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मायावती का दांव, राजभर का जमीनी गणित... आजमगढ़ में अखिलेश के लिए 'चक्रव्यूह' तैयार!

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को उनके ही मजबूत गढ़ आजमगढ़ में विपक्ष ने घेराबंदी में जुट गए हैं. बसपा प्रमुख मायावती सीधे सपा पर अटैक करने का दांव चल रही हैं तो ओम प्रकाश राजभर बीजेपी की नैया पर सवार होकर अपने सियासी आधार के जरिए मात देना चाहते हैं.

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अखिलेश यादव कैसे तोड़ पाएंगे विपक्ष का चक्रव्यूह (Photo-ITG)
अखिलेश यादव कैसे तोड़ पाएंगे विपक्ष का चक्रव्यूह (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश की सियासत में इटावा और मैनपुरी के बाद आजमगढ़ को समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ ही नहीं, बल्कि 'अभेद्य दुर्ग' माना जाता है. 2022 में सपा ने इतिहास रचते हुए जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया था तो 2024 में दोनों लोकसभा सीटें जीती थी. अब सपा को 2027 में विपक्ष आजमगढ़ के सियासी रण में घेरने के नहीं बल्कि क्लीन बोल्ड करने का चक्रव्यूह रचने में जुटा है. 

आजमगढ़ लोकसभा सीट से सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलश यादव तक सांसद रह चुके हैं और अभी धर्मेंद्र यादव सांसद हैं. इस लिहाज से समझा जा सकता है कि सपा के लिए आजमगढ़ सियासी तौर पर कितना अहम है, जिसके चलते ही बसपा और बीजेपी ने सपा को उसके घर में घेराबंदी करने की कवायद शुरू कर दी है. 

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए सियासी जंग जीतने की रणनीति है. ऐसे में विपक्षी खेमा अखिलेश यादव के अभेद्य किले आजमगढ़ में सेंध मारी के लिए सियासी चक्रव्यूह तैयार कर रहा है.मायावती सपा के कोर वोटबैंक एम-वाई पर सीधे अटैक करने का प्लान है तो योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर आक्रामक हमले कर सियासी माहौल बना रहे हैं. 

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आजमगढ़ में मायावती का सियासी चक्रव्यूह 
आजमगढ़ जिले में 10 विधानसभा सीटें आती हैं, जो भले ही आज सपा का गढ़ माना जाता है, लेकिन एक समय बसपा की सियासी प्रयोगशाला रही है. इसीलिए मायावती 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा को आजमगढ़ में घेराबंदी करने की कवायद शुरू कर दी है. बसपा ने आजमगढ़ की तीन विधानसभा सीटों पर प्रभारी का ऐलान किया, जो आगामी चुनाव में बसपा के प्रत्याशी होंगे.  

मुबारकपुर सीट पर डा. महबूब आजम अंसारी, दीदारगंज सीट पर अबुल कैस आज़मी और फूलपुर-पवई सीट से इमरान अहमद उर्फ हिटलर को को प्रभारी बनाया है. इसके अलावा गोपलपुर और निजामाबाद सीट से बसपा यादव समुदाय के प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रखी है. पार्टी  जिस तरह के नेताओं को प्रभारी बना रही है, उससे साफ है कि आजमगढ़ में पूरी मजबूती के साथ सपा को घेरने का ही नहीं बल्कि मात देने का तानाबाना बुन रही है.

सपा पर डायरेक्ट अटैक का मायावती प्लान
बसपा सूत्रों की माने तो आजमगढ़ जिले की 10 विधानसभा सीटों में से चार मुस्लिम, दो यादव, दो ठाकुर और दो सुरक्षित सीटों से दलित समाज से प्रत्याशी  2027 में उतारने की तैयारी कर रही है. बसपा का पूरा फोकस आजमगढ़ में सपा के कोर वोटबैंक माने जाने वाले यादव-मुस्लिम पर है. सपा के जीत का आधार भी आजमगढ़ में यही रही है, जिसे पर मायावती ने अपनी नजर गढ़ा दी है. यादव और मुस्लिम उम्मीदवारों पर दांव खेलने से निश्चित है कि सपा का समीकरण बिखर सकता है.

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बसपा ने जिस तरह आर्थिक रूप से मजबूत नेताओं पर आजमगढ़ में दांव खेल रही है, वो अखिलेश यादव के राजनीतिक समीकरण को बिगाड़ सकता है.   2024 के लोकसभा चुनाव और उपचुनावों के बाद मायावती ने अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है. वह अखिलेश यादव के पारंपरिक और नए बने (दलित) वोट बैंक को वापस खींचने के लिए तीन स्तरों पर काम कर रही हैं:

मायावती समझ चुकी हैं कि अखिलेश यादव का मुख्य फोकस अब सिर्फ यादवों पर नहीं, बल्कि 'PDA' के तहत अति-पिछड़ों पर है. इसके काट के लिए बसपा ने विधानसभा प्रभारियों (कैंडिडेट्स) की सूची में यादव और मुस्लिम को प्रमुख रूप से रखा है. साथ में मायावती का फोकस दलित मतदाताओं को वापस पार्टी से जोड़ना है जो पिछले चुनावों में 'संविधान बचाने' के नाम पर सपा-कांग्रेस गठबंधन की तरफ भी शिफ्ट हो गए थे. 

ओम प्रकाश राजभर का सियासी चक्रव्यूह
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर सीधे अखिलेश यादव पर हमलावर हैं. इतना ही नहीं आजमगढ़ पर अपना खास फोकस कर रखा है. आजमगढ़ की दीदारगंज सीट से राजभर खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं, जिसका ऐलान भी कर चुके हैं. जिला में राजभर वोटर अच्छा खासा है, जो पिछले चुनाव में गठबंधन होने के चलते सपा के साथ एकजुट हो गया था. ओम प्रकाश राजभर अब बीजेपी की नैया पर सवार होकर अपने साथ जोड़ना चाहते हैं. 

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आजमगढ़ की कई सीटों पर राजभर समाज की आबादी अच्छी खासी है और जो सपा के बड़े गढ़ माने जाते हैं. बीजेपी के साथ गठबंधन होने के चलते राजभर ने अखिलेश के खिलाफ 'घेराबंदी' कर रहे हैं. उनका लक्ष्य अति-पिछड़े वोटों को सपा के पाले में जाने से रोकना है. इसीलिए वो आक्रामक तेवर अपना रखा है. 

अखिलेश कैसे तोड़ेंगे बसपा-राजभर का चक्रव्यूह
अखिलेश यादव के खिलाफ आजमगढ़ में बन रहे इस चक्रव्यूह का मुख्य उद्देश्य सपा के वोट बैंक को बिखरने पर मजबूर करना है. बसपा प्रमुख मायावती लगातार मुस्लिम उम्मीदवारों को उन सीटों पर प्रभारी बना रही है जहां सपा का मजबूत जनाधार है, ताकि मुस्लिम वोट बंट जाएं और सपा कमजोर हो.

राजभर और एनडीए के अन्य सहयोगी (जैसे अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद) गैर-यादव ओबीसी वोटों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अखिलेश का 'P' (पिछड़ा) फॉर्मूला बिखर जाए. इस चक्रव्यूह को भांपते हुए अखिलेश यादव भी अपनी रणनीति पर काम शूरू कर दिया है. बसपा को बीजेपी की बी-टीम करार दे रहे हैं तो राजभर पर कोई खास तवज्जे नहीं दे रहा है. सपा अपने जमीनी संगठन 'पीडीए' की चौपालों के जरिए इस चक्रव्यूह को भेदने की तैयारी में जुटा है. 

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