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चैट जीपीटी से नकल के बाद था 'सस्पेंशन' का खौफ? IIT बॉम्बे में 7 महीने में तीसरे सुसाइड से भड़का आक्रोश

फरवरी में एक छात्र की मौत, जुलाई में नए सेमेस्टर की शुरुआत में दूसरी खुदकुशी और अब सितंबर में इस तीसरे दर्दनाक हादसे ने पूरे एजुकेशन सिस्टम, अकादमिक दबाव और संस्थान के मेंटल हेल्थ मैकेनिज्म को कटघरे में खड़ा कर दिया है. कैंपस में छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आया है. इस मौत के पीछे की वजह भी छात्र सस्पेंशन का खौफ बता रहे हैं.

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देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के पवई कैंपस से शुक्रवार शाम जब एनर्जी साइंस विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र की आत्महत्या की खबर आई, तो सवाल सिर्फ एक परीक्षा हॉल की घटना तक सीमित नहीं रहा. यह पिछले 7 महीनों के भीतर IIT बॉम्बे कैंपस में दर्ज हुई तीसरी आत्महत्या है.

फरवरी में एक छात्र की मौत, जुलाई में नए सेमेस्टर की शुरुआत में दूसरी खुदकुशी और अब सितंबर में इस तीसरे दर्दनाक हादसे ने पूरे एजुकेशन सिस्टम, अकादमिक दबाव और संस्थान के मेंटल हेल्थ मैकेनिज्म को कटघरे में खड़ा कर दिया है. छात्रों का सवाल है कि अगर मेंटल प्रेशर न हो तो कोई सुसाइड क्यों करेगा?

'1 साल का सस्पेंशन' और कोर्स लंबा खिंचने का डर

संस्थान ने आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया कि मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन से 'ChatGPT' के जरिए उत्तर खोजते पकड़े जाने के बाद छात्र पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी. प्रशासन का कहना है कि विभागाध्यक्ष (HOD) और इंस्ट्रक्टर ने छात्र को समझाकर हॉस्टल भेजा था कि इससे उसके करियर पर असर नहीं पड़ेगा.

लेकिन देर रात कैंपस में सड़कों पर उतरे 400 से अधिक आक्रोशित छात्रों का दावा इससे बिल्कुल अलग है. प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि चेकिंग के दौरान छात्र को 1 साल के सस्पेंशन और हॉस्टल खाली कराने तक की चेतावनी दी गई थी. छात्रों के अनुसार, इसी खौफ और दबाव के कारण छात्र अत्यधिक तनाव में आ गया था, क्योंकि 1 साल के सस्पेंशन का मतलब 4 साल के बीटेक कोर्स का 5 साल या उससे अधिक खिंच जाना था.

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रातभर चला प्रोटेस्ट, मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित

छात्र के शव मिलने की खबर फैलते ही हॉस्टल 4 से लेकर मुख्य प्रशासनिक भवन तक छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. 400 से ज्यादा छात्रों ने मुख्य भवन को घेरकर नारेबाजी की और पारदर्शिता की मांग की. बढ़ते बवाल को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया. देर रात डायरेक्टर से छात्रों की लंबी बातचीत के बाद संस्थान ने चल रही मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया है.

7 महीने में 3 मौतें: काउंसलिंग सिस्टम पर सबसे बड़ा सवाल

हर हादसे के बाद जांच कमेटियां बैठती हैं और मेंटल हेल्थ सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन 7 महीने के भीतर तीन होनहार छात्रों को खो देना यह साबित करता है कि बंद कमरों की यह औपचारिक काउंसलिंग छात्रों के मन से असफलता का खौफ दूर करने में नाकाम साबित हो रही है. पुलिस फिलहाल सीसीटीवी, फोन और सहपाठियों के बयान दर्ज कर पूरे मामले की गहन पड़ताल कर रही है.

(डिस्क्लेमर: यदि आप या आपके कोई परिचित किसी भी तरह के मानसिक तनाव या डिप्रेशन से गुजर रहे हैं, तो कृपया सहायता मांगने में संकोच न करें. आप राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 'किरण' (KIRAN) के टोल-फ्री नंबर 1800-599-0019 या 'टेली-मानस' (Tele-MANAS) के 14416 पर संपर्क कर विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं.)

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