चीफ सब एडिटर सुबोध मिश्रा आजतक डिजिटल में फिल्मी मामलों के जानकार हैं. तारक मेहता हों या हंसल मेहता, पर्दे पर उतरने वाली तस्वीर की छोटी से छोटी डिटेल्स को देखने वाला चश्मा इनके पास है. फिल्मों-वेब सीरीज के रिव्यूज, कंटेंट के लेटेस्ट ट्रेंड पर व्यूज और बॉक्स ऑफिस की न्यूज आपके पास पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालते हैं. ओपिनियन हो या एनालिसिस, शब्द खर्चने में बिल्कुल संकोच नहीं करते. ये बायो शायद इनके खाते में दर्ज सबसे छोटा लेखन हो!
आजतक डिजिटल में सुबोध चार साल बिता चुके हैं. उससे पहले हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप के प्रोडक्ट देसीमार्टिनी में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर पद पर यही जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. उन चार सालों में लेखन के साथ वीडियो में भी खूब पाए जाते थे. इंटरनेट पर इनके फिल्म रिव्यूज के करीब 250 से ज्यादा वीडियो मिलते हैं. उससे पहले एक दशक से ज्यादा वक्त तक कभी एक इंस्टीट्यूट पर लोगों को अंग्रेजी बोलना सिखाते, तो कभी होटल के फ्रन्ट ऑफिस मैनेजर के रोल में पाए जाते थे. लेकिन ये सबकुछ करते हुए भी लिखाई से ऐसा प्रेम बना रहा कि कई जगह फ्रीलांस लिखना जारी रहा.
वर्क एक्सपीरियंस की तरह, सुबोध की पढ़ाई का एकेडमिक रिकॉर्ड भी काफी वैरायटी भरा रहा है. स्कूली शिक्षा विज्ञान में निपटाने के बाद, ग्रैजुएशन-पोस्ट ग्रैजुएशन में इंग्लिश लिटरेचर और हिंदी साहित्य का कॉम्बो बिठा चुके हैं. मूल रूप से गोरखपुर से आने वाले सुबोध पंजाब में जन्मे, हिमाचल-हरियाणा में पले और दिल्ली के एक राजस्थानी मोहल्ले में बड़े हुए हैं. नौकरी, शिक्षा और जीवन की ये विविधता इनकी पढ़ने की आदतों में भी पाई जाती है. शेक्सपियर से शरद जोशी तक, और रामचरितमानस से शरिया तक कुछ भी पढ़ डालते हैं. जीवन के रेडियो पर बजता ये विविध भारती सिनेमा के संसार को अलग-अलग लेंस से देखने में कितना काम आता है ये आप सुबोध के लेखन में देख सकते हैं.