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'ये सोची-समझी साजिश...', SIR ऑफिसर्स को बंधक बनाने पर SC सख्त, बंगाल सरकार को पड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने इसे सोची-समझी साजिश बताते हुए प्रशासन की विफलता और राज्य में ध्रुवीकरण पर चिंता जताई.

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सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को लगाई फटकार (Photo: Screengrab/X/Amit Malviya)
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को लगाई फटकार (Photo: Screengrab/X/Amit Malviya)

पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारी के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है और राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शन के संबंध में रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जहां न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया गया था. चीफ जस्टिस ने कहा कि मुझे कल रात सख्त आदेश जारी करना पड़ा, तभी प्रशासन हरकत में आया. क्योंकि घेराव किए गए न्यायिक अधिकारी का 5 साल का बच्चा भी घर में था.

कोर्ट ने राज्य को देश का 'सबसे ज़्यादा ध्रुवीकृत' राज्य बताया और इस घटना की निंदा करते हुए इसे चुनावी प्रक्रिया में लगे अधिकारियों का मनोबल गिराने की 'पहले से सोची-समझी, सोची-विचारी और मकसद से की गई' कोशिश करार दिया.

पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल को संबोधित करते हुए भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने कहा, "दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर कोई सियासी नज़रिए से बात करता है. क्या आपको लगता है कि हमें नहीं पता कि उपद्रवी कौन हैं? मैं रात 2 बजे तक हर चीज़ पर नज़र रख रहा था. यह बहुत ही ज़्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है."

कोर्ट ने लगाई फटकार...

चीफ जस्टिस ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP और ज़िला मजिस्ट्रेटों सहित सूबे के टॉप अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया कि पहले से जानकारी होने के बावजूद वे अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने में फेल क्यों रहे.

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अपने आदेश में बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारी घेराव दोपहर बाद करीब 3:30 बजे शुरू हुआ. महापंजीयक ने प्रशासनिक प्राधिकारी को सूचित कर तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया. रात 8:30 बजे तक कुछ नहीं किया गया. तब गृह सचिव से संपर्क किया गया. डीजीपी ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ ग्रुप कॉल किया. जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.

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इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने अपने पत्र में कहा कि न तो जिला मजिस्ट्रेट और न ही पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे हैं. चीफ जस्टिस को राज्य के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी और गृह सचिव को बुलाना पड़ा.

सीजेआई ने कहा कि कल हुई घटना इस अदालत के अधिकारियों को चुनौती देने की एक शेमलेस कोशिश थी. न्यायिक अधिकारियों को हतोत्साहित करने और प्रक्रिया को रोकने के लिए यह एक अच्छी तरह से सोच-विचार वाला कदम था. मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह सचिव का आचरण बिल्कुल निंदनीय था.

बंगाल में विवाद क्या है?

दरअसल, एसआईआर प्रोसेस पूरा होने के बाद बंगाल में कई जगह विपक्ष ने वोटर लिस्ट से नाम डिलीट करने के आरोप लगाए हैं. इसे लेकर जगह-जगह विपक्षी कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं. मालदा में एसआईआर से जुड़े न्यायिक अधिकारी के घेराव होने का मामला बीजेपी ने भी उठाया था. 

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बीजेपी आईटी सेल के अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पोस्ट में बंगाल सरकार पर कई तरह के आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा, "कालीचक-II BDO कार्यालय को घेर लिया गया था. उत्तरी बंगाल और दक्षिणी बंगाल का संपर्क पूरी तरह से कट गया था, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने NH-12 को जाम कर दिया था. तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारी अंदर फंसे हुए थे. स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई थी."

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अमित ने आगे कहा कि सात न्यायिक अधिकारी कालीचक-II स्थित BDO कार्यालय के अंदर ही फंसे रहे, जिसे एक बड़ी भीड़ ने चारों ओर से घेर लिया था. स्थानीय सुरक्षाकर्मियों ने बाहर की स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बताया. न सिर्फ कार्यालय से बाहर निकलने का रास्ता बंद था, बल्कि सभी रास्तों पर कई जगह सड़कों को भी जाम कर दिया गया था, जिससे कहीं भी आना-जाना बेहद खतरनाक हो गया था.

उन्होंने आगे दावा किया कि जिला न्यायाधीश के निर्देशों का पालन करते हुए, अधिकारियों ने एक साथ रहने का फैसला किया और जोखिम को कम करने के लिए अकेले कहीं भी आने-जाने से परहेज़ किया. हालांकि, स्थिति लगातार बिगड़ती गई. जिला और पुलिस प्रशासन द्वारा तत्काल हस्तक्षेप की सख्त जरूरत थी. सभी अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाने थे.

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अमित मालवीय ने आगे कहा कि कानून-व्यवस्था को इस तरह से ध्वस्त होने नहीं दिया जा सकता. 

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