दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 में इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर है. जाट और गुर्जर बहुल पारंपरिक छात्र राजनीति के दबदबे के बीच नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने एक बड़ा दांव खेलते हुए विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष पद का चेहरा बनाया है. राजस्थान के एक बेहद साधारण परिवार और आदिवासी समुदाय से आने वाले विजय शंकर मीणा की उम्मीदवारी को केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि कैंपस में 'सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व' की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
अकादमिक प्रोफाइल और बैकग्राउंड
जानकारी के मुताबिक विजय शंकर मीणा मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं. उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई राजस्थान विश्वविद्यालय से पूरी की है. फिलहाल वे दिल्ली विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग (Department of Buddhist Studies) से एमए की पढ़ाई कर रहे हैं. कैंपस में दाखिल होने के बाद से ही वे छात्र अधिकारों, स्कॉलरशिप, हॉस्टल की किल्लत और वंचित वर्ग के छात्रों की आवाज बुलंद करने में सक्रिय रहे हैं.
'आदिवासी कार्ड' और NSUI का सियासी दांव
डूसू के इतिहास में अध्यक्ष पद पर अमूमन दिल्ली और आसपास के राज्यों के रसूखदार पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों का बोलबाला रहा है. ऐसे में NSUI द्वारा एक साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि के छात्र को आगे करने के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं. कहीं न कहीं NSUI इसे 'आम बनाम खास' की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है. मीणा खुद कहते हैं कि वे एक साधारण परिवार से आते हैं, इसलिए दूर-दराज से दिल्ली आकर पढ़ने वाले छात्रों की दैनिक समस्याओं और कमरों के भारी-भरकम किराए के दर्द को बखूबी समझते हैं.
इसे राहुल गांधी और कांग्रेस के 'सामाजिक न्याय' के एजेंडे को दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे देश के सबसे बड़े छात्र राजनीति के मंच पर उतारने की रणनीति मानी जा रही है.
क्या हैं NSUI के चुनावी मुद्दे?
1. किफायती आवास
किराया नियंत्रण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करना तथा किफायती पीजी और किराए के आवास के लिए सत्यापित डीयू पोर्टल तैयार करना.
2. मेट्रो कंसेशन पास
छात्रों के परिवहन खर्च को कम करने के लिए किफायती मेट्रो पास की व्यवस्था.
3. पांच दिवसीय शैक्षणिक कार्यक्रम
सोमवार से शुक्रवार तक कक्षाएं आयोजित करना, जिससे छात्रों को पाठ्येतर गतिविधियों और इंटर्नशिप के लिए अधिक समय मिल सके.
4. मासिक धर्म अवकाश
महिला छात्रों के लिए प्रति माह दो दिन के मासिक धर्म अवकाश का प्रावधान.
5. एनईपी आधारित चार वर्षीय स्नातक संरचना में सुधार
FYUP प्रणाली के तहत अधिक स्पष्टता, पारदर्शिता और बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करना.
6. खेल सुविधाएं
बेहतर खेल बुनियादी ढांचे और स्नातक छात्रों के लिए अधिक अवसरों की व्यवस्था.
7. 24×7 रीडिंग लाइब्रेरी
चौबीसों घंटे पुस्तकालय सुविधाएं, विस्तारित समय और बेहतर अध्ययन स्थलों की उपलब्धता.
8. सब्सिडाइज्ड 24×7 कैंटीन
छात्रों के लिए किफायती, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन की सुविधा.
9. मानसिक स्वास्थ्य सहायता
परिसरों में सुलभ काउंसलिंग सेवाएं और मजबूत मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली.
10. एससी/एसटी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति
एससी/एसटी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति के अवसरों और वित्तीय सहायता का विस्तार.
11. इंटर्नशिप और करियर सहायता
इंटर्नशिप, करियर मार्गदर्शन और रोजगार के अवसरों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना.
12. बेहतर बुनियादी ढांचा
बेहतर कक्षाओं, सुविधाओं और छात्र हितैषी परिसर बुनियादी ढांचे का विकास.
13. कानूनी जागरूकता सेमिनार और कैंप
छात्रों को उनके अधिकारों और कानूनी उपायों के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करना.
14. कैंपस वाई-फाई
विश्वविद्यालय परिसरों में विश्वसनीय और निर्बाध वाई-फाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना.
15. निशुल्क मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन
परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निःशुल्क पुनर्मूल्यांकन और जांच की व्यवस्था.
16. स्वच्छ पेयजल
सभी परिसरों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराना.
17. किफायती फीस
उच्च शिक्षा के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाना.
18. यौन उत्पीड़न के प्रति जीरो टॉलरेंस
सुरक्षित परिसरों को सुनिश्चित करने के लिए यौन उत्पीड़न के खिलाफ सख्त जीरो टॉलरेंस नीति.
19. लैंगिक संवेदनशीलता और समावेशन
समान अधिकारों, अवसरों और समावेशी कैंपस वातावरण को बढ़ावा देना.
फिलहाल अध्यक्ष पद पर आदिवासी समाज से आए छात्र प्रत्याशी के साथ एनएसयूआई मैदान में है. पारंपरिक समीकरणों को तोड़ते हुए चुनावी मैदान में उतरे विजय शंकर मीणा का यह सफर डूसू चुनाव में धनबल और बाहुबल के मुकाबले सामाजिक प्रतिनिधित्व की एक नई बहस को जन्म दे रहा है. अगर उन्हें इस बार के चुनाव मे जीत मिलती है तो ये दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की राजनीति को पूरी तरह मोड़ सकता है.