उत्तर प्रदेश में 11 और बिहार में विधान परिषद (MLC) की 8 सीटों पर शुक्रवार (23 अक्टूबर) को मतदान होना है. मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा, जिसकी तैयारियां चुनाव आयोग ने पूरी कर ली हैं. बिहार में जिन 8 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है, उनमें पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं.
चुनाव क्षेत्रों में ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं और पोलिंग पार्टी बूथों के लिए शाम से रवाना होंगी. चुनाव आयोग ने संबंधित जिलों में प्रखंड स्तर पर मतदान केंद्र बनाए हैं. वहीं, 27 अक्टूबर को मतगणना होगी.
इस बीच, बिहार में विधान परिषद चुनाव से पहले NDA के भीतर दो सीटों पर विवाद सामने आया है. पहला मामला सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का था, जहां RLM के नेता रामपुकार सिन्हा ने NDA के आधिकारिक उम्मीदवार आनंद पुष्कर के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था. दूसरा विवाद पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में है. यहां JDU ने नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है. लेकिन मोकामा के JDU और बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने पार्टी उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का समर्थन दिया.
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बता दें, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए भी मतदान 23 अक्टूबर को होगा. एमएलसी चुनाव को बीजेपी और सपा, दोनों ही 2027 का 'सेमीफाइनल' मानकर लड़ रहे हैं.
यूपी में 11 सीटों में से आगरा क्षेत्र स्नातक, मेरठ क्षेत्र स्नातक, इलाहाबाद-झांसी क्षेत्र स्नातक, लखनऊ क्षेत्र स्नातक और वाराणसी क्षेत्र स्नातक सीट हैं. इसके अलावा आगरा क्षेत्र शिक्षक, मेरठ क्षेत्र शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद क्षेत्र शिक्षक, लखनऊ क्षेत्र शिक्षक, काशी क्षेत्र शिक्षक और गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र शिक्षक सीट शामिल हैं.
उत्तर प्रदेश की 5 एमएलसी सीटें पश्चिमी यूपी की हैं, तो दो सीटें लखनऊ क्षेत्र की हैं और एक सीट बुंदेलखंड की, जबकि तीन सीटें पूर्वांचल क्षेत्र की हैं. इन सीटों को लेकर जिन जिलों में वोटिंग होनी है, वहां पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे. जानकारी के मुताबिक, मतदान केंद्रों पर मोबाइल, कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं रहेगी. मतपत्र से मतदान होगा.
विधान परिषद की 11 सीटें सूबे के बड़े हिस्से को कवर करती हैं, जिनमें शिक्षक संघों के पारंपरिक दबदबे वाली सीटों से लेकर बड़े-बड़े शहरी वोटर्स शामिल हैं.
इस बीच, सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला CM योगी के गृहक्षेत्र और राजनीतिक गढ़ गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक कोटे की एमएलसी सीट पर देखने को मिल रहा है.
इस सीट पर सपा और बीजेपी दोनों ने अपने संगठन की पूरी ताकत झोंक दी है और सांसद-विधायकों को भी मैदान में उतार दिया है. अखिलेश यादव खुद इस पर नजर बनाए हुए हैं, तो वहीं CM योगी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है. सपा ने बीजेपी के ही बागियों के सहारे मुख्यमंत्री के दुर्ग में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है, जिससे सत्तारूढ़ दल की बेचैनी बढ़ गई है.