चुनाव राज्य पश्चिम बंगाल इन दिनों नेशनल पॉलिटिक्स में चर्चा का मुद्दा बना हुआ है. सूबे में एसएआई प्रोसेस शुरू होने के बाद से ही सियासी उबाल ज़ोरों पर है. टीएमसी और बीजेपी के बीच तकरीबन टकराव वाली स्थिति है. टीएमसी ने कई बार चुनाव आयोग पर आरोप भी लगाया है. अब एक नया मामला सामने आया है, जिससे विवाद जैसी स्थिति पैदा हो गई है. मामला एसआईआर के दौरान नाम कटने को लेकर शुरू हुआ, जिसके बाद प्रोटेस्ट हुआ. विवाद हुआ और अब इसकी चिंगारी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है.
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए निराशा जताई और सूबे की ममता सरकार को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल सबसे ज़्यादा राजनीतिक रूप से बंटा हुआ स्टेट है."
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी मालदा ज़िले के एक गांव में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न' (SIR) का काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों को घेरे जाने और उन पर हुए दुर्भाग्यपूर्ण हमले के बाद की गई.
बुधवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक II ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) के बाहर SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर ज़बरदस्त प्रोटेस्ट हुआ. प्रदर्शनकारियों ने सबसे पहले न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की लेकिन, उनकी यह मांग ठुकरा दी गई. इसके बाद शाम करीब 4 बजे तीन महिला अधिकारियों सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया.
इसके बाद, आज भी सुबह से ही मालदा में सड़क जाम करके एसआईआर के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहा है. आज सुबह फिर से ओल्ड मालदा ब्लॉक के मंगलबाड़ी इलाके में नारायणपुर BSF कैंप के पास नेशनल हाईवे 12 को जाम करके विरोध प्रदर्शन करने के लिए लोग इकट्ठा हुए.
प्रोटेस्टे मालदा के इंग्लिश बाज़ार के जदुपुर इलाके में नेशनल हाईवे 12 हो रहा था. विरोध प्रदर्शन की वजह से हाइवे पर जाम लग गया. इसके बाद, जाम हटाने की कोशिश के दौरान पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं. पुलिस के एक वाहन का ड्राइवर घायल हो गया. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. प्रदर्शनकारी अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने की मांग कर रहे थे.
मालदा पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों की एक बड़ी टुकड़ी, साथ ही केंद्रीय बलों को भी मौके पर तैनात किया गया है. जाम वाली जगह पर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को जान-बूझकर वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनके नाम वोटर लिस्ट में वापस शामिल नहीं किए जाते, तब तक यह विरोध प्रदर्शन अनिश्चित काल तक जारी रहेगा.
मालदा में घेराव की घटना पर बयान जारी करते हुए तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष
ने कहा, "हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हम किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का समर्थन नहीं करते. इस घटना के पीछे बीजेपी का हाथ है. उन्होंने कुछ तत्वों को प्रायोजित किया है, जिससे वे अशांति फैलाकर एक मुद्दा खड़ा कर सकें. अब इसकी पूरी ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग (EC) की है, क्योंकि अभी कानून-व्यवस्था की कमान उन्हीं के हाथों में है."
बयान में आगे कहा गया कि TMC का रुख बिल्कुल साफ है. हम इस मामले को अदालतों में कानूनी तौर पर लड़ रहे हैं. एक कानून-पसंद नागरिक होने के नाते, किसी को भी बीजेपी के जाल में नहीं फंसना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, "पश्चिम बंगाल में हुई यह चौंकाने वाली घटना सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती देती है, यह सोची-समझी और किसी मकसद से की गई लगती है."
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग से इस घटना की जांच सीबीआई या एनआईए से करवाने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि हम इस जांच पर नजर रखेंगे.
कोर्ट ने मुख्य सचिव, DGP, पुलिस अधीक्षक और मालदा के ज़िला कलेक्टर को भी फटकार लगाई. CJI ने बंगाल के वकील को फटकार लगाते हुए कहा, "रात 11 बजे तक आपका कलेक्टर वहां मौजूद नहीं था. मुझे रात में मौखिक रूप से बहुत सख़्त आदेश देने पड़े. एक 5 साल के बच्चे को खाना-पानी भी नहीं दिया गया."
चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के दखल के बाद ही रिहा किया गया.
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प्रोटेस्ट के दौरान हुई हालिया घटना पर ममता बनर्जी ने कहा, "मुझे नहीं पता कि वे लोग कौन थे, जिन्होंने कल न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया, लेकिन लोग 'SIR' से नाराज़ हैं. मेरे पास कोई पावर नहीं है. उन्होंने मुझसे सारी शक्तियां छीन ली हैं. कानून-व्यवस्था और बाकी सब कुछ वे कंट्रोल करना चाहते हैं, लेकिन वे असफल रहे. वे जजों को सुरक्षा देने में नाकाम रहे."
ममता बनर्जी ने आगे कहा, "उन्होंने गृह सचिव, CS, SP, DGP, DM, SDO सबको बदल दिया है. अब वे बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहते हैं. यह बीजेपी की सोची-समझी चाल है. वे चुनाव रद्द करवाना चाहते हैं और राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहते हैं."
मालदा में प्रदर्शन करने वाले लोगों मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, "मैं मालदा में प्रोटेस्ट कर रहे लोगों से कहना चाहती हूं कि आप लोग बात समझ नहीं रहे हैं. किसी भी तरह के उकसावे में न आएं. आपके लोगों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा."
उन्होंने आगे कहा कि कल जुम्मे का दिन (शुक्रवार) है. मैं मालदा और मुर्शिदाबाद के लोगों से भी यही कहूंगी कि ऐसा कुछ भी न करें, जो आपके ही ख़िलाफ़ जाए. किसी के भी उकसावे में आकर ऐसा कोई काम न करें, जिसकी वजह से आपको CBI या NIA का सामना करना पड़े.
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बीजेपी आईटी सेल के अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था को इस तरह से ध्वस्त होने नहीं दिया जा सकता. उन्होंने कहा, "कालीचक-II BDO कार्यालय को घेर लिया गया था. उत्तरी बंगाल और दक्षिणी बंगाल का संपर्क पूरी तरह से कट गया था, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने NH-12 को जाम कर दिया था. तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारी अंदर फंसे हुए थे. स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई थी."
अमित ने आगे कहा कि सात न्यायिक अधिकारी कालीचक-II स्थित BDO कार्यालय के अंदर ही फंसे रहे, जिसे एक बड़ी भीड़ ने चारों ओर से घेर लिया था. स्थानीय सुरक्षाकर्मियों ने बाहर की स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बताया. न सिर्फ कार्यालय से बाहर निकलने का रास्ता बंद था, बल्कि सभी रास्तों पर कई जगह सड़कों को भी जाम कर दिया गया था, जिससे कहीं भी आना-जाना बेहद खतरनाक हो गया था.
उन्होंने आगे दावा किया कि जिला न्यायाधीश के निर्देशों का पालन करते हुए, अधिकारियों ने एक साथ रहने का फैसला किया और जोखिम को कम करने के लिए अकेले कहीं भी आने-जाने से परहेज़ किया. हालांकि, स्थिति लगातार बिगड़ती गई. जिला और पुलिस प्रशासन द्वारा तत्काल हस्तक्षेप की सख्त जरूरत थी. सभी अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाने थे.
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, "आइए, हम शांति से चुनाव लड़ें. इस तरह की हिंसा न करें. अगर किसी का नाम लिस्ट से हटा दिया गया है, तो उसके लिए शिकायत करने की जगह है. वे बंगाल को बेचना चाहते हैं, इसलिए वे सभी प्रोजेक्ट बंद कर देंगे. मैं हिंदुओं और मुसलमानों से एकजुट होने की अपील करती हूं. यह सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई है. मैं धर्मनिरपेक्षता में यकीन रखती हूं. मुझे बहुत बुरा लगा कि उन्होंने मेरी सारी ताकत छीन ली है. आप ऐसे काम कर रहे हैं, जिनसे मेरा सम्मान कम हो रहा है.
ममता बनर्जी ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने कहा, "यहां की आबादी का स्वरूप बदल गया है. यह पूरी तरह से अमित शाह की योजना है. उन्होंने ही यह सब किया है. वे न तो सीमा की रक्षा कर पा रहे हैं और न ही लोगों की जान बचा पा रहे हैं. मैं गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करती हूं."