आईआईटी दिल्ली में 31 वर्षीय एमएससी फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है. इस बीच aajtak.in से बातचीत में ऋषिकेश के भाई अभिषेक कुमार ने आईआईटी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. अभिषेक ने दावा किया कि ऋषिकेश को हॉस्टल और फैमिली क्वार्टर देने से इनकार किया गया और मेडिकल कारणों से पढ़ाई में हुए ब्रेक के बाद उन्हें प्रोजेक्ट में भी अकेले काम करने को कहा गया.
अभिषेक ने कहा कि परिवार ने ऋषिकेश के लिए हॉस्टल की व्यवस्था कराने को लेकर प्रशासन से कई बार अनुरोध किया था. उनके मुताबिक, हॉस्टल इंचार्ज और संबंधित डीन से भी परिवार ने बात की, लेकिन कथित तौर पर मदद नहीं मिली.
अभिषेक के मुताबिक, ऋषिकेश ने हॉस्टल नहीं मिलने पर आईआईटी परिसर में उपलब्ध फैमिली क्वार्टर देने की भी मांग की थी. उनका आरोप है कि यह मांग भी स्वीकार नहीं की गई.
‘सेकंड सेमेस्टर पूरा नहीं कर पाए थे, फिर अकेले प्रोजेक्ट दिया गया’
ऋषिकेश के भाई ने बताया कि मेडिकल कारणों से वह सेकंड सेमेस्टर पूरा नहीं कर पाए थे और ड्रॉप लिया था. अभिषेक के मुताबिक, थर्ड सेमेस्टर में लौटने के बाद ऋषिकेश को रिसर्च प्रोजेक्ट दिया गया, लेकिन उन्हें अकेले काम करने के लिए कहा गया.
अभिषेक ने कहा कि ऋषिकेश ने प्रशासन से अनुरोध किया था कि उन्हें किसी ऐसे छात्र के साथ जोड़ दिया जाए जो अकेले प्रोजेक्ट कर रहा हो, ताकि वह उसके साथ मिलकर काम कर सकें. लेकिन कथित तौर पर उनकी यह मांग भी नहीं मानी गई.
अभिषेक ने कहा कि इसके बाद ऋषिकेश काफी परेशान रहने लगे थे. उन्होंने दावा किया कि ऋषिकेश अपनी मां से कहते थे कि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा और कोई उनकी मदद नहीं कर रहा.
‘मां से कहा गया- आपसे एक बच्चा नहीं संभाला जाता?’
अभिषेक ने आरोप लगाया कि एक मौके पर ऋषिकेश की मां के साथ प्रशासन की ओर से कथित तौर पर असंवेदनशील व्यवहार किया गया. उनके मुताबिक, डीन के साथ मौजूद एक महिला ने उनकी मां से कहा, “आपसे एक बच्चा नहीं संभाला जाता है?”
अभिषेक का दावा है कि इस बातचीत का ऋषिकेश पर गहरा असर पड़ा. उन्होंने बताया कि ऋषिकेश ने अपनी मां से कहा था कि उनकी वजह से उनका भी अपमान हो रहा है और वह यहां नहीं पढ़ेंगे.
अभिषेक के मुताबिक, उस दौरान ऋषिकेश काफी तनाव में थे और उन्होंने अपनी मां से कहा था कि उनकी जिंदगी व्यर्थ हो गई है और वह कुछ नहीं कर पा रहे हैं.
‘सुसाइडल होने की जानकारी देने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई’
अभिषेक ने दावा किया कि परिवार की ओर से प्रशासन को ऋषिकेश की मानसिक स्थिति और उनके आत्महत्या की कोशिश करने की आशंका के बारे में बताया गया था. उनका आरोप है कि इसके बावजूद प्रशासन की ओर से उन्हें विशेष सहायता या देखभाल उपलब्ध नहीं कराई गई.
उन्होंने कहा, “मानसिक बीमारी किसी के साथ भी हो सकती है, लेकिन कॉलेज का व्यवहार इतना असंवेदनशील था कि हम चर्चा भी नहीं कर सकते.”
‘डेथ के बाद प्रशासन से कोई बातचीत नहीं हुई’
अभिषेक ने बताया कि ऋषिकेश की मौत के बाद अब तक आईआईटी प्रशासन के साथ परिवार की कोई बातचीत नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक एफआईआर की कॉपी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं मिली है.
आईआईटी दिल्ली ने मामले की जांच के लिए एक बाहरी जांच समिति बनाने की घोषणा की है. समिति में उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार और एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सक समेत अन्य सदस्य शामिल हैं. संस्थान की ओर से परिवार को वित्तीय सहायता देने और छात्र शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने की भी बात कही गई है.
हालांकि, अभिषेक ने कहा कि फिलहाल उन्हें जांच और प्रशासन के आश्वासनों पर भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि परिवार को केवल न्याय चाहिए और उन्हें उम्मीद है कि जांच के जरिए ऋषिकेश की मौत की सच्चाई सामने आएगी.
‘आठ-नौ बच्चों की मौत के बाद भी भरोसा नहीं’
आईआईटी दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर अभिषेक ने कहा कि उन्हें खुशी है कि छात्र ऋषिकेश के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें डर है कि कुछ दिनों बाद मामला फिर शांत हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि संस्थान में पहले भी कई छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं हो चुकी हैं और अब ऋषिकेश की मौत के बाद भी अगर स्थायी समाधान नहीं निकला तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं.