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धुरंधर ने बदली 'Washma Butt' कैफे की पहचान! 50 रुपये देकर 'हमजा-आलम' बन रहे लोग

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ में नजर आया लद्दाख का एक कैफे अब टूरिस्ट स्पॉट बन गया है. लोग यहां फिल्म वाला सीन रीक्रिएट करने, फोटो खिंचवाने और रील बनाने पहुंच रहे हैं.

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धुरंधर कैफे बना वॉशमा बट कैफे (Photo: ITGD)
धुरंधर कैफे बना वॉशमा बट कैफे (Photo: ITGD)

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ सिर्फ सिनेमाघरों में हिट नहीं हुई, फिल्म ने लद्दाख के एक छोटे से कैफे की किस्मत भी पलट दी. फिल्म में जो जगह पाकिस्तान के लियारी की एक चाय की दुकान नजर आई थी, आज वही जगह लेह में पर्यटकों के लिए किसी फिल्मी डेस्टिनेशन से कम नहीं है.

फिल्म में इसे ‘Washma Butt’ नाम दिया गया था, जहां रणवीर सिंह के किरदार हमजा और गौरव गेरा के किरदार आलम की चाय पर बैठकर कई यादगार बातचीत होती है. असल में यह जगह पहले SH Khan Restaurant के नाम से जानी जाती थी. लेकिन ‘धुरंधर’ की रिलीज के बाद इसकी पहचान ही बदल गई. अब लोग इसे प्यार से ‘Dhurandhar Cafe’ भी कहने लगे हैं.

फिल्म आई और कैफे बन गया टूरिस्ट स्पॉट

लेह मार्केट के मॉल रोड के बीचों-बीच मौजूद यह कैफे अब ‘धुरंधर’ के फैंस के लिए खास अड्डा बन चुका है. फिल्म देखने के बाद लद्दाख पहुंचने वाले कई लोग इस जगह को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर रहे हैं.

कैफे के मालिक सोहेल अली के मुताबिक, फिल्म रिलीज होने के बाद यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे हैं. उन्होंने बताया कि शूटिंग के समय भी लोगों में जबरदस्त उत्सुकता थी. उस वक्त स्थानीय लोग बाहर खड़े होकर रणवीर सिंह और गौरव गेरा को शूट करते देखने की कोशिश करते थे. लेकिन अब नजारा उलट चुका है.

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जो जगह कभी सिर्फ एक लोकल कैफे थी, वहां अब देशभर से लोग सिर्फ ‘धुरंधर वाला फील’ लेने पहुंच रहे हैं.

नाम नहीं बदला, ‘Washma Butt’ ही रहने दिया

फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद मेकर्स अपनी राह चले गए, लेकिन कैफे के मालिक ने फिल्म की याद को वहीं रोक दिया. सोहेल अली ने बताया कि उन्होंने कैफे का नाम वापस पुराने अंदाज में करने के बजाय ‘Washma Butt’ वाली पहचान बरकरार रखने का फैसला किया. साथ ही ‘धुरंधर कैफे’ नाम भी इतना चल पड़ा कि अब पर्यटकों के बीच यही इसकी नई पहचान बन गया है.

फिल्म के एक छोटे से सेट ने इस कैफे को ऐसी पहचान दी, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.

अंदर जाते ही लगेगा, ‘धुरंधर’ के सेट पर आ गए!

कैफे के अंदर कदम रखते ही फिल्म देखने वालों को जगह जानी-पहचानी लगने लगती है. कैफे की हरी दीवारें अब भी बरकरार हैं. इसके अलावा मालिक ने फिल्म से जुड़े कई पोस्टर और तस्वीरें भी लगाई हैं. सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है एक बड़ी सी म्यूरल पेंटिंग, जिसमें रणवीर सिंह और गौरव गेरा के किरदार आमने-सामने बैठकर चाय पर बातचीत करते नजर आते हैं.

लकड़ी की साधारण टेबल-कुर्सियां हैं. कोई फैंसी रेस्टोरेंट वाला तामझाम नहीं. चाय और खाना भी स्टील के गिलास और प्लेट में परोसा जाता है. कोशिश यही है कि जगह जितनी असली और देसी दिखे, ‘धुरंधर’ वाला एहसास उतना ही तगड़ा रहे.

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मेन्यू में भी ‘धुरंधर’ का तड़का

कैफे ने सिर्फ सजावट ही नहीं बदली, बल्कि मेन्यू में भी फिल्म का रंग चढ़ा दिया है. यहां अलग-अलग तरह की चाय मिलती है और इनमें एक खास नाम है ‘धुरंधर चाय’. इसके अलावा नमकीन चाय, कश्मीरी कहवा, लेमन जिंजर टी और सामान्य चाय-कॉफी के विकल्प भी हैं. नाश्ते में पराठे, ऑमलेट, मैगी और रेमन नूडल्स जैसे ऑप्शन हैं. लंच में वेज थाली, चिकन थाली, राजमा-चावल और दूसरे वेज-नॉनवेज आइटम मिलते हैं. हालांकि असली आकर्षण खाना नहीं, फिल्म वाला एक्सपीरियंस बन चुका है. चाय पीना जरूरी नहीं, सिर्फ फोटो खिंचवाकर भी निकल सकते हैं.

अब इस कैफे की सबसे मजेदार बात सुनिए.

अगर आप सिर्फ ‘धुरंधर’ वाला फोटोशूट करने पहुंचे हैं और खाने-पीने का मूड नहीं है, तब भी आपका काम हो जाएगा. आप कैफे में जाएं, फिल्म वाले स्पॉट पर बैठें, फोटो क्लिक करें और कुछ ही मिनट में निकल जाएं. इसके लिए 50 रुपये का चार्ज लिया जाता है.

रणवीर और गौरव जैसा लुक भी बना सकते हैं. फिल्म का अनुभव और मजेदार बनाने के लिए कैफे में रणवीर सिंह और गौरव गेरा के किरदारों से प्रेरित कॉस्ट्यूम और विग भी रखे गए हैं. मतलब कुर्सी पर बैठिए, कॉस्ट्यूम पहनिए, विग लगाइए और कैमरा निकाल लीजिए. कुछ ही मिनट में आपका अपना ‘हमजा-आलम’ वाला सीन तैयार. यही वजह है कि खासकर युवाओं के बीच यह जगह तेजी से पॉपुलर हुई है.

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‘हम यहां खाने नहीं, रील बनाने आए हैं!’

कैफे में पहुंचे लोगों की बातें सुनें तो इसकी नई लोकप्रियता का राज और साफ हो जाता है. दिल्ली से आई एक डॉक्टर ने बताया कि उन्हें ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह काफी पसंद आए और वह उसी जगह अपनी तस्वीर खिंचवाना चाहती थीं, जिसे उन्होंने फिल्म में देखा था. बेंगलुरु से पहुंचे एक इंजीनियर ने इसे युवाओं के बीच एक आइकॉनिक जगह बताया.

मुंबई के एक डिजिटल मार्केटर ने तो यहां बैठकर कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वह लियारी में बैठे हों. उनका कहना था कि फिल्म में दिखाए गए इलाके और यहां के माहौल में उन्हें समानता महसूस हुई और उसी जगह बैठना रोमांचक लगा, जहां हमजा और आलम बैठे थे. वहीं गोरखपुर से आए एक बिजनेसमैन ने तो पूरी कहानी एक लाइन में समेट दी.

उनके मुताबिक खाना और चाय भले औसत हो, लेकिन असली मकसद खाना नहीं है-‘हम यहां रील के लिए आए हैं.'

लद्दाख में एक और ‘धुरंधर’ लोकेशन भी हुई हिट

वैसे ‘धुरंधर’ का असर सिर्फ इस कैफे तक सीमित नहीं है. फिल्म के गाने ‘गहरा हुआ' में नजर आया लद्दाख का संगम पॉइंट भी फिल्म के बाद फैंस के बीच खासा लोकप्रिय हुआ है. इंडस और जांस्कर नदियों के संगम वाले इस खूबसूरत लोकेशन पर कपल्स फिल्म के सीन को रीक्रिएट करते नजर आ रहे हैं. लेकिन Washma Butt Cafe की कहानी कुछ ज्यादा दिलचस्प है.

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एक ऐसी जगह जो फिल्म के लिए बस एक लोकेशन थी, फिल्म रिलीज होते ही लोगों के लिए खुद एक डेस्टिनेशन बन गई.

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