समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसी को लेकर अखिलेश अगले महीने के आखिरी हफ्ते से राज्यव्यापी ‘पीडीए रथ यात्रा’ शुरू करने वाले हैं, जिसके लिए लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर बुधवार को विशेष रूप से तैयार की गई एक कैंपेन बस भी पहुंच गई है.
बताया जा रहा है कि ये पूरी यात्रा पार्टी के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) वोटों को एकजुट करने के फॉर्मूले पर आधारित है. यात्रा के जरिए पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव वाले अपने शानदार प्रदर्शन को दोहराने और 2027 में सत्ता परिवर्तन के टारगेट के साथ आगे बढ़ रही है.
हाईटेक सुविधाओं से लैस है अखिलेश का प्रचार रथ
सपा ने अभी यात्रा की तारीख, रूट और पूरा शेड्यूल तय नहीं किया है. अखिलेश 15 मीटर लंबी मल्टी-एक्सल बस में सफर करेंगे, जिसमें बुलेटप्रूफ शीशे और छत पर भीड़ को संबोधित करने के लिए हाइड्रोलिक लिफ्ट लगी है. इसमें 6 लोगों की बैठक, सोफा-कम-बेड युक्त लिविंग एरिया, किचन, पेंट्री, वॉशरूम, सीसीटीवी, बाहरी एलईडी स्क्रीन, वाई-फाई और एसी की सुविधा है. इस वाहन को अनुमानित 2 से 5 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड किया गया है.
रथ पर सामाजिक न्याय के नारे
लाल रंग की इस बस पर 'समाजवादी पीडीए यात्रा' और उसके नीचे पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक लिखा है. बाईं तरफ अखिलेश की तस्वीर के साथ 'सामाजिक न्याय का परचम लहराएगा, पीडीए ही परिवर्तन लाएगा' लिखा है. दाईं तरफ मुलायम सिंह यादव की तस्वीर के साथ 'पीडीए सामाजिक आंदोलन है, सामाजिक न्याय का संघर्ष है' लिखा है. इस पर भीमराव आंबेडकर, जनेश्वर मिश्र, राम मनोहर लोहिया और बेनी प्रसाद वर्मा की तस्वीरें भी हैं. अखिलेश ने इस बस का इस्तेमाल 2016-17 और 2021 में भी किया था.
2024 में दिखा था पीडीए फॉर्मूले का बड़ा असर
इसी पीडीए फॉर्मूले ने सपा को 2024 में राज्य की 80 में से 37 लोकसभा सीटें जिताकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराया था. वहीं, सत्तारूढ़ बीजेपी 62 से घटकर 33 सीटों पर आ गई और केंद्र में बहुमत से नीचे खिसक गई. सपा की सहयोगी कांग्रेस भी 1 से बढ़कर 6 सीटों पर पहुंच गई. 2024 में 403 विधानसभा क्षेत्रों में से सपा-कांग्रेस गठबंधन 224 पर आगे था. बीजेपी को 38.30 मिलियन और सपा को 38.16 मिलियन वोट मिले थे.
BJP का पलटवार
उधर, बीजेपी का दावा है कि सपा की पीडीए परिभाषा हर दिन बदलती है और अब रथ पर असली पीडीए सामने आ गया है. 2024 में सपा ने मुस्लिम-यादव के साथ कुर्मी, पाल और दलितों को जोड़कर पीडीए बनाया था, जिसे बाद में आधी आबादी (महिलाएं) भी बताया गया. अखिलेश यादव अब 2027 के चुनाव को सीधे तौर पर बीजेपी बनाम पीडीए का मुकाबला बता रहे हैं.