
नेपाल-चीन के सीमावर्ती इलाकों में भीषण बाढ़ ने खूब तबाही मचाई है. फ्लैश फ्लड की वजह से नेपाल में 27 अगस्त तक 350 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है. वहीं, 900 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं.
इसी बीच किसी ग्लेशियर का एक एरियल वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हेलीकॉप्टर से रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में बर्फ का टूटना और पानी का तेज बहाव देखा जा सकता है. कुछ लोगों का कहना है कि चीन का ये हेलीकॉप्टर ठीक उस जगह पहुंचा जहां ग्लेशियर टूटा और उसकी वजह से आई बाढ़ ने नेपाल में तबाही मचाई.
‘NepalFloods’ जैसे हैशटैग्स के साथ इंस्टाग्राम और फेसबुक पर इस वीडियो को शेयर करते हुए लोग यही दावा कर रहे हैं.

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो अलास्का का है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये Leigh Coates नाम के एक इंस्टाग्राम यूजर के अकाउंट पर मिला. यहां इसे 22 अगस्त को पोस्ट किया गया था, जबकि नेपाल में फ्लैश फ्लड 26 अगस्त को आया था. पोस्ट के मुताबिक ये वीडियो अलास्का के ग्लेशियर का है.
इस पोस्ट में GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के बारे में बताया गया है. पोस्ट के कमेंट में भी एक शख्स ने पूछा कि क्या ये वीडियो नेपाल से संबंधित है. जवाब में Leigh Coates ने बताया कि ये नेपाल या चीन का नहीं, बल्कि अलास्का का वीडियो है.
Leigh Coates एक कमर्शियल हेलीकॉप्टर पायलट हैं. वो ज्यादातर उत्तरी अमेरिका में हेलीकॉप्टर उड़ाती हैं. उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ऐसे ढेरों वीडियो मौजूद हैं, जिनमें उन्होंने आसमान से ग्लेशियर, बर्फ के पहाड़, ऊंची चोटियों और झरनों आदि के नजारे कैद किए हैं.
साफ है कि वायरल वीडियो के साथ किया जा रहा दावा एकदम गलत है.
क्या होता है GLOF?
रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल आपदा के पीछे सामान्य बाढ़ से अलग GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की आशंका जताई जा रही है. पर आखिर ये होता क्या है?
पहाड़ों पर जब ग्लेशियर पिघलते हैं, तो वो बर्फ या मिट्टी-पत्थरों के प्राकृतिक बांध से बनी झील में इकट्ठा होते रहते हैं. जब ये कुदरती बांध टूट जाता है, तो झील में भरा पानी तेजी से बाहर निकल जाता है. इसकी वजह से निचले इलाकों में अचानक भीषण बाढ़ आ जाती है. इसी घटना को GLOF कहा जाता है. इससे जमीन का ढांचा बदल जाता है और जान-माल का भारी नुकसान भी हो सकता है.
नेपाल आपदा को लेकर पहले कहा गया कि लैंडस्लाइड से ठीक पहले चीन-नेपाल बॉर्डर पर भूकंप आया था. लेकिन बाद में अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की टीम ने बताया कि ये घटना ग्लेशियर के टूटने और इसके बाद मलबे के बहाव की वजह से हुई जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही हुई.