आकाश आनंद की बसपा में एक बार फिर वापसी हो गई है. मायावती ने उन्हें दोबारा राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी है. मगर इस बार कहानी सिर्फ पार्टी में लौटने तक सीमित नहीं है. मायावती से मुलाकातों के बाद आकाश की सक्रियता भी बढ़ती दिख रही है. लखनऊ की बड़ी सभा से लेकर अयोध्या के कार्यक्रम तक उनकी भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.
9 अक्टूबर को लखनऊ में भीमराव अंबेडकर की जयंती पर होने वाली बड़ी जनसभा में आकाश आनंद मंच पर नजर नहीं आएंगे, लेकिन पार्टी की तैयारियों के पीछे उनकी भूमिका रहने की बात कही जा रही है. इसके बाद 1 नवंबर को अयोध्या की एक विधानसभा में उनकी सभा होने की चर्चा है. यहां जितेंद्र सिंह बबलू के टिकट का ऐलान किए जाने की भी बात कही जा रही है.
यानी आकाश आनंद की वापसी के साथ ही उनकी राजनीति में सक्रियता का सवाल भी सामने आ गया है. मायावती ने उन्हें फिर बड़ी जिम्मेदारी दी है. ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि वह आगे किस तरह पार्टी के काम में उतरते हैं.
तीसरी बार हुई वापसी
आकाश आनंद की बसपा में यह तीसरी वापसी है. मायावती ने उन्हें उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की शुभकामनाएं भी दी हैं. जब आकाश के बार-बार पार्टी से बाहर होने और फिर लौटने को लेकर चर्चा तेज हुई तो मायावती ने खुद इस पर अपनी बात रखी. मायावती ने कहा कि आकाश आनंद शादी से पहले से ही बसपा में सक्रिय रहे हैं. शादी के बाद उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की वजह से उन्हें बार-बार पार्टी से बाहर किया गया. मायावती ने साफ किया कि अब ऐसी नौबत नहीं आएगी.
लखनऊ में हुई लंबी मुलाकात
आकाश आनंद की वापसी से करीब एक हफ्ते पहले लखनऊ में मायावती के आवास पर दोनों की लंबी मुलाकात हुई थी. इस बैठक में उन तमाम मुद्दों पर बात हुई, जिन्हें लेकर मायावती के मन में सवाल थे. आकाश ने उनका जवाब दिया. बात सिर्फ पार्टी के काम तक नहीं रही. परिवार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. खास तौर पर अशोक सिद्धार्थ के साथ आकाश आनंद के रिश्ते को लेकर बातचीत हुई. इसी मुलाकात में पुराने गिले-शिकवे दूर होने की बात सामने आई.
रविवार को आकाश आनंद और आनंद कुमार दोनों लखनऊ पहुंचे. मायावती के साथ फिर लंबी बातचीत हुई. इसके बाद आकाश को दोबारा राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर के पद पर बहाल कर दिया गया.
अब यूपी में बढ़ सकती है सक्रियता
आकाश आनंद को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर तो बनाया गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश की सियासत से दूर रखा गया था. अब उनकी वापसी के बाद माना जा रहा है कि मायावती उन्हें आगे और जिम्मेदारियां दे सकती हैं. 2027 के उपचुनाव में भी उनकी भूमिका को लेकर चर्चा है.
आकाश को वापस लाने के लिए पार्टी कैडर के दबाव की बात भी सामने आई है. मायावती को इसका अंदाजा है. यही वजह है कि इस बार वह आकाश की वापसी को लेकर खुद बार-बार अपनी स्थिति साफ कर रही हैं, ताकि उनकी भूमिका को लेकर कोई भ्रम न रहे. एक दिन पहले भी आकाश आनंद की लखनऊ में मायावती से मुलाकात हुई थी. करीब एक घंटे चली इस बैठक में पार्टी के लिए आगे कैसे काम करना है, इसे लेकर मायावती ने अपनी राय बताई.
वापसी के बाद हुआ स्वागत
आकाश आनंद की वापसी के बाद सतीशचंद्र और प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने उनका स्वागत किया. इस दौरान उन्हें नीली टोपी पहनाई गई. उनके लिए इस बार वापसी सिर्फ पद मिलने की बात नहीं है. उनके कार्यक्रमों को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है. अब देखना यह है कि मायावती के भरोसे के बाद आकाश आनंद किस तरह पार्टी में अपनी सक्रियता बढ़ाते हैं.