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CJP प्रोटेस्ट में हो गए थे शामिल, चली गई नौकरी, असिस्टेंट प्रोफेसर का आरोप 

बरेली के एक कॉलेज में कॉमर्स विभाग के एक असिस्टेंट प्रोफेसर का दावा है कि दिल्ली में छात्र विरोध प्रदर्शन से लौटने के एक दिन बाद ही उन्हें बर्खास्त कर दिया गया. कॉलेज मैनेजमेंट ने बार-बार की शिकायतों का हवाला देते हुए राजनीतिक गतिविधियों के खिलाफ चेतावनी दी है. 

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विरोध प्रदर्शन में पहुंचा प्रोफेसर चली गई नौकरी.
विरोध प्रदर्शन में पहुंचा प्रोफेसर चली गई नौकरी.

उत्तर प्रदेश के बरेली में असिस्टेंट प्रोफेसर को नौकरी से केवल इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि वे दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन में पहुंच गए थे. बरेली के गन्ना उत्पादक पीजी कॉलेज में कॉमर्स के शिक्षक डॉ. मोहित भारद्वाज का दावा है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन से लौटने के बाद उन्हें प्रिंसिपल के ऑफिस में बुलाया गया और उनकी नौकरी खत्म करने की जानकारी दी गई. उनका कहना है कि प्रबंधन ने कार्रवाई से पहले प्रदर्शन में शामिल होने का वीडियो भी आधार बनाया. डीएम को प्रार्थना पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि बिना कारण बताए और बिना नोटिस के उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. 

क्या है पूरा मामला? 

बता दें कि प्रोफेसर ने बताया कि वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ विरोध प्रदर्शन कथित परीक्षा अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ व्यापक आंदोलन का हिस्सा था, जिसमें प्रदर्शनकारी जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे. भारद्वाज का कहना है कि उन्होंने छात्रों के समर्थन में निजी तौर पर विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था और उन्होंने किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार से इनकार किया है.

उन्होंने अपनी बर्खास्तगी की वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि फैसला लेने से पहले न तो उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही कोई विभागीय जांच की गई. खबरों के अनुसार, उन्होंने जिला प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन को पत्र लिखकर शिकायतों, जांच के रिकॉर्ड और उनकी बर्खास्तगी से संबंधित कार्यवाही की प्रतियां मांगी हैं. 

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आरोप भी नहीं हुआ सिद्ध 

प्रोफेसर ने कहा कि हमारे खिलाफ आज तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बर्खास्तगी पत्र में डॉ. मोहित भारद्वाज के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिलने का जिक्र किया गया है. हालांकि, उन्होंने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि दो साल की नौकरी के दौरान उन्हें कभी कोई शिकायत नहीं मिली. 

वहीं, कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि संस्थान में राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है. कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, डॉ. भारद्वाज की सेवा समाप्त करने का फैसला प्रबंधन ने लिया है. 

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों में शामिल लोगों पर नजर रखी जा रही है. हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू ने भी छात्रों और शिक्षकों को बिना अनुमति वाले प्रदर्शनों से दूर रहने की सलाह दी है और नियम तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है. 

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