नाना पाटेकर मराठी थिएटर और सिनेमा का एक बहुत बड़ा नाम रहे. उन्होंने नटसम्राट जैसी यादगार मराठी फिल्म और परफॉरमेंस दी. लेकिन इसके साथ-साथ नाना ने हिंदी सिनेमा में भी बड़े और अहम प्रोजेक्ट्स में काम किया. जब उनका निधन हुआ, तो पूरा देश शोक में डूब गया था.
नाना पाटेकर का जाना मराठी और हिंदी सिनेमा, दोनों के लिए एक बड़े धक्के के समान था. मगर उनके अंतिम संस्कार में बॉलीवुड से चुनिंदा, तो मराठी सिनेमा के कई लोग मौजूद रहे. इस बात से मराठी डायरेक्टर प्रवीण तारडे को काफी निराशा महसूस हुई. एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने नाना के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए.
नाना के अंतिम संस्कार में क्यों नहीं पहुंचा बॉलीवुड?
प्रवीण तारडे ने कहा- नाना पाटेकर को मानने वाले और खुद को उनका दोस्त बताने वाले लोगों को उनके अंतिम संस्कार में जरूर पहुंचना चाहिए था. बॉलीवुड के लोग नाना के अंतिम संस्कार में नहीं आए, इससे नाना की महानता कम नहीं होती. बॉलीवुड नाना से बड़ा नहीं है. नाना बहुत बड़े इंसान थे. नाना सिर्फ एक एक्टर नहीं थे, बल्कि किसानों से उनका बहुत गहरा रिश्ता था. उनके अंतिम संस्कार में हजारों किसान पहुंचे थे. ये दिखाता है कि आम लोगों के बीच नाना की कितनी इज्जत थी.
डायरेक्टर ने आगे कहा कि अंतिम यात्रा में हजारों किसान शामिल हुए थे. प्रवीण के मुताबिक, ये वो लोग थे जिनके कपड़ों और शरीर से मिट्टी और पसीने की खुशबू आ रही थी. उन्होंने कहा कि ये किसान बॉलीवुड में परफ्यूम लगाकर घूमने वाले लोगों से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. प्रवीण ने नाना पाटेकर की किसान वाली पहचान पर भी बात की.
उन्होंने कहा- मेरी नजर में धुले से आए एक किसान की पहचान बॉलीवुड के हीरोज से कहीं बड़ी है. नाना ने कब कहा था कि वो बॉलीवुड से हैं? वो हमेशा कहते थे कि मैं किसान हूं. अगर आप पूछेंगे कि मुझे शिकायत है या नहीं, तो हां, है. बॉलीवुड के लोगों को अंतिम संस्कार में आना चाहिए था. कम से कम वो लोग तो जरूर आते, जिन्हें नाना अपना दोस्त कहते थे.
बॉलीवुड से नाराज डायरेक्टर
प्रवीण तारडे ने अंत में बताया कि जैकी श्रॉफ और सुरेश वाडकर जैसे कुछ लोग अंतिम संस्कार में पहुंचे थे. उन्होंने बॉलीवुड के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुंबई में किसी छोटे कलाकार की मौत होती है, तो कई लोग सफेद कपड़े पहनकर पहुंच जाते हैं. लेकिन जब नाना पाटेकर की बारी आई, तो ऐसा देखने को नहीं मिला. हालांकि, उन्होंने कहा कि किसानों की मौजूदगी ही काफी थी. उनके मुताबिक, नाना के लिए किसान हमेशा सबसे खास रहे और उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में किसानों का पहुंचना उनकी असली विरासत को दिखाता है.
नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर की सुबह हार्ट अटैक से हुआ था. वो अपने गोवा स्थित घर में थे, जहां वो बेहोशी की हालत में मिले. बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, और इसी दौरान उनकी मृत्यु हो गई. उनका अंतिम संस्कार पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर किया गया.