, जांच के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी करने और सजा को पांच साल से घटाकर एक साल करने जैसे बदलाव शामिल हैं.

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NGO फंडिंग पर नए नियम की तैयारी में है केंद्र सरकार (Representational Photo: ITG)
NGO फंडिंग पर नए नियम की तैयारी में है केंद्र सरकार (Representational Photo: ITG)

FCRA में बड़ा बदलाव, विदेशी फंड लेने वाले NGO पर अब सरकार की सीधी नजर होगी. सोमवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है नया संशोधन बिल. केंद्र सरकार विदेशी चंदा पाने वाले गैर सरकारी संगठनों यानी NGO के लिए नियमों को और कड़ा करने जा रही है. इसके लिए विदेशी अंशदान नियमन कानून यानी FCRA में संशोधन का बिल सोमवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है. 

सरकार से जुड़े सांसदों और सूत्रों का कहना है कि वंदे मातरम् और परीक्षा पेपर लीक से जुड़े बिल पास होने के बाद अब सरकार इस बिल को आगे बढ़ाना चाहती है. सत्ता पक्ष का कहना है कि विदेशी पैसा लेने वाले संगठनों की जिम्मेदारी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह बदलाव जरूरी हैं. 

हालांकि विपक्ष इस बिल का विरोध कर सकता है क्योंकि उनका मानना है कि इससे NGO के काम करने की आजादी पर असर पड़ सकता है. फिर भी सरकार को भरोसा है कि सदन में यह बिल आसानी से पास हो जाएगा.

यह भी पढ़ें: FCRA 2.0... विदेशी फंडिंग पर शिकंजा, 'विषैले’ NGOs पर सर्जिकल स्ट्राइक

नए बिल में सबसे बड़ा बदलाव एक नई संस्था बनाने का है जिसे नामित प्राधिकरण कहा जाएगा. अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द होता है, खुद सरेंडर करती है या रिन्यू नहीं होता, तो उसका विदेशी फंड और उससे बनी संपत्ति इसी प्राधिकरण के पास चली जाएगी. सरकार चाहे तो यह संपत्ति किसी विभाग को दे सकती है या बेच सकती है, और बिक्री का पैसा सरकारी खजाने में जमा होगा. 

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रजिस्ट्रेशन की अवधि खत्म होने पर वह अपने आप रद्द माना जाएगा. विदेशी फंड कितने समय तक रखा और खर्च किया जा सकता है, इसकी समय सीमा भी तय होगी. सस्पेंशन के दौरान संस्था अपनी संपत्ति बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकेगी. 

FCRA मामलों में जांच अब सरकार की इजाजत के बिना शुरू नहीं होगी. सजा को घटाकर पांच साल से एक साल कर दिया गया है. नियम तोड़ने पर डायरेक्टर, ट्रस्टी और पदाधिकारी भी जिम्मेदार माने जाएंगे. संस्था बंद होने या निष्क्रिय होने पर उसकी संपत्ति स्थायी रूप से सरकार के पास चली जाएगी.

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