दिल्ली की एक रात, एक लहूलुहान लड़की, एक रिश्वतखोर पुलिस अधिकारी और फिर शुरू होती है सच की तलाश, ‘गजब रात’ शुरुआत से ही आपको कुर्सी से उठने नहीं देती. नीरज पांडे की फिल्म गजब रात नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है. फिल्म देखने से पढ़ें इसका रिव्यू.
कहानी: एक रात, कई राज
सब-इंस्पेक्टर अजय निर्वित (मनोज बाजपेयी) दिल्ली के उन कॉप्स में से हैं, जो रात की ड्यूटी में छापा मारते हैं, लेकिन मकसद गिरफ्तारी नहीं, मोटी रिश्वत वसूलना होता है. लेकिन जब कॉनॉट प्लेस के पास एक गंभीर रूप से घायल युवती को चलती कार से फेंका जाता है, तो उनकी ‘आसान रात’ एक खतरनाक खेल में बदल जाती है.
यहां से फिल्म एक ऐसे जंगल में ले जाती है, जहां पुलिस, नेता, बदमाश और ब्यूरोक्रेट्स सबकी अपनी-अपनी दाल गलनी है. असली मजा ये है कि अजय भी कोई साधारण हीरो नहीं, वो रिश्वत लेता है, लेकिन उसके अंदर का जमीर अभी पूरी तरह दफन नहीं हुआ.
मनोज बाजपेयी ने किया कमाल
मनोज बाजपेयी एक बार फिर साबित करते हैं कि जब वो स्क्रीन पर आते हैं, तो सीन उनका हो जाता है. उनका किरदार अजय चालाक भी है, बेशर्म भी, मजाकिया भी और कभी-कभी अचानक इंसान भी बन जाता है. दिल्ली के गलियारों में उन्हें ‘गिरगिट’ कहा जाता है और बाजपेयी इस नाम को हर एक्सप्रेशन में जी देते हैं. उनके संवाद, खासकर सीनियर अधिकारियों से उनकी नोक-झोंक, फिल्म के सबसे मजेदार पल हैं. वो रिश्वत तो लेते हैं, लेकिन किसी के सामने झुकते नहीं और यही किरदार फिल्म को एक आम थ्रिलर से ऊपर उठा देता है.
क्यों देखें फिल्म?
कहानी एक ही रात में आगे बढ़ती है, इसलिए टेंशन और रफ्तार बनी रहती है. संवाद तीखे हैं और बीच-बीच में ड्राई कॉमेडी भी अच्छी लगती है. मनोज बाजपेयी के अलावा नुसरत भरूचा, दिव्या दत्ता और अक्षय ओबेरॉय भी किरदारों में जान डालते हैं. दिल्ली की रात, सत्ता का खेल और भ्रष्ट व्यवस्था की तस्वीर बेहद असरदार ढंग से उभरती है.
कहां लगती है कमी?
फिल्म के कुछ ट्विस्ट काफी प्रिडिक्टेबल हैं. खासकर अगर आपने ब्यूरोक्रेसी-थ्रिलर्स खूब देखे हों. कुछ जगह कहानी अपने असर को समझाने में उलझती भी है और रफ्तार थोड़ी लड़खड़ाती है. बैकग्राउंड स्कोर भी काफी जेनेरिक लगता है, जिससे कई सस्पेंस सीन्स उतने तीखे नहीं बन पाते जितने होने चाहिए थे.
अगर आपको भ्रष्टाचार, सियासी साजिश और एक ऐसे हीरो की कहानी पसंद है जो न तो पूरा साधु है और न पूरा शैतान, तो ‘गजब रात’ आपके लिए बनी है. यह कोई महाकालीन सस्पेंस नहीं, लेकिन मनोज बाजपेयी के दम पर यह एक बार जरूर देखने लायक थ्रिलर है.