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Exclusive: हॉरर शो का सेट, बच्चे की हुई मौत-दिखे सांप, आशा नेगी बोलीं- घर जाकर पढ़ी हनुमान चालीसा

वेब सीरीज 'अली बाबा और 40 भूत' में आशा नेगी और रमनदीप यादव ने दमदार काम किया है. आशा ने बताया कि शूटिंग के दौरान कई बार उन्होंने सुपरनैचुरल एनर्जी महसूस हुई. रमनदीप ने किन्नू के रोल को एंजॉय किया.

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आशा-रमनदीप को लगा भूतों से डर (Photo: Instagram @_ramandeep_yadav/ashanegi)
आशा-रमनदीप को लगा भूतों से डर (Photo: Instagram @_ramandeep_yadav/ashanegi)

हॉरर कॉमेडी के फैन हैं तो एक नई वेब सीरीज की इन दिनों काफी चर्चा है. जियो हॉटस्टार पर टीवी की फेवरेट बहू आशा नेगी की ब्रैंड न्यू सीरीज आई है. नाम है 'अली बाबा और 40 भूत'. ये कहानी एक बेटी की है, जो अपने लापता पिता की खोज में निकली है. लेकिन उसका सामना 40 भूतों से होता है. डर, रोमांच, थ्रिल की अनोखी कहानियों पर बेस्ड सीरीज में विशाल वशिष्ठ और रमनदीप यादव भी अहम रोल में हैं. आशा नेगी ने अलीशा (अली), विशाल ने बाबा और रमनदीप ने किन्नू का रोल प्ले किया है. 

आज तक डॉट इन को दिए इंटरव्यू में आशा और रमनदीप ने इस शो और रोल को लेकर बात की. उन्होंने सेट पर बने उस खौफ को भी बयां किया, जिसका एहसास उन्हें शूटिंग के दौरान हुआ था.

हॉरर कॉमेडी में काम करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा?
रमनदीप ने कहा कि शो में मेरा फन पार्ट है, लेकिन शुरू में ही ऐसा लगता है. बाद में कैरेक्टर का सुर बदलता है. मेरा रोल शो में अपनी दोस्ती के लिए काफी कुछ करता है. कोई भी आदमी जितना मर्जी फनी हो, लेकिन सिचुएशन आने पर उसे सीरियस होना पड़ता है. उस हिसाब से मेरा रोल भी रिएक्ट कर रहा है. ये शो करके मजा आया. 

संस्कारी बहू से हॉरर कॉमेडी में शिफ्ट होना कितना चैलेंजिंग रहा?
आशा कहती हैं- टीवी के बाद मैंने कई शोज किए जिन्होंने मेरी टीवी की संस्कारी इमेज को तोड़ने की कोशिश की थी. मैंने कई ग्रे शेड रोल भी किए. ऐसे काफी सारे किरदार मैंने किए हैं. लेकिन 'अली बाबा और 40 भूत' मेरे लिए अलग था. मुझे ये रोल कर मजे आए. हालांकि रमनदीप और विशाल वशिष्ठ ने अपने रोल में खूब मजे किए. मैं ये सब नहीं कर पा रही थी क्योंकि मैं अपने पापा को ढूंढ़ने में बिजी थी. 

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क्या कभी ऐसी कोई सुपरनैचुरल एनर्जी को रियल लाइफ में फील किया है?
आशा नेगी ने बताया कि उन्होंने शूटिंग के दौरान 2-3 बार ऐसा फील किया था. उनके मुताबिक, एक स्टोरी है जिसमें बच्चे मर रहे हैं या कोई बच्चों को मार रहा है. हम एक हॉस्पिटल में शूट कर रहे थे. वहीं पास में किसी के चिल्लाने की आवाज आती है. कोई रिलेटिव चिल्ला रहे थे स्टाफ पर. क्योंकि डिलीवरी के दौरान एक बच्चे की डेथ हो गई थी. उसके बाद निगेटिव माहौल हो गया था. फिर हमने फील किया कि हमारी शो की स्टोरी भी ऐसी ही है. ये हमारे साथ दूसरी या तीसरी बार हुआ था.

इससे पहले शूटिंग के दौरान हमें 1-2 बार सांप दिखे थे. हम जिस स्टोरी को शूट कर रहे थे, उससे जुड़ी कोई ना कोई चीज हो रही थी. उस रात मैंने शूट खत्म किया फिर घर जाकर सॉल्ट बाथ लिया.तब हनुमान चालीसा पढ़ी. ऐसा कुछ भूत की वजह से नहीं किया था. शांति और पॉजिटिविटी के लिए मैंने चालीसा पढ़ी थी. निगेटिव एनर्जी को पॉजिटिव में बदलने के लिए किया.

असल जिंदगी में 40 भूत मिल जाएं तो क्या करेंगे? 
आशा ने हंसते हुए कहा- 1 भी आ गया तो बैंड बज जाएगी. अगर आप उनके बारे में सोचेगे या उन्हें याद करोगे तो कोई तो एनर्जी आ ही जाएगी.

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रमनदीप बोले- मैं तो बेहोश हो जाऊंगा. हम उन्हें इतनी जोर से याद कर रहे हैं. अगर उन्होंने हल्के से भी याद किया तो वो आ जाएंगे.

इन दिनों हनुमान अंश का बोलबाला है. आपने ये फिल्म देखी? कभी कैंची धाम गई हैं?
आशा ने हनुमान अंश की तारीफ की. उन्होंने कहा- मैंने ये फिल्म देखी है. मैं खुद को हनुमान की फैन बोलती हूं. मैं उन्हें बहुत मानती हूं. मैं 2 साल पहले नीम करोली बाबा गई थी. मुझे वहां बहुत शांति मिली थी. वो काफी पीसफुल जगह है. मैं वहां से तृप्त होकर आई थी. ऐसे में मुझे हनुमान अंश देखनी ही थी. मैंने कई लोगों से सुना और बुक्स में उनके बारे में पढ़ा है. उनकी कहानियां सुनी हैं. वो फिल्म जिस भावना से बनी है वो वर्क कर गया है. इससे पहले बाबाजी पर किसी और ने भी फिल्म बनाने की कोशिश की थी. लेकिन वो बात नहीं बनी. इस फिल्म की नीयत साफ थी तभी ये मूवी इतनी सक्सेसफुल हुई है. जो नीम करोली बाबा को मानते हैं उनके लिए ये फिल्म देखना ट्रीट है. मैंने अकेले ये फिल्म देखने गई थी. मैं देखते हुए रो रही थी. मूवी के गाने भी बहुत अच्छे हैं.

टीवी पर लौटने का कोई प्लान है या हमेशा के लिए तौबा कर दी है?
आशा ने कहा- ऐसा नहीं है कि मैंने टीवी छोड़ दिया है. अगर कोई अच्छा कैरेक्टर मिलेगा या फिर कोई ऐसा शो होगा जो 3-4 महीने में खत्म हो जाएगा, तो जरूर करूंगी. ओटीटी में इसलिए मजा आ रहा है क्योंकि ये 2-3 महीने में खत्म हो जाता है. आप एक किरदार करते हो, वो ख्त्म होने के बाद आप कुछ नया करना चाहते हो. बतौर एक्टर अलग-अलग कैरेक्टर करने को मिलते हैं.

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रियलिटी शोज की बाढ़ आ गई है. अब माइंड और स्ट्रैटिजी बेस्ड शो आ रहे हैं. आपको फैंस इस फॉर्मेट में देख पाएंगे?
आशा बोलीं- अभी किसी रियलिटी शो को करने के मूड में नहीं हूं. हाल ही में किसी एक शो का ऑफर भी आया था. जिन शोज में 24 घंटे कैमरे लगे होते हैं मुझे उनसे दिक्कत है. वो शोज नहीं करना चाहूंगी. बाकी बाद में कभी लगेगा करने का, तो देखेंगे.

रोहित रॉय ने टीवी इंडस्ट्री को डस्टबिन बताया है. क्या ये टर्म टीवी इंडस्ट्री को डीग्रेड नहीं करता?
आशा ने कहा कि मुझे नहीं पता इस स्टेटमेंट के पीछे उनका इंटेंशन क्या था. वो अच्छे इंसान हैं. उनके स्टेटमेंट पर नहीं बोलूंगी. लेकिन हमारी टीवी इंडस्ट्री के टैलेंटेड एक्टर्स आज क्या क्या कमाल कर रहे हैं. तो कचरा तो नहीं है टीवी. मुझे लगता है टीवी को टीवी कहकर बदनाम मत करो. मैं तो टीवी से ही फेमस हुई हूं. 

'राख' के बाद लाइफ कितनी बदली है? 
रमनदीप ने बताया कि उन्हें अब लोग जानने लगे हैं. इंडस्ट्री के लोग उन्हें काम ऑफर कर रहे हैं. वो कहते हैं- राख करने के बाद मैंने ये शो किया है. ये रोल राख के रज्जो से बिल्कुल अलग है. वो डार्क जोन था. ये फन जोन में है. इसका अपना ग्राफ है. जिन्होंने मुझे राख में देखा है. उन्होंने वो वैरिएशन देखने को मिलेगा. बतौर एक्टर मैं भी अलग-अलग रोल प्ले करना चाहता हूं. बहुत लकी होते हैं जिन्हें ऐसे मौके मिलते हैं. आप अलग रोल के लिए वेट करते हो. मुझे खुशी है मेकर्स मुझ पर यकीन कर पा रहे हैं.

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रज्जो की इमेज में स्टोरियोटाइप होने का डर नहीं सताया?
मैं स्टीरियोटाइप ना हूं इसलिए 'अली बाबा और 40 भूत' शो मैंने किया है. मैं बताना चाहता हूं कि अपने क्राफ्ट पर काम करके यहां तक आया हूं. मैं भी वैरिएशन दे सकता हूं. हमें किरदार को प्ले करके दिखाना पड़ेगा. बस मौके की देर होती है. अभी मौका मिला है तो मैंने करके दिखाया है. जितनी शिद्दत से राख का रज्जो बना, उतनी ही मेहनत मैंने किन्नू बनने के लिए की है.

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