संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत पर स्वरा भास्कर के दिए बयान ने हलचल मचा दी थी. उन्होंने रानी पद्मावती और उनके साथ 800 महिलाओं के जौहर करने को बदसलूकी से जोड़ा और कहा कि वो वजाइना जैसा ही फील कर रही थीं. ये विवाद थमा नहीं है, अब कवि कुमार विश्वास ने स्वरा को उनका नाम लिए बिना राजस्थान के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाते हुए 'जाहिल और जमूरा' कह दिया है.
कुमार विश्वास ने साफ शब्दों में कहा कि किसी फिल्म, कहानी या कुछ घंटों के कंटेंट से राजस्थान के इतिहास की कुर्बानियों और गौरव को मिटाया नहीं जा सकता. उन्होंने लोगों से अपील की कि दूसरों पर नाराज होने से ज्यादा जरूरी है कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को सही इतिहास बताया जाए.
‘रक्त से लिखी हुई कुर्बानी...’
राजस्थान के इतिहास और वहां की वीरता का जिक्र करते हुए कुमार विश्वास ने कहा- दोहराता हूं रक्त से लिखी हुई कुर्बानी, जिसके कारण मिट्टी भी चंदन है राजस्थान की. उन्होंने आगे कहा- किसी के दो घंटे की फिल्म बना देने से, किसी के कुछ कहानी लिख देने से, किसी के कुछ अंश कर देने से, जो राजस्थान का और राजस्थानियों का गौरवशाली इतिहास है, उसकी एक कण भी प्रभावित नहीं हो सकती. बशर्ते हम सही इतिहास लोगों को बताते रहें.
कुमार विश्वास का इशारा साफ तौर पर इतिहास को लेकर चल रही बहस और फिल्मों में ऐतिहासिक घटनाओं की प्रस्तुति की तरफ था. उन्होंने कहा कि अगर समाज अपनी अगली पीढ़ी को इतिहास के प्रसंग नहीं बताएगा, तो बाद में दूसरों की कही बातों पर नाराज होने का कोई फायदा नहीं होगा.
‘19वीं मंजिल पर बैठकर देश के इतिहास की व्याख्या...’
उन्होंने लोगों से कहा कि ऐसे लोगों पर ध्यान देने के बजाय अपनी आने वाली पीढ़ियों को इतिहास समझाना ज्यादा जरूरी है. कुमार विश्वास ने आगे कहा- अगर आप ही अपनी पीढ़ियों को ये प्रसंग नहीं सुनाएंगे, अगर इस इतिहास को आप आगे की पीढ़ियों तक नहीं पहुंचाएंगे तो ये जो जमूरे हैं, जाहिल हैं, जिन्होंने कुछ पढ़ा नहीं है, जाना नहीं है, मिट्टी से प्रेम नहीं किया है, 19वीं माले पर बैठकर जो इस देश के इतिहास और संस्कृति की व्याख्या करते हैं. बंबई बैठकर या कहीं भी बैठकर, आप फिर इनसे नाराज होंगे. इसलिए ज्यादा जरूरी है कि इनकी ओर ध्यान देने की बजाए आप अपनी पीढ़ी को ये इतिहास सिखाएं.
अपने परिवार को लेकर इतिहास दिखाते हैं कुमार विश्वास
कुमार विश्वास ने इस दौरान अपनी निजी जिंदगी का उदाहरण भी दिया. उन्होंने बताया कि वह खुद अपने परिवार को ऐतिहासिक जगहों पर लेकर जाते हैं और बच्चों को वहां का इतिहास समझाते हैं. उन्होंने कहा- मैं खुद अपने परिवार को हल्दी घाटी, वृंदावन जैसी सब जगहों पर लेकर जाता हूं. उन्हें इतिहास बताता हूं. कहां किसकी स्वतंत्रता हुई थी.
महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी के इतिहास का जिक्र करते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि अगर किसी को अपनी निजता और सम्मान की लड़ाई को समझना है तो उसे कुंभलगढ़ के उस छोटे से कक्ष में जाना चाहिए, जहां महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था.
उन्होंने कहा- उस दौर में युद्ध सिर्फ ये नहीं था कि एक महाराणा को आजाद कराना हो, युद्ध निजता और स्वाभिमान का था. हम किसी और के स्वाभिमान को चुनौती नहीं देते. हम तो मेहमाननवाजी करते हैं.
‘बैंकॉक-हांगकांग नहीं, राजस्थान घूमने जाइए’
कुमार विश्वास ने लोगों से राजस्थान के ऐतिहासिक स्थलों को देखने की अपील भी की. उन्होंने कहा- बैंकॉक, हांगकांग, लास वेगस मत जाइए, राजस्थान घूमने जाइए, एक-एक तीर्थ को प्रणाम करिए. इतना ही नहीं, उन्होंने अंडमान जाने और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े इतिहास को करीब से देखने की भी बात कही.उन्होंने कहा- अंडमान जाइए, वो पिस्तौल देखिए जो चंद्रशेखर आजाद ने हिंदुस्तान में इस्तेमाल की.
आखिर में कुमार विश्वास ने फिर वही बात दोहराई कि इतिहास को लेकर सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस या किसी फिल्म पर गुस्सा करने से ज्यादा जरूरी है कि आने वाली पीढ़ी को अपना इतिहास बताया जाए. उनका संदेश था- अपनी पीढ़ी को सही इतिहास सिखाएं.