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गुजरात का सेमीफाइनल... शहर-गांवों में किसकी सरकार, आज के नतीजे बता देंगे 2027 का मिजाज

गुजरात नगर निगम, नगर पालिका और जिला पंचायत सहित स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे मंगलवार को आएंगे. शहर से लेकर गांव और कस्बे तक हुए इस चुनाव को 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है, जिसके चलते बीजेपी से लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तक की साख दांव लगी हुई है.

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गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव में कौन मारेगा बाजी (Photo-ITG)
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव में कौन मारेगा बाजी (Photo-ITG)

गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव होने है, लेकिन लोगों की निगाहें सूबे में हुए स्थानीय (लोकल बॉडी) चुनाव के आज आने वाले नतीजे पर टिकी हैं. स्थानीय निकाय चुनाव को 2027 का सेमीफाइनल कहा जा रहा है. राज्य में 15 नगर निगमों के साथ कुल 393 स्थानीय निकायों के चुनाव हुए, शहरों और  गांव में जो सरकार बनाने में कामयाब रहेगा, उससे 2027 के सियासी मिजाज का भी पता चल सकेगा.

राज्य के 15 नगर निगमों, 84 नगर पालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तहसील पंचायत चुनाव हुए हैं. इस तरह कुल 393 स्थानीय निकायों की 10,005 सीटों में से 707 सीटों पर निर्विरोध चुने जाने के बाद मैदान में 9,297 सीटों के लिए 25,579 उम्मीदवार बचे हैं, जिनकी किस्मत का फैसला आज तय होगा?

गुजरात लोकल बॉडी चुनाव में बीजेपी से लेकर कांग्रेस और आदमी पार्टी की साख दांव पर लगी है. इसके साथ राज्य की राजनीति को प्रभावित करने चार बड़े शहरों पर सभी की नजरें टिकी हैं. अक्सर देखने देखा गया है कि जिस पार्टी की प्रदेश में सरकार रहती है, पंचायत और नगर निगम चुनाव में उसका बोलबाला रहता है. इसके बाद निकाय चुनाव को 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है? 

गुजरात लोकल बॉडी चुनाव का समीकरण
गुजरात की 15 नगर निगम क्षेत्रों में चुनाव हुए हैं, जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स सिटी अहमदाबाद, डायंड सिटी सूरत के साथ वडोदरा और राजकोट जैसे बड़े शहरों में चुनाव हुए हैं. इसके अलावा जामनगर, अमरेली, नवसारी, गांधीधाम, मोरबी, वापी, आणंद, नडियाड, मेहसाणा, पोरबंदर और सुरेंद्रनगर नगर निगम की सीटें है, जिसमें से 9 नगर निगम पहली बार मेयर चुने जाएंगे.
 
राज्य के 15 नगर निगम के अलावा 84 नगर पालिकाएं, 34 जिला पंचायतें और 260 तालुका पंचायतों के लिए नतीजे आएंगे. हालांकि, पहले ही राज्यभर में 707 सीटों पर निर्विरोध सदस्य चुने जा चुके हैं, जिसके चलते 9,297 सीटों के लिए नतीजे मंगलवार आएंगे. नगर पालिकाओं की 2,637 सीटों में से 365 सीटें बीजेपी ने निर्विरोध जीती हैं, 12 सीटें कांग्रेस ने और तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती हैं.

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15 नगर निगमों में 43 सीटें निर्विरोध घोषित की गई हैं, जबकि जिला पंचायतों में 37 और तालुका पंचायतों में 239 सीटें निर्विरोध रही हैं. इस कुल मिलाकर 707 निर्विरोध सीटों में से 692 सीटें बीजेपी उम्मीदवारों के खाते में गई हैं, जो एक रिकॉर्ड आंकड़ा है, हालांकि आम आदमी पार्टी को इस मोर्चे पर मायूसी हाथ लगी है. 

निकाय चुनाव में किसका क्या दांव पर है? 
गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों में सबसे ज्यादा साख बीजेपी की दांव पर लगी हुआ है. सत्तारूढ़ बीजेपी सबसे अधिक उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, शहरी और ग्रामीण निकायों में उसके कुल 9,296 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस के 8,443 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के 5,261 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. इसके अलावा 2,527 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में है. इस बार गुजरात में ओबीसी का कोटा 10 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया गया है. 

निकाय चुनाव में सत्ताधारी भाजपा, विपक्षी दल कांग्रेस और अपनी सियासी जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी (आप) के बीच कड़ा मुकाबला है. असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने भी कई सीटों पर ताल ठोंकी है. ऐसे में चुनावी नतीजों से यह साफ हो जाएगा कि क्या भाजपा 2021 की अपनी ऐतिहासिक जीत को दोहरा पाएगी या कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ग्रामीण और शहरी वोटरों में सेंध लगाने में कामयाब रहती हैं? 

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शहरी क्षेत्रों में करीब तीन दशक से काबिज बीजेपी ने एंटी इंकबेंसी को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर चेहरे बदले थे, चूंकि बीजेपी यह प्रयोग कई बार पहले भी कर चुकी है. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चेहरे बदलकर बीजेपी जोश नहीं बढ़ पाई. कम वोटिंग के पीछे यह बड़ा कारण माना जा रहा है.

दूसरी बड़ी वजह है कि जिनके टिकट कटे, उनमें ज्यादातर वोटरों को मोबलाइज करने के लिए नहीं निकले.पिछली बार लोकल बॉडी के चुनाव फरवरी में हुए थे, लेकिन इस बार चुनाव अप्रैल में हुए. ऐसे में वोटरों के नहीं निकलने की एक वजह तेज गर्मी भी रही है. 

लोकल बॉडी चुनाव 2027 का सेमीफाइनल
गुजरात के लोकल बॉडी चुनाव को 2027 का सेमीफाइल के तौर पर देखा जा रहा, क्योंकि इसके बाद सीधे विधानसभा चुनाव होने हैं. लोकल बॉडी चुनाव में गांव से लेकर शहर और कस्बे तक की सीटें शामिल है, जहां पर चुनाव हुए है. राजनीतिक दल नगर निगम औऱ पंचायत चुनाव के जरिए अपनी सियासी ताकत के आकलन करते हैं. ऐसे में नगर निगम के जरिए शहरों के सियासी मिजाज की थाह लेते हैं तो जिला पंचायत और नगर पालिका के जरिए भी विधानसभा चुनाव को समझने की कवायद करते हैं. 

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गुजरात के सभी बड़े शहरों में नगर निगम के चुनाव हुए हैं तो जिला और कस्बे की सीटें भी शामिल है. इस तरह से राज्य औसतन चार से पांच जिला पंचायत सदस्य सीटों को मिलाकर विधानसभा के एक क्षेत्र हो जाता है.जिला पंचायत के सदस्यों को मिलने वाले वोट के आधार बनाकर राजनीतिक दलों इस बात का यह एहसास होता है कि वो कितने पानी में है. इस आधार पर वोटों के समीकरण को दुरुस्ती करने की कवायद कर सकते हैं. 

राजनीतिक दल पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी हर जिले के नतीजों पर मंथन करती हैं, क्षेत्रवार, जातिवार नतीजों पर मंथन के आधार पर आगे की रणनीति बनाने का काम करती हैं. इस तरह नगर निगम और पंचायत चुनाव के आधार पर 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी जमीन नापना चाहती. पंचायत चुनाव को लेकर जिस तैयारी और जोरशोर के साथ राजनीतिक पार्टियां जुटी हैं, उससे साफ है कि 2026 में ही 2027 के सियासी मिजाज का समझ में आ जाएगा.

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