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पॉलिटिक्स का डोज नहीं, इस बार अब जनता की कहानी ला रहीं कंगना, क्या होगा 'भारत भाग्य विधाता' का फैसला?

बॉलीवुड क्वीन से देश की संसद तक का सफर तय करने वालीं कंगना रनौत एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपनी एक्टिंग की धार दिखाने के लिए तैयार हैं. थलाइवी, तेजस और हालिया रिलीज इमरजेंसी जैसी कंगना की फिल्में फ्लॉप साबित हुई थीं. लेकिन उनकी नई फिल्म इनसे काफी अलग लग रही है, जिससे कामयाबी का चांस बढ़ता दिख रहा है.

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कंगना का कमबैक करवाएगी 'भारत भाग्य विधाता'? (Photo: ITGD)
कंगना का कमबैक करवाएगी 'भारत भाग्य विधाता'? (Photo: ITGD)

सिनेमा के बड़े पर्दे से लेकर राजनीति के सबसे बड़े मंच देश की संसद तक पहुंच चुकीं कंगना रनौत का सफर बेहद शानदार रहा है. लेकिन उनके इस सफर में थोड़ा नुकसान उन फैंस का हुआ है, जो हमेशा से उनकी दमदार एक्टिंग के मुरीद रहे हैं. मगर अब कंगना अपनी नई फिल्म भारत भाग्य विधाता से फिर से अपनी एक्टिंग का वही पुराना जलवा दिखाने के लिए तैयार नजर आ रही हैं. भारत भाग्य विधाता की कहानी और कंगना का किरदार, एक लंबे समय बाद उनके अभिनय के फैंस के लिए एक बेहतरीन मौका बन सकता है.

पॉलिटिकल होती कंगना और खोती फिल्मी चमक

'मणिकर्णिका' (2019) के वक्त से ही कंगना रनौत ऑफस्क्रीन अपनी पॉलिटिकल बयानबाजी को लेकर चर्चा में रहने लगी थीं. उनके कई बयानों पर बड़े-बड़े विवाद और बहसें छिड़ीं. धीरे-धीरे इस राजनीतिक झुकाव का असर उनकी फिल्मों की कहानियों पर भी दिखने लगा. हालांकि इस पॉलिटिक्स का निजी तौर पर कंगना को फायदा मिला और आज वह देश की सांसद हैं, लेकिन उनका ऑफस्क्रीन ज्यादा नजर आना उनके ऑनस्क्रीन स्टारडम के लिए नुकसानदेह साबित हुआ. नतीजतन, उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लगातार फेल होती गईं.

'मणिकर्णिका' के समय ही कंगना पर पॉलिटिकल रंग चढ़ना शुरू हुआ था, मगर उनकी दमदार एक्टिंग और हिस्टोरिकल ड्रामा ने उस वक्त फिल्म को डूबने से बचा लिया. इसके बाद तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की बायोपिक थलाइवी (2021) में कंगना का पॉलिटिकल किरदार जनता को बिल्कुल रास नहीं आया. भारी-भरकम बजट और पैन-इंडिया रिलीज होने के बावजूद थलाइवी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई.

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लॉकडाउन के बाद जब सिनेमाघरों में जनता लौटी, तो उन्हें तेजस (2023) में भी कंगना के किरदार में वही पॉलिटिकल एजेंडा नजर आया, जो उनकी ऑफस्क्रीन इमेज का हिस्सा बन चुका था. पिछले साल आई फिल्म इमरजेंसी में कंगना का किरदार तो दमदार था, मगर फिल्म की रग-रग में पॉलिटिक्स ही थी. इस फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेट और रिलीज को लेकर इतनी राजनीति हुई कि रिलीज होने तक दर्शकों का इंटरेस्ट ही खत्म हो चुका था. इमरजेंसी सिर्फ फ्लॉप नहीं, बल्कि एक बड़ी बॉक्स ऑफिस डिजास्टर साबित हुई.

कैसे अलग और खास है 'भारत भाग्य विधाता'?

कंगना रनौत की यह नई फिल्म 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बीच फंसी बहादुर नर्सों की रोंगटे खड़े कर देने वाली रियल कहानी पर बेस्ड है. हमले के दौरान आतंकवादी मुंबई के कामा हॉस्पिटल में भी घुस गए थे, जहां वहां की नर्सों ने अदम्य साहस दिखाते हुए लगभग 400 मरीजों की जान बचाई थी. इन्हीं में से एक रियल लाइफ हीरो नर्स अंजलि कुलथे भी थीं, जिन्होंने उस खौफनाक रात करीब 20 प्रेग्नेंट महिलाओं को सुरक्षित रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी. रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत भाग्य विधाता में कंगना का किरदार अंजलि से ही प्रेरित है.

फिल्म का ट्रेलर आउट हो चुका है और इसे दर्शकों से काफी पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहा है. कंगना का काम तो हमेशा की तरह लाजवाब है ही, लेकिन इस बार फिल्म की कहानी में लाउड पॉलिटिकल मैसेजिंग की जगह 'ह्यूमन इमोशन' को प्राथमिकता दी गई है. मुंबई हमले जैसी संवेदनशील कहानी में भारत-पाकिस्तान पर कई तीखे डायलॉग्स आराम से फिट किए जा सकते थे, मगर मेकर्स ने ऐसा न करके पूरी तरह से एक नर्स की जिंदगी और उसकी कर्तव्यनिष्ठा पर फोकस रखा है.

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भारत भाग्य विधाता के ट्रेलर में एक बेहद संजीदा डायलॉग है— 'हम लोग इंपोर्टेंट नहीं हैं, मगर हम जो करते हैं वो इंपोर्टेंट है.'

यह डायलॉग कहानी को किसी भी राजनीतिक नैरेटिव से अलग करके सीधे इंसान की बहादुरी और उसके जज्बे पर केंद्रित कर देता है. इसी प्योर इमोशन की वजह से जनता इस फिल्म से जुड़ाव महसूस कर रही है. कंगना रनौत के अभिनय की क्षमता पर कभी किसी को शक नहीं रहा है, और इस बार उन्हें एक बेहद सॉलिड और ईमानदार कहानी का साथ मिला है. अगर क्रिटिक्स के रिव्यू और पब्लिक का वर्ड ऑफ माउथ अच्छा रहा, तो 12 जून को थिएटर्स में रिलीज हो रही भारत भाग्य विधाता बॉक्स ऑफिस पर बड़ा उलटफेर कर सकती है. और यह कंगना का एक ग्रैंड कमबैक साबित होगा.

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