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'सतलुज' के लिए जसवंत सिंह के परिवार से मिले थे अर्जुन रामपाल, बोले 'उन्हें इस कहानी से बहुत उम्मीद थी'

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' पर मचे बवाल के बीच, फिल्म में सीबीआई ऑफिसर का रोल करने वाले अर्जुन रामपाल ने अपना अनुभव शेयर किया है. उन्होंने बताया है कि इस फिल्म में काम करके और जसवंत सिंह खालड़ा के रियल परिवार से मिलकर उन्हें कैसा लगा था.

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अर्जुन रामपाल ने शेयर किया 'सतलुज' में काम करने का अनुभव (Photo: Screengrab)
अर्जुन रामपाल ने शेयर किया 'सतलुज' में काम करने का अनुभव (Photo: Screengrab)

दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज कई साल तक अटकने के बाद हाल ही में जी5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज के 48 घंटे के बाद ही ओटीटी प्लेटफॉर्म से फिल्म हटा दी गई. सतलुज का इस तरह हटना तो आजकल विवादों में है ही, लेकिन जिन लोगों ने फिल्म देखी है वो दिलजीत के साथ-साथ अर्जुन रामपाल की भी तारीफ करते नहीं थक रहे.

कहानी में सीबीआई ऑफिसर समुद्र सिंह का रोल कर रहे अर्जुन की इंटेंस परफॉर्मेंस ने धुरंधर के बाद फिर से दर्शकों को उनका मुरीद बना दिया है. अब अर्जुन ने बताया है कि ये फिल्म करने का अनुभव उनके लिए कैसा था और इस कहानी के रियल हीरो जसवंत सिंह खालड़ा के परिवार से मिलकर उन्हें कैसा लगा था.

फिल्म मिलने पर ही बहुत एक्साइटेड थे अर्जुन

अर्जुन ने फिल्मफेयर से एक बातचीत में बताया कि सतलुज में रोल मिलने पर ही उन्हें एहसास था कि ये कहानी कितनी महत्वपूर्ण है. अर्जुन ने कहा, 'सचमुच रोंगटे खड़े हो गए थे. इतनी महत्वपूर्ण कहानी का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद खास था. ऐसा सच, जिसे दशकों तक दबाया गया. ये एक बहुत दमदार मैसेज देने वाली फिल्म है. जब पावर गलत हाथों में पहुंच जाए तो उसका कैसा दुरुपयोग होता है. जसवंत सिंह खालड़ा और उनके परिवार का बड़ा बलिदान. पंजाब के मासूम लोगों की दर्द. सीबीआई ऑफिसर समुद्र सिंह के रोल में मेरा किरदार उनके लिए एक उम्मीद लेकर आता है. ये ऐसी कहानी है, जो आपको झिंझोड़ती भी है और जवाबदेही का सवाल भी उठाती है.'

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हनी त्रेहान की ये फिल्म पंजाब के ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर बेस्ड है. उन्होंने एक ताकतवर सिस्टम के सामने सच की लड़ाई कभी नहीं छोड़ी. जहां दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभाया, वहीं अर्जुन रामपाल सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर समुद्र सिंह बने हैं, जो जसवंत के लापता होने की जांच करने पहुंचते हैं.

पुलिस थानों की रियल लोकेशन्स, और कहानी से जुड़ी जगहों पर शूटिंग को याद करते हुए अर्जुन ने कहा, 'हनी ने वो दुनिया बहुत बेहतरीन तरीके से तैयार की. मोहनन ने अपने कैमरे से उस दौर की उदासी को शानदार तरीके से कैद किया. कॉस्ट्यूम, आर्ट डायरेक्शन और असली लोकेशन्स ने उस दौर को फिर से जिंदा कर दिया. पर्दे, फोन, फर्नीचर, टेबल क्लॉथ... सब कुछ देखकर मुझे 80 और 90 का दशक याद आ गया, जो मैंने खुद जिया है.'

जब अर्जुन से पूछा गया कि क्या उन्हें उन परिवारों से मिलने का मौका मिला जिन्होंने खुद ये त्रासदी झेली थी?

तो अर्जुन ने कहा, 'चंडीगढ़ पहुंचने के पहले ही दिन हनी ने हमें जसवंत सिंह के परिवार से मिलवाया. हम कई ऐसे परिवारों से भी मिले जिन्होंने खुद ये त्रासदी भुगती है. उन सभी को उम्मीद थी कि बेहद जरूरी मैसेज वाली ये कहानी दुनिया तक पहुंचे. सहानुभूति के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न दोहराई जाएं.'

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अर्जुन ने बताया कि फिल्म का मकसद समझने में हनी त्रेहान के साथ हुई लंबी चर्चाओं का बड़ा रोल रहा. उन्होंने बताया, 'हमने घंटों बातचीत की. कई बार तो हम सिर्फ चुपचाप बैठकर सारी जानकारी को प्रोसेस करते रहते थे. हनी ने इस दुनिया को बेहद करीब से देखा है. ये फिल्म उनके लिए बहुत पर्सनल है. वो बेहद संवेदनशील और ईमानदार फिल्ममेकर हैं. उनके लिए जरूरी था कि हर किरदार बिल्कुल रियल लगे, बनावटी नहीं. इसलिए हम बार-बार सीन पढ़ते थे. समुद्र इस कहानी का नैरेटर है, इसलिए दर्शक पूरी फिल्म उसकी नजर से देखते हैं. उस टोन को सही पकड़ना सबसे महत्वपूर्ण था.'

फिल्म के सबसे यादगार सीन के बारे में पूछे जाने पर अर्जुन ने कहा, 'मैं ज्यादा बताकर स्पॉयलर नहीं देना चाहता, लेकिन जसवंत सिंह के रोल में दिलजीत का एक सपने में आने वाला सीन, हार्ट-ब्रेकिंग है.' ऑलमोस्ट 4 साल तक अटकी सतलुज को जी5 फिर से वापस लाने की कोशिशें कर रहा है. आशा है कि शायद फिर कभी सतलुज जनता के सामने पहुंचेगी और लोगों को अर्जुन का दमदार काम देखने को मिलेगा.

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