‘पंचायत आजतक पंजाब’ के सेशन ‘पंजाब में पढ़ाई, पंजाब में कमाई’ में पंजाब के युवाओं के रोजगार, शिक्षा, कृषि, उद्योग और विदेश पलायन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. इस सत्र में बीजेपी के राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी और राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू शामिल हुए. दोनों नेताओं ने पंजाब में रोजगार के अवसर बढ़ाने, उद्योग को मजबूत करने और युवाओं को बेहतर शिक्षा व कौशल देने की जरूरत पर अपनी बात रखी.
विक्रमजीत सिंह साहनी ने पंजाब के युवाओं के विदेश जाने के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले पंजाबी बेहतर अवसरों और अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए विदेश जाते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है. उनके मुताबिक आज कई युवा पंजाब में अवसर नहीं मिलने के कारण बाहर जाने का रास्ता चुन रहे हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब कभी प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में था, लेकिन अब युवाओं के सामने रोजगार के पर्याप्त विकल्प नहीं हैं. उन्होंने कृषि क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि खेती में भी आधुनिक अवसर पैदा करने की जरूरत है.
साहनी ने पंजाब में उद्योग और निवेश की कमी को भी युवाओं के पलायन की बड़ी वजह बताया. उन्होंने कहा कि अमृतसर की ऊनी उद्योग और जालंधर की खेल उद्योग जैसी कई पुरानी औद्योगिक गतिविधियां कमजोर हुई हैं और कुछ उद्योग दूसरे राज्यों में चले गए. उन्होंने कहा कि पंजाब में नए उद्योग और निवेश लाने के साथ मौजूदा उद्योगों को भी मजबूत करना होगा. उनके मुताबिक सिर्फ नई घोषणाएं करने के बजाय जमीन पर रोजगार के अवसर पैदा करना जरूरी है.
साहनी ने अप्रेंटिसशिप को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से अप्रेंटिसशिप के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन पंजाब में इस व्यवस्था को पर्याप्त रूप से बढ़ाने की जरूरत है. उनके मुताबिक युवाओं को पढ़ाई के बाद व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना जरूरी है.
सतनाम सिंह संधू ने कहा- पंजाब में शिक्षा की क्षमता मजबूत
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था पर कहा कि राज्य के पास उच्च शिक्षा का मजबूत आधार है. उन्होंने कहा कि पंजाब में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा संस्थान हैं. संधू के मुताबिक पंजाब में करीब 40 विश्वविद्यालय और बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा संस्थान हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा के संस्थान मौजूद हैं और पंजाब की शिक्षा क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है.
उन्होंने दावा किया कि पंजाब में विदेशों से भी विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते हैं. उनके मुताबिक पंजाब की शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यहां का माहौल, संस्कृति और अन्य सुविधाएं इसे विद्यार्थियों के लिए आकर्षक बनाती हैं.
'पंजाबी हमेशा से बाहर जाते रहे हैं, लेकिन वजह बदल गई है'
सतनाम सिंह संधू ने कहा कि पंजाबियों का विदेश जाना कोई नई बात नहीं है. प्रवास पंजाबियों की आकांक्षाओं का हिस्सा रहा है. हालांकि उन्होंने कहा कि विदेश जाना केवल मजबूरी या निराशा की वजह से नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पहले पंजाबी बेहतर अवसर और अपनी महत्वाकांक्षाएं पूरी करने के लिए विदेश जाते थे. लेकिन अब कई परिवार इस चिंता में भी बच्चों को विदेश भेज रहे हैं कि वे पंजाब में नशे या अपराध की चपेट में न आ जाएं.
संधू ने कहा कि पंजाब के युवाओं को अपने राज्य में ही बेहतर अवसर मिलने चाहिए. इसके लिए शिक्षा के साथ रोजगार और कौशल विकास पर भी जोर देना होगा.
यह भी पढ़ें: ‘कछुआ-चूहे जैसी शिरोमणि अकाली-BJP की दोस्ती’, पंचायत आजतक में बोले भगवंत मान