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सरकार को घेरने निकले थे खुद ही टकरा गए कांग्रेस प्रत्याशी, उत्तराखंड न्याय यात्रा में हाई वोल्टेज ड्रामा

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच कांग्रेस की न्याय यात्रा में टिकट की दावेदारी और गुटबाजी ने सियासी माहौल गरमा दिया है. सहसपुर में यात्रा शुरू होने से पहले ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों के बीच नारेबाजी और शक्ति प्रदर्शन हुआ.

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उत्तराखंड में कांग्रेस न्याय यात्रा निकाल रही है
उत्तराखंड में कांग्रेस न्याय यात्रा निकाल रही है

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी पारा चढ़ने लगा है. कांग्रेस ने प्रदेशभर में उत्तराखंड न्याय यात्रा के जरिए धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, लेकिन सहसपुर में न्याय यात्रा शुरू होने से पहले ही कांग्रेस के भीतर टिकट की जंग, गुटबाजी और शक्ति प्रदर्शन का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पार्टी की अंदरूनी खींचतान को सरेआम ला दिया है ऐसे में एक बार फिर कांग्रेस के चुनावी समीकरण बिगड़ने की अटकलें भी शुरू हो गई है. 

दरअसल सहसपुर में कांग्रेस की उत्तराखंड न्याय यात्रा में पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और सहसपुर विधानसभा से दावेदारी कर रहे आर्येद्र शर्मा समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे. यात्रा शुरू होने से पहले ही सियासी माहौल उस वक्त गरमा गया, जब हरक सिंह रावत के पहुंचते ही आर्येंद्र शर्मा के समर्थकों ने अपने नेता के पक्ष में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी. एक तरफ आर्येंद्र शर्मा के समर्थक अपनी ताकत दिखाने में जुटे थे, तो दूसरी तरफ सहसपुर सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हरक सिंह रावत की मौजूदगी ने सियासी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया. 

देखते ही देखते नारेबाजी के बीच दोनों खेमों की ताकत दिखाने की होड़ शुरू हो गई. चुनावी टिकट की दावेदारी के बीच कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी खुलकर दिखाई देने लगी. हालात को संभालने के लिए वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा. उनके समझाने के बाद दोनों खेमों के समर्थक शांत हुए. इसके बाद हरक सिंह रावत ने मंच से सरकार पर हल्ला बोला, इस दौरान वोट चोरी से लेकर अंकिता भंडारी केस तक कई मुद्दे उठे, लेकिन सियासी घटनाक्रम यहीं नहीं थमा.

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मंच पर हुई खेमेबाजी से गुस्साए हरक सिंह रावत ने हरिद्वार दौरे का हवाला देते हुए यात्रा आगे बढ़ने से पहले ही कार्यक्रम से विदाई ले ली. इसके बाद प्रीतम सिंह की अगुवाई में आर्येंद्र शर्मा और उनके समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए न्याय यात्रा को आगे बढ़ाया. यानी जिस यात्रा के जरिए कांग्रेस को सरकार के खिलाफ एकजुटता का संदेश देना था, उसी यात्रा के आगाज में सहसपुर की सियासत में टिकट की दावेदारी और खेमेबाजी के सवाल चर्चा में आ गए.

उधर, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने कहा कि यह यात्रा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ निकाली जा रही है. कांग्रेस अंकिता भंडारी हत्याकांड समेत जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर सरकार को घेरती रहेगी. जबकि हरक सिंह रावत ने पछवादून में अफसरशाही पर तीखा हमला किया हरक सिंह रावत ने सरकार के साथ साथ शासन-प्रशासन को भी निशाने पर लिया. उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड और महिला अपराध के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरते हुए पत्रकारों पर कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए. उनका आरोप था कि जो पत्रकार अपराध का खुलासा करते हुए खबर प्रकाशित करते हैं, उन्हें अगले ही दिन जेल भेज दिया जाता है. 

हरक सिंह यही नहीं थमे उन्होंने विकासनगर तहसील की अफसरशाही पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि तहसील के अधिकारी प्रॉपर्टी डीलरों की तरह काम कर रहे हैं और भूमाफिया तथा खनन माफिया को संरक्षण मिल रहा है. उन्होंने विकासनगर में एक उपजिलाधिकारी की लंबे समय से तैनाती पर सवाल उठाते हुए उनके परिवार के मुख्यमंत्री से संबंधों का हवाला दिया. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस की सरकार बनने पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जेल भेजा जाएगा.

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अब सवाल यही है कि क्या कांग्रेस न्याय यात्रा के जरिए जनता के मुद्दों को मजबूती से उठा पाएगी या फिर विधानसभा चुनाव से पहले टिकट की दावेदारी, खेमेबाजी और अंदरूनी खींचतान ही पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी? सहसपुर में यात्रा के आगाज ने इतना तो साफ कर दिया कि कांग्रेस के लिए सरकार से मुकाबले के साथ-साथ अपने भीतर की सियासत को साधना भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.

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