मेंटल हेल्थ (Mental Health) एक मानसिक स्थिति है जो लोगों को जीवन के तनावों से निपटने, अपनी क्षमताओं का एहसास करने, अच्छी तरह से सीखने और अच्छी तरह से काम करने और अपने समाज में योगदान करने में सक्षम बनाती है. यह स्वास्थ्य और कल्याण का एक अभिन्न अंग है जो निर्णय लेने, रिश्ते बनाने और जिस दुनिया में हम रहते हैं उसे आकार देने की हमारी व्यक्तिगत और सामूहिक क्षमताओं को रेखांकित करता है.
मानसिक स्वास्थ्य एक बुनियादी मानव अधिकार है. यह व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है. मेंटल हेल्थ को बठावा देने के लिए 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है (World Mental Health Day).
कोटा से लेकर आईआईटी के कमरों तक पसरे अवसाद की जड़ें सिर्फ पढ़ाई में नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव, फैकल्टी के शोषण और कठोर नियमों में हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुए 2.43 लाख छात्रों के सर्वे में यह बात सामने आई है कि संस्थान मानसिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर बुरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं.
छोटे शहर की वो बेटियां जो कभी दूसरों के पहनावे और लाइफस्टाइल को 'जज' करती थीं, बड़े शहर की PG लाइफ में कदम रखते ही उनकी पूरी दुनिया ही बदल गई! 17 साल की उम्र में खौफनाक हादसों का सामना करने से लेकर बीमारी में अकेले दवाई तक न मिलने की बेबसी... नोएडा के पीजी की चारदीवारी में कैद इन बेटियों की आपबीती उस कड़वे सच को उजागर करती है, जिसे बड़े शहरों का ग्लैमर अक्सर छुपा लेता है.
IIT दिल्ली ने छात्रों के मेंटल हेल्थ और प्रेशर कम करने के लिए कई नए नियम लागू किए हैं. अब न सिर्फ 24x7 साइकियाट्रिस्ट सपोर्ट मिलेगा, बल्कि बाहर के इलाज का खर्च भी संस्थान खुद देगा. क्या CGPA की शर्त हटाने और AIIMS के डॉक्टरों की मदद से कैम्पस का खौफनाक तनाव खत्म हो पाएगा? जानिए इस बड़े फैसले की हर एक बारीक डिटेल.
फरवरी में एक छात्र की मौत, जुलाई में नए सेमेस्टर की शुरुआत में दूसरी खुदकुशी और अब सितंबर में इस तीसरे दर्दनाक हादसे ने पूरे एजुकेशन सिस्टम, अकादमिक दबाव और संस्थान के मेंटल हेल्थ मैकेनिज्म को कटघरे में खड़ा कर दिया है. कैंपस में छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आया है. इस मौत के पीछे की वजह भी छात्र सस्पेंशन का खौफ बता रहे हैं.
संस्थान द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शनिवार को आयोजित परीक्षा के दौरान छात्र को मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए देखा गया. जांच में सामने आया कि छात्र ने परीक्षा के प्रश्नपत्र की तस्वीर खींचकर AI प्लेटफॉर्म 'ChatGPT' पर अपलोड की थी, ताकि वह सवालों के जवाब खोज सके.
आईआईटी दिल्ली के छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद उनके भाई अभिषेक कुमार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि ऋषिकेश को हॉस्टल और फैमिली क्वार्टर नहीं दिया गया और मेडिकल कारणों से पढ़ाई में ब्रेक लेने के बाद भी उन्हें अकेले प्रोजेक्ट करने को कहा गया. आइए पढ़ें aajtak.in से उनकी खास बातचीत में क्या बताया...
IIT दिल्ली में MSc फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया. आक्रोशित छात्रों ने डीन और विभागाध्यक्ष के इस्तीफे, निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की है. छात्रों ने प्रशासन पर 'मोरल प्रोफाइलिंग' का आरोप लगाते हुए कक्षाएं बंद रखने और सोमवार तक मांगों पर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है.
एक आम इंसान जब उदास होता है, तो वह किसी दोस्त के गले लगकर रो सकता है, सोशल मीडिया पर अपना दर्द लिख सकता है, या किसी थेरेपिस्ट के पास जाकर कह सकता है कि 'डॉक्टर साहब, मुझे बचा लीजिए, मैं अंदर से मर रहा हूं.' लेकिन जब एक मनोचिकित्सक ही डिप्रेशन में घिरता है, तो उसके लिए किसी के आगे हाथ फैलाना सबसे मुश्किल काम बन जाता है.
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से हैदराबाद के रहने वाले डॉ. पुल्लागुरम अपनी पेशेवर प्रतिबद्धताओं के कारण IIT खड़गपुर परिसर के क्वार्टर नंबर 2-बीआर-14 में अकेले रह रहे थे. बुधवार दोपहर को पड़ोस के क्वार्टर में रहने वाले लोगों को कुछ अनहोनी का संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत कैंपस सुरक्षाकर्मियों को सूचित किया.
प्रोफेसर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने तर्क दिया कि कक्षा में कथित तौर पर किया गया अपमान आत्महत्या से एक महीने पहले हुआ था, इसलिए इसे मौत का तात्कालिक या सीधा कारण नहीं माना जा सकता.
अपनी पिटिशन में छात्र कार्तिक गौर ने बहुत सीधी और व्यावहारिक दलील दी है. aajtak.in से बातचीत में कार्तिक ने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म तक तो ठीक लेकिन ये भी कंट्रोल क्यों करते हैं कि बच्चे बाल कैसे कटवाएं. मुझे आज तक समझ नहीं आया कि बालों की लंबाई को अनुशासन का मुद्दा क्यों बनाया जाता है? अगर कोई छात्र अच्छे से पढ़ाई कर रहा है, तमीज से रह रहा है, तो उसके बालों की लंबाई से क्या फर्क पड़ता है?
रिसर्च के मुताबिक, घर में रहना पसंद करने की वजह सिर्फ इंट्रोवर्ट होना नहीं है. 2024 में प्रकाशित एक स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों को अपने घर में मेंटल पीस, इमोशनस सपोर्ट, परिवार का साथ और प्राइवेट स्पेस मिलता है, उनका अपने घर से गहरा लगाव बन जाता है.
सोशल मीडिया पर दूसरों की परफेक्ट जिंदगी देखकर खुद से तुलना करने की आदत बीमारियों का कारण बन रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत युवाओं में ज्यादा देखी जा रही है. इसके बारे में मानसिक रोग विशेषज्ञों ने बताया है.
स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग अब मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है. दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मानसिक रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. राम प्रताप बेनीवाल के अनुसार, फोन भी एक प्रकार का नशा बन गया है. लोगों को इसकी लत लग गई है.
बच्चा घंटों तक किताबों में खोया रहता है लेकिन बहुत कम बोलता है. मां को फिक्र होती है कि मेरा बच्चा 'नॉर्मल' तो है ना? पर क्या हर देर से बोलने वाला बच्चा पीछे रह जाता है? इतिहास और साइंस दोनों कहते हैं 'नहीं'. आइंस्टीन, न्यूटन और टैगोर जैसे कई जीनियस भी बचपन में ‘लेट टॉकर’ थे. चुप बच्चे अकसर सबसे गहराई से सोचते हैं.
अहमदाबाद के न्यू रानीप इलाके में 18 वर्षीय कहान पटेल ने 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा से तीन दिन पहले बहुमंजिला इमारत से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. परिवार और इलाके में शोक का माहौल है. यह घटना परीक्षा के बढ़ते दबाव और मानसिक तनाव की गंभीरता को दर्शाती है. देशभर में NEET परीक्षा के कारण छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
इंडिया टुडे की टीम ने देश की कोचिंग कैपिटल कहे जाने वाले कोटा का दौरा किया ताकि न सिर्फ टॉपर्स और शिक्षकों की बात सुनी जा सके, बल्कि उस तनाव, उम्मीदों और अनसुलझे सवालों को भी समझा जा सके जो आज इस शहर की पहचान बन चुके हैं. यहां बड़ी संख्या में पेरेंट्स भी अपने बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए साथ रह रहे हैं.
क्या वर्क फ्रॉम होम आपकी मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचा रहा है? जर्नल साइंस में पब्लिश हुई एक नई रिसर्च के मुताबिक, घर से काम करने वाले लोगों में अकेलापन 58% तक बढ़ गया है, जिससे वे डिप्रेशन, एंग्जायटी और मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं.
एक 34 वर्षीय युवा, जो सालाना 40 लाख रुपये कमाता है और गुड़गांव में चमचमाती बीएमडब्ल्यू चलाता है, मानसिक रूप से खुद को गरीब महसूस करता है. जाने-माने ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सनी गर्ग ने इस मरीज की कहानी साझा करते हुए बताया कि यह आधुनिक गरीबी की एक कड़वी सच्चाई है. आइए जानते हैं डॉक्टर ने कैसे सुलझाई ये उलझन...
आज ही नीट (NEET) की एक और होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने घर के पंखे से लटककर अपनी जान दे दी. आकांक्षा को हाल में दी परीक्षा में 650 नंबर आने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के सदमे ने उसकी हिम्मत तोड़ दी. नीट पेपर लीक के कारण ये अकेला सुसाइड नहीं है, अब तक ये आंकड़ा डराने वाला है. आप भी समझिए कि तैयारी कर रहे बच्चे किस मनोस्थिति से गुजर रहे हैं?
कोविड महामारी के बाद कामकाजी पुरुषों के मानसिक नजरिए और वर्क-कल्चर में बड़ा बदलाव आया है. अब वे भारी सैलरी और प्रमोशन्स की बजाय परिवार को प्राथमिकता दे रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, पिता दफ्तर में बिताए समय को घटाकर बच्चों के साथ अधिक समय बिता रहे हैं. यह बदलाव पारिवारिक खुशियों और मानसिक शांति को बढ़ावा देता है और कॉर्पोरेट जगत की प्रणाली को प्रभावित कर रहा है.