कुछ लोगों को शुरुआत में कमर में दर्द होता है. लेकिन फिर कुछ हफ्तों या महीनों बाद ये दर्द पैरों में भी जाने लगता है. अधिकतर लोग इसको कमर की कोई समस्या मानकर इलाज कराते हैं, योग से लेकर अलग- अलग तरह ही एक्सरसाइज का भी सहारा लेते हैं, लेकिन आराम नहीं मिलता है. ये किस बीमारी के कारण होता है और इसका इलाज क्या है इस बारे में जानते हैं.
अगर कमर का दर्द धीरे-धीरे कूल्हे से होते हुए एक या दोनों पैरों तक जाने लगे, तो ये साइटिका हो सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि हमारी कमर से कई नसें निकलकर पैरों तक जाती हैं. जब इनमें से किसी नस पर दबाव पड़ने लग जाता है तो दर्द कमर से शुरू होकर पैरों तक जाता है.
क्या साइटिका कोई बीमारी है?
इस बारे में जीबी पंत अस्पताल में न्यूरोसर्जरी विभाग के पूर्व एचओडी प्रोफेसर डॉ दलजीत सिंह ने बताया है. डॉ सिंह कहते हैं कि साइटिका कोई बीमारी नहीं है. जब साइटिक नस पर प्रेशर पड़ने लगता है तो इसको ही साइटिका कह देते हैं. अधिकतर मामलों में ऐसा कमर में लंबर स्पाइन यानी कूल्हे से ऊपर रीढ़ का जो हिस्सा होता है उसमें डिस्क की समस्या के कारण होता है. जब यह समस्या बढ़ने लगती है तो फिर धीरे- धीरे नसों पर प्रेशर आने लगता है. इस वजह से जो दर्द पहले कमर तक ही रहता था वो पैरों तक जाने लगता है. हालांकि कमर से पैर तक जाने वाला हर दर्द साइटिका नहीं होता. कुछ मामलों में मांसपेशियों, हड्डियों की कोई दूसरी समस्या भी हो सकती है.
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क्या है साइटिका का इलाज?
डॉ सिंह कहते हैं कि साइटिका के इलाज का मकसद दर्द कम करना और आपको आसानी से चलने-फिरने में मदद करना होता है. अगर मरीज में लक्षण हल्के हैं, तो दवाओं और फिजियोथेरेपी से काम चल जाता है, लेकिन अगर दर्द बहुत ज्यादा है, सुन्नपन, झुनझुनी या मांसपेशियों में कमजोरी है तो फिर डॉक्टर की सलाह पर स्पाइनल इंजेक्शन से ट्रीटमेंट शुरू किया जा सकता है.
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हल्के लक्षणों में खुद से कर सकते हैं देखभाल
अगर लक्षण बहुत हल्के हैं तो दर्द कम करने के लिए शिकाई की जा सकती है. इसको एक बार में लगभग 20 मिनट तक करें. स्ट्रेचिंग और हल्की-फुल्की एक्टिविटी से नस पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है.अगर कुछ हफ्तों के बाद भी लक्षणों में सुधार न हो, तो फिर डॉक्टर से सलाह लें.