मेंटल हेल्थ (Mental Health) एक मानसिक स्थिति है जो लोगों को जीवन के तनावों से निपटने, अपनी क्षमताओं का एहसास करने, अच्छी तरह से सीखने और अच्छी तरह से काम करने और अपने समाज में योगदान करने में सक्षम बनाती है. यह स्वास्थ्य और कल्याण का एक अभिन्न अंग है जो निर्णय लेने, रिश्ते बनाने और जिस दुनिया में हम रहते हैं उसे आकार देने की हमारी व्यक्तिगत और सामूहिक क्षमताओं को रेखांकित करता है.
मानसिक स्वास्थ्य एक बुनियादी मानव अधिकार है. यह व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है. मेंटल हेल्थ को बठावा देने के लिए 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है (World Mental Health Day).
बोर्ड ने माता-पिता को बच्चों की काबिलियत को केवल मार्कशीट से न आंकने और उनकी खुशहाली पर ध्यान देने की सलाह दी है. साथ ही, बच्चों के लिए खाली समय और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है. नशीली दवाओं के सेवन को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने के लिए NCB के साथ सहयोग किया गया है.
पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज सलिल अंकोला डिप्रेशन से जूझ रहे हैं और पुणे के पास एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज करा रहे हैं. उनकी पत्नी रिया अंकोला ने बताया कि 2024 में मां के निधन के बाद वह काफी टूट गए थे. अंकोला अब तेजी से रिकवर कर रहे हैं. उन्होंने क्रिकेट के अलावा CID सीरियल और फिल्मों में भी काम किया था.
कॉर्पोरेट की तड़क-भड़क वाली लाइफ सभी को लुभाती है. लेकिन जो लोग इन नौकरियों को जॉइन करते हैं, उनके लिए इसकी सच्चाई कुछ अलग ही होती है. नोएडा के एक एम्प्लाई ने कॉर्पोरेट के अपने अनुभव शेयर करते हुए बताया कि कैसे 9 टू 6 जॉब में उन्होंने अनुभव किए.
बेरोजगारी का दंश झेलना भी किसी सजा से कम नहीं है. पांच महीने से नौकरी की तलाश, खत्म होती बचत और अब बेघर होने की कगार पर एक ग्रेजुएट ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है. हर कोई उसे सांत्वना दे रहा है. आइए जानते हैं उनकी कहानी...
पूर्व भारतीय बल्लेबाज विनोद कांबली की याददाश्त काफी कमजोर हो चुकी है और दिमाग में जमे क्लॉट के कारण उन्हें ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बना हुआ है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- अब कांबली की स्थिति पहले से बेहतर जरूर है, लेकिन पूरी तरह सेफ नहीं कही जा सकती.
बने रहो पगला, काम करेगा अगला... अभी तक आपने ऐसे कई देसी जुगाड़ सुने होंगे. लेकिन साहब, एक कॉपरेट 'महारथी' ने तो इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है. जब ऑफिस की चारदीवारी में काम से ज्यादा 'दिखावे' की कीमत होने लगे, तो लोग क्या-क्या तिगड़म भिड़ाते हैं, इसका एक नमूना सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
चाणक्य नीति के अनुसार कम बोलना सफलता की कुंजी है. ऐसे लोग ज्यादा फोकस्ड होते हैं, सोच-समझकर फैसले लेते हैं और अपनी योजनाओं को सुरक्षित रखते हैं. जानिए क्यों कम बोलने वाले लोगों को समाज में ज्यादा सम्मान और सफलता मिलती है.
Social Media Anxiety: कभी वेकेशन और फिटनेस की तस्वीरों तक सीमित रहने वाला सोशल मीडिया अब 'प्रोफेशनल जंग' का मैदान बन गया है. दूसरों की नई जॉब और प्रमोशन की पोस्ट देख युवाओं में 'करियर फोमो' बढ़ रहा है.
IIT मंडी ने मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाओं को कम करने के लिए प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणालियों का उपयोग करते हुए एक प्रभावी मॉडल विकसित किया है. इसमें शास्त्रीय संगीत, योग, ध्यान और मंत्रोच्चार को शामिल किया गया है, जिससे छात्रों की मानसिक स्थिति में सुधार हुआ है. पांच वर्षों में यहां आत्महत्या की केवल एक घटना हुई है, जो अन्य IITs की तुलना में काफी कम है.
सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने खुलासा किया है कि कई कंपनियां कर्मचारियों को निकालने के लिए सुबह 6 बजे का समय चुनती हैं क्योंकि उस वक्त कर्मचारी अकेले होते है. इस रणनीति के तहत कर्मचारियों को अकेले में छंटनी का संदेश दिया जाता है और तुरंत उनका सिस्टम एक्सेस बंद कर दिया जाता है. यह तरीका कर्मचारियों के लिए मानसिक और पेशेवर दोनों रूप से बेहद दर्दनाक साबित हो रहा है.
चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी में एक छात्रा ने प्रोफेसर ए ज्ञानवेल बाबू पर पिछले तीन साल से मानसिक और यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है. छात्रा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. आरोप है कि प्रोफेसर ने इंटर्नशिप के बहाने छात्रा को परेशान किया और निजी मामलों पर अश्लील बातें कीं. छात्रा ने कॉलेज प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए हैं. इस मामले के बाद छात्रों ने यूनिवर्सिटी के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है और प्रोफेसर की तत्काल निलंबन व निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.
पैनिक बाइंग वह मानसिक स्थिति है जिसमें लोग किसी वस्तु की कमी या खत्म होने के डर से अत्यधिक खरीदारी करते हैं. ये व्यवहार केवल राशन तक सीमित नहीं, बल्कि नए गैजेट्स, सेल या ट्रेंडिंग प्रोडक्ट्स पर भी लागू होता है. मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि यह असुरक्षा की भावना, सोशल मीडिया का प्रभाव और 'हर्ड मेंटालिटी' से जुड़ा है. जानिए- कैसे बचें.
हैरिस पोल के आंकड़ों के अनुसार 94 प्रतिशत जेन-जी चाहते हैं कि वे 55 साल से पहले आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो जाएं. इसके लिए वे साइड इनकम, फ्रीलांसिंग या निवेश जैसे विकल्पों के बारे में सोचते हैं. यानी उनकी सोच है, 'कमाओ, बचाओ, कुछ समय का ब्रेक लो और फिर आगे बढ़ो.'
Meta ने कोर्ट में बताया कि 5 में 1 teen Instagram पर unwanted content देख रहा है. जानें social media impact, teen usage data और mental health concerns.
Small home या big bungalow—कहां ज्यादा happiness? Psychologists और research के मुताबिक बड़े घर loneliness और stress बढ़ा सकते हैं, जबकि छोटा घर social bonding को मजबूत करता है.
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में बच्चों और युवाओं में बढ़ती डिजिटल लत पर गहरी चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया और गेमिंग से न केवल मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, बल्कि कार्यक्षमता घटने से अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो रहा है. इसे लेकरअब उम्र-आधारित नियमों और डिजिटल डाइट जैसे कड़े कदम उठाए जाने चाहिए.
पढ़ाई के दबाव के अलावा बेरोजगारी भी आत्महत्या का एक बड़ा कारण रही है. NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में बेरोजगारी से जुड़े आत्महत्या के 2,851 मामले दर्ज किए गए थे. 2020 में यह संख्या बढ़कर 3,548 हो गई, जो इस अवधि का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. 2021 में भी लगभग इतने ही मामले (3,541) सामने आए.
युवक की मानसिक स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और डॉक्टरों ने उसे बचाया. कुमार सानू ने खुद मनोचिकित्सक से संपर्क कर फैन की मदद की पेशकश की. विशेषज्ञों ने फैनडम में डिल्यूजन के खतरों पर चेतावनी दी और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई. ये घटना मानसिक स्वास्थ्य और फैनडम के बीच संवेदनशील संबंध को उजागर करती है.
सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट ने साफ किया है कि देश की जेलें सिर्फ भीड़भाड़ से नहीं बल्कि व्यवस्था की पुरानी लापरवाहियों से भी जूझ रही हैं. FSL रिपोर्टों में देरी से मौत मामलों की जांच अटक जाती है, ट्रायल और अपील वर्षों तक शुरू नहीं होते और कैदियों के काम-काज में आज भी जातिगत भाषा और भेदभाव दिखता है. रिपोर्ट सवाल उठाती है कि क्या सच में सुधार हो रहे हैं?
बिगड़ रही है Delhi-NCR वालों की मेंटल हेल्थ. सर्दी और पॉल्यूशन बढ़ा रहा टेंशन!
सर्दियां आते ही दिल्ली-NCR की हवा ज़हरीली होने लगती है और इसका असर सिर्फ फेफड़ों पर नहीं बल्कि दिमाग और मूड पर भी गहराई से पड़ता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि बढ़ता पॉल्यूशन लोगों में चिड़चिड़ापन, चिंता, ब्रेन-फॉग और थकान जैसी मानसिक परेशानियां बढ़ा रहा है.