मेंटल हेल्थ (Mental Health) एक मानसिक स्थिति है जो लोगों को जीवन के तनावों से निपटने, अपनी क्षमताओं का एहसास करने, अच्छी तरह से सीखने और अच्छी तरह से काम करने और अपने समाज में योगदान करने में सक्षम बनाती है. यह स्वास्थ्य और कल्याण का एक अभिन्न अंग है जो निर्णय लेने, रिश्ते बनाने और जिस दुनिया में हम रहते हैं उसे आकार देने की हमारी व्यक्तिगत और सामूहिक क्षमताओं को रेखांकित करता है.
मानसिक स्वास्थ्य एक बुनियादी मानव अधिकार है. यह व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है. मेंटल हेल्थ को बठावा देने के लिए 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है (World Mental Health Day).
रिसर्च के मुताबिक, घर में रहना पसंद करने की वजह सिर्फ इंट्रोवर्ट होना नहीं है. 2024 में प्रकाशित एक स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों को अपने घर में मेंटल पीस, इमोशनस सपोर्ट, परिवार का साथ और प्राइवेट स्पेस मिलता है, उनका अपने घर से गहरा लगाव बन जाता है.
सोशल मीडिया पर दूसरों की परफेक्ट जिंदगी देखकर खुद से तुलना करने की आदत बीमारियों का कारण बन रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत युवाओं में ज्यादा देखी जा रही है. इसके बारे में मानसिक रोग विशेषज्ञों ने बताया है.
स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग अब मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है. दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मानसिक रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. राम प्रताप बेनीवाल के अनुसार, फोन भी एक प्रकार का नशा बन गया है. लोगों को इसकी लत लग गई है.
बच्चा घंटों तक किताबों में खोया रहता है लेकिन बहुत कम बोलता है. मां को फिक्र होती है कि मेरा बच्चा 'नॉर्मल' तो है ना? पर क्या हर देर से बोलने वाला बच्चा पीछे रह जाता है? इतिहास और साइंस दोनों कहते हैं 'नहीं'. आइंस्टीन, न्यूटन और टैगोर जैसे कई जीनियस भी बचपन में ‘लेट टॉकर’ थे. चुप बच्चे अकसर सबसे गहराई से सोचते हैं.
अहमदाबाद के न्यू रानीप इलाके में 18 वर्षीय कहान पटेल ने 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा से तीन दिन पहले बहुमंजिला इमारत से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. परिवार और इलाके में शोक का माहौल है. यह घटना परीक्षा के बढ़ते दबाव और मानसिक तनाव की गंभीरता को दर्शाती है. देशभर में NEET परीक्षा के कारण छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
इंडिया टुडे की टीम ने देश की कोचिंग कैपिटल कहे जाने वाले कोटा का दौरा किया ताकि न सिर्फ टॉपर्स और शिक्षकों की बात सुनी जा सके, बल्कि उस तनाव, उम्मीदों और अनसुलझे सवालों को भी समझा जा सके जो आज इस शहर की पहचान बन चुके हैं. यहां बड़ी संख्या में पेरेंट्स भी अपने बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए साथ रह रहे हैं.
क्या वर्क फ्रॉम होम आपकी मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचा रहा है? जर्नल साइंस में पब्लिश हुई एक नई रिसर्च के मुताबिक, घर से काम करने वाले लोगों में अकेलापन 58% तक बढ़ गया है, जिससे वे डिप्रेशन, एंग्जायटी और मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं.
एक 34 वर्षीय युवा, जो सालाना 40 लाख रुपये कमाता है और गुड़गांव में चमचमाती बीएमडब्ल्यू चलाता है, मानसिक रूप से खुद को गरीब महसूस करता है. जाने-माने ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सनी गर्ग ने इस मरीज की कहानी साझा करते हुए बताया कि यह आधुनिक गरीबी की एक कड़वी सच्चाई है. आइए जानते हैं डॉक्टर ने कैसे सुलझाई ये उलझन...
आज ही नीट (NEET) की एक और होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने घर के पंखे से लटककर अपनी जान दे दी. आकांक्षा को हाल में दी परीक्षा में 650 नंबर आने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के सदमे ने उसकी हिम्मत तोड़ दी. नीट पेपर लीक के कारण ये अकेला सुसाइड नहीं है, अब तक ये आंकड़ा डराने वाला है. आप भी समझिए कि तैयारी कर रहे बच्चे किस मनोस्थिति से गुजर रहे हैं?
कोविड महामारी के बाद कामकाजी पुरुषों के मानसिक नजरिए और वर्क-कल्चर में बड़ा बदलाव आया है. अब वे भारी सैलरी और प्रमोशन्स की बजाय परिवार को प्राथमिकता दे रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, पिता दफ्तर में बिताए समय को घटाकर बच्चों के साथ अधिक समय बिता रहे हैं. यह बदलाव पारिवारिक खुशियों और मानसिक शांति को बढ़ावा देता है और कॉर्पोरेट जगत की प्रणाली को प्रभावित कर रहा है.
डेलॉयट सर्वे में 44 देशों के 22,500 से अधिक युवाओं ने बताया कि वे सीनियर लीडरशिप रोल्स में रुचि रखते हैं, लेकिन तनाव और बर्नआउट से बचना चाहते हैं. आर्थिक असुरक्षा, बढ़ती महंगाई और करियर में स्थिरता उनकी प्रमुख चिंताएं हैं. AI को वे एक सहायक उपकरण मानते हैं, लेकिन कंपनियों की तकनीकी तैयारी पर सवाल उठाते हैं.
NEET UG 2026 परीक्षा कैंसिल होने और दोबारा परीक्षा के तनाव के बीच कर्नाटक की 18 वर्षीय भाग्यश्री ने आत्महत्या कर ली. 12वीं में 92 प्रतिशत अंक लाने वाली भाग्यश्री की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है. सोशल मीडिया पर लोग परीक्षा प्रणाली की खामियों और पेपर लीक की घटनाओं पर गहरा आक्रोश जता रहे हैं.
कर्नाटक के कलाबुर्गी में नीट परीक्षा की तैयारी कर रही होनहार छात्रा भाग्यश्री पाटिल ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. 12वीं बोर्ड में 92% अंक हासिल करने वाली भाग्यश्री पर पेपर लीक की खबरों और परीक्षा के दबाव ने गहरा प्रभाव डाला. पिता राजशेखर पाटिल ने बताया कि बेटी मानसिक तनाव में थी, हालांकि उन्होंने किसी पर कानूनी कार्रवाई नहीं की.
तेलुगु फिल्म अभिनेत्री, मॉडल और पूर्व मिस पुणे 'ट्विशा' के सुसाइड केस ने अब एक बेहद गंभीर और नया मोड़ ले लिया है. इस केस की परतों में जहां एक तरफ मायके और ससुराल पक्ष के बीच कानूनी और सामाजिक जंग चल रही है, वहीं अब देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के मनोचिकित्सक ने इस पूरे मामले में 'ससुराल पक्ष' के दावों पर अपना एक पक्ष रखा है जिससे लोग काफी प्रभावित हैं.
बोर्ड ने माता-पिता को बच्चों की काबिलियत को केवल मार्कशीट से न आंकने और उनकी खुशहाली पर ध्यान देने की सलाह दी है. साथ ही, बच्चों के लिए खाली समय और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है. नशीली दवाओं के सेवन को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने के लिए NCB के साथ सहयोग किया गया है.
पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज सलिल अंकोला डिप्रेशन से जूझ रहे हैं और पुणे के पास एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज करा रहे हैं. उनकी पत्नी रिया अंकोला ने बताया कि 2024 में मां के निधन के बाद वह काफी टूट गए थे. अंकोला अब तेजी से रिकवर कर रहे हैं. उन्होंने क्रिकेट के अलावा CID सीरियल और फिल्मों में भी काम किया था.
कॉर्पोरेट की तड़क-भड़क वाली लाइफ सभी को लुभाती है. लेकिन जो लोग इन नौकरियों को जॉइन करते हैं, उनके लिए इसकी सच्चाई कुछ अलग ही होती है. नोएडा के एक एम्प्लाई ने कॉर्पोरेट के अपने अनुभव शेयर करते हुए बताया कि कैसे 9 टू 6 जॉब में उन्होंने अनुभव किए.
बेरोजगारी का दंश झेलना भी किसी सजा से कम नहीं है. पांच महीने से नौकरी की तलाश, खत्म होती बचत और अब बेघर होने की कगार पर एक ग्रेजुएट ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है. हर कोई उसे सांत्वना दे रहा है. आइए जानते हैं उनकी कहानी...
पूर्व भारतीय बल्लेबाज विनोद कांबली की याददाश्त काफी कमजोर हो चुकी है और दिमाग में जमे क्लॉट के कारण उन्हें ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बना हुआ है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- अब कांबली की स्थिति पहले से बेहतर जरूर है, लेकिन पूरी तरह सेफ नहीं कही जा सकती.
बने रहो पगला, काम करेगा अगला... अभी तक आपने ऐसे कई देसी जुगाड़ सुने होंगे. लेकिन साहब, एक कॉपरेट 'महारथी' ने तो इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है. जब ऑफिस की चारदीवारी में काम से ज्यादा 'दिखावे' की कीमत होने लगे, तो लोग क्या-क्या तिगड़म भिड़ाते हैं, इसका एक नमूना सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
चाणक्य नीति के अनुसार कम बोलना सफलता की कुंजी है. ऐसे लोग ज्यादा फोकस्ड होते हैं, सोच-समझकर फैसले लेते हैं और अपनी योजनाओं को सुरक्षित रखते हैं. जानिए क्यों कम बोलने वाले लोगों को समाज में ज्यादा सम्मान और सफलता मिलती है.