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The Traitors 2 Review: रात के अंधेरे में बेखौफ 'मर्डर', फरेब की पिच पर शुभमन गिल की बहन लगा रहीं छक्के-चौके

द ट्रेटर्स में छल-कपट, माइंड गेम्स और धोखेबाजी का जबरदस्त खेल चल रहा है. यहां हर चेहरा एक झूठा नकाब ओढ़े हुए है. रात के अंधेरे में बेखौफ मर्डर हो रहे हैं और दिन के उजाले में बेगुनाह अपनी लाचारी पर आंसू बहाते दिख रहे हैं. अगर आप साइकोलॉजिकल थ्रिलर और शातिर माइंड-गेम्स के शौकीन हैं, तो करण जौहर का यह शो आपके लिए ही बना है.

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द ट्रेटर्स का रिव्यू
द ट्रेटर्स का रिव्यू

शह और मात की बाजी तो आपने कई बार देखी होगी, लेकिन सच को झूठ और झूठ को सच बनाने का ऐसा फरेब शायद ही कहीं देखा हो. 'द ट्रेटर्स 2' में यही खेल सरेआम चल रहा है. सबसे मजेदार बात यह है कि धोखेबाजी और छल-कपट का यह ओवरडोज देखने में काफी दिलचस्प लगता है. खुद को बेगुनाह साबित करने की कोशिश में तड़पते बेबस इनोसेंट्स के चेहरे और उनके सामने खड़े शातिर दिमाग वाले ट्रेटर्स...अगर हाथ में पॉपकॉर्न का बाउल लेकर बैठेंगे, तो सफाई से बोले जा रहे इन सभी के झूठों को सुनने का मजा दोगुना हो जाएगा. 

जैसलमेर के भव्य महल में चूहे-बिल्ली का खेल दिलचस्प मोड़ ले चुका है. हर कंटेस्टेंट के चेहरे पर एक झूठा नकाब है और हर किसी को लगता है कि वो सामने वाले का मन पढ़ सकता है. दोस्ती का हाथ बढ़ाकर पीठ में खंजर घोंपना इस शो का नया नियम बन चुका है. एक तरफ इनोसेंट्स ट्रेटर्स को ढूंढने में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ ट्रेटर्स भी डंके की चोट पर रात के अंधेरे में एक-एक करके इनोसेंट्स का बेखौफ होकर मर्डर करने से परहेज नहीं कर रहे.

ट्रेटर्स का शातिर दिमाग या इनोसेंट्स का पलटवार, कौन किसपर भारी?

गेम में मुकाबला बराबरी का चल रहा है, लेकिन दिमाग के मामले में ट्रेटर्स फिलहाल एक कदम आगे हैं. वो गेम के सबसे मजबूत खिलाड़ियों को ही सीधे रास्ते से हटा रहे हैं. हालांकि, इनोसेंट्स ने भी पूरी तरह घुटने नहीं टेके. वो अब तक हरमन सिंघा और कुल्लू के रूप में दो ट्रेटर्स का शिकार कर चुके हैं. कुल्लू ने ट्रेटर बनकर काफी समझदारी से बाजी पलटी थी, लेकिन सर्कल ऑफ शक में उनका दांव उल्टा पड़ गया और इनोसेंट्स ने उन्हें पकड़ लिया. 

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कौन चल रहा है सबसे तगड़ी चाल?

शहनील गिल का मासूम फरेब-

शुभमन गिल की बहन शहनील गिल इस सीजन का सबसे बड़ा सरप्राइज पैकेज हैं. वो इतनी मासूमियत से ट्रेटर का रोल निभा रही हैं कि किसी को उनपर शक तक नहीं हो रहा. शहनील पूरी सूझबूझ और शांति से कदम बढ़ा रही हैंं. कहां और किसके सामने कितना बोलना है और खुद को कैसे डिफेंड करना है...उन्हें बखूबी आता है. 

क्रिस्टल का मास्टरस्ट्रोक-

क्रिस्टल डिसूजा ने साबित किया है कि दबाव में कैसे खेला जाता है. शक की सुई अपनी तरफ घूमने के बावजूद उन्होंने पलक झपकते ही खुद को बेगुनाह साबित कर दिया और गेम का पूरा पासा ही पलट दिया. क्रिस्टल मासूमियत की आड़ में तगड़ा गेम खेल रही हैं. 

पारुल और अभिषेक की पैनी नजर ट्रेटर्स पर पड़ी भारी

पारुल गुलाटी इस सीजन की सबसे निडर और जुनूनी प्लेयर साबित हुई हैं. उन्होंने हरमन को बेनकाब तो किया, लेकिन उनका फ्रंट-फुट पर गेम खेलना उन्हें ले डूबा और बाकी इनोसेंट्स ने उन्हें ही सर्कल ऑफ शक में बाहर का रास्ता दिखा दिया.

दूसरी ओर, अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान) अपने लॉजिक और सिचुएशनल अवेयरनेस के दम पर साइलेंट किलर बनकर उभरे. अभिषेक ने शो में काफी दिमाग लगाया. उन्होंने ट्रेटर्स को पकड़ा भी. लेकिन अभिषेक को खतरा मानते हुए ट्रेटर्स ने रात के अंधेरे में उनका मर्डर करके उन्हें शो से बाहर कर दिया. लेकिन जाते-जाते अभिषेक गेम में अपनी तगड़ी छाप छोड़ गए. 

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इन हसीनाओं ने लगाया ग्लैमर का तड़का

मल्लिका शेरावत, श्वेता तिवारी और रिया चक्रवर्ती जैसी बड़ी हस्तियों से फैंस को काफी उम्मीदें थीं. लेकिन अफसोस, ये तीनों माइंड गेम्स के बजाय शो में सिर्फ अपने ग्लैमर और स्क्रीन प्रेजेंस तक सीमित रह गई हैं. ये तीनों खुद भी अपने बेवकूफी भरे गेम से खुश नहीं हैं. 

कहां सुस्त पड़ी चाल?

करण जौहर के शो ट्रेटर्स में ट्विस्ट जबरदस्त हैं, लेकिन शो के टास्क कई जगह रफ्तार धीमी कर देते हैं. कुछ टास्क थोड़े उबाऊ लगते हैं और रोजाना का एक जैसा रूटीन एक समय के बाद बोरियत महसूस कराने लगता है. मेकर्स अगर इन टास्क को गेम के साइकोलॉजिकल ड्रामे से थोड़ा और जोड़ते, तो रोमांच चरम पर होता.

अंत में यही कहेंगे कि तमाम कमियों के बावजूद, 'द ट्रेटर्स 2' धोखे, सस्पेंस और ह्यूमन साइकोलॉजी का ऐसा कॉकटेल, जिसे मिस करना मुश्किल है. अगर आपको बैकस्टैबिंग और माइंड-गेम्स पसंद हैं, तो यह शो आपके बिंज-वॉच लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए. 

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