बिहार से दिल्ली आई ऋत्विका वेंकटेश्वर (बदला हुआ नाम) फर्स्ट ईयर कॉलेज की छात्रा हैं. वह करीब दो महीने पहले ही दिल्ली आईं और फिलहाल सत्य निकेतन में एक PG में रह रही हैं. कल दोपहर करीब 1.30 बजे हुई सत्य निकेतन में घटना के बाद वह बहुत डरी हुई हैं. उनका कहना है कि घटना के बाद पूरी रात वह ठीक से सो नहीं पाईं. ऋत्विका के मुताबिक, रात में कई छात्र मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में इधर-उधर जगह तलाशते रहे. उनके लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि जिस इमारत में वे रह रहे हैं, वहां खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करें. वह आगे बताती हैं कि इमारत के बाहर तारों का जाल भी है, जिसे देखकर उन्हें लगातार डर लगा रहता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए.
पास-पास इमारत और तारों का जाल
जब आजतक की रिपोर्टर ऋत्विका की कहानी जानने के लिए उनके पास पहुंची तो, उन्होंने देखा की जो बिल्डिंग गिरी है, उसके एक हाथ की दूरी पर ही ऋत्विका का पीजी था. इसके साथ ही उन्होंने वहां के तारों के जाल को भी दिखाया तो वहां केवल न सही से सिमेंटिंग, पतली गलियां और खतरनाक तारों का जाल दिखता है.
रूममेट की परीक्षा थी, रातभर नहीं सो पाई
ऋत्विका बताती हैं कि उनकी रूममेट की परीक्षा थी. घटना और उसके बाद पैदा हुए डर के कारण वह पूरी रात सो नहीं पाईं. उन्होंने ये भी बताया कि इतने पैसे देने के बाद भी उन्हें बेसिक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. लाइट की सुविधा तक नहीं मिलती है. उन्होंने बताया कि उनके रूममेट की SSC की परीक्षा थी लेकिन सुबह से गई लाइट पूरी दिन नहीं आई. वह बहुत परेशान थी कि वह कैसे पढ़े.
आखिरकार उन्हें अपना बैग लेकर आसपास किसी दूसरी जगह जाकर पढ़ाई करनी पड़ी. वह आगे कहती हैं कि छात्र यहां पढ़ाई और अपने भविष्य के लिए आए हैं, लेकिन अगर रात में सुरक्षित रहने की चिंता सताती रहे तो पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है. उनके मुताबिक, परिवार के लोग भी घटना के बाद बेहद परेशान हैं और लगातार उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं.
महंगा किराया, फिर भी सुरक्षा की गारंटी नहीं
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास छात्रों के बीच लोकप्रिय PG इलाका है. यहां पर बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं. लेकिन छात्रों का कहना है कि PG के लिए उन्हें काफी रकम खर्च करनी पड़ती है. इसके बावजूद कई जगहों पर सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल बने हुए हैं. ऋत्विका का कहना है कि PG के लिए छात्रों से बड़ी रकम मांगी जाती है और इलाके में जगह-जगह PG के होर्डिंग और पोस्टर दिखाई देते हैं. ऐसे में छात्रों के सामने सवाल है कि जब वे इतनी बड़ी रकम देकर रह रहे हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा.
खाने-पीने की चीजें हैं बहुत महंगी
ऋत्विका ने न केवल वहां रहने के खर्च के बारे में बात की बल्कि उन्होंने यह भी बताया कि यहां पर केवल आना ही काफी नहीं है. हर चीज यहां पर बहुत महंगी है. उन्होंने बताया कि कई छात्रों के पास टैलेंट होने के बाद भी वह यहां पर नहीं आ पाते हैं क्योंकि कॉलेज की फीस कम है लेकिन यहां रहने और खाने का खर्च बहुत ज्यादा है. यहां पर रहना हर कोई अफोर्ड नहीं कर सकता लेकिन जो लोग करते हैं उन्हें अपनी जिंदगी को रिस्क में डालना होता है.
‘मुझे डर लग रहा है, रोना आ रहा है’
घटना के बाद ऋत्विका की चिंता सिर्फ उनकी अपनी सुरक्षा तक सीमित नहीं है. उन्हें अपने माता-पिता की भी चिंता है. उनका कहना है कि परिवार के लोग भी सदमे में हैं और बार-बार यही सोच रहे हैं कि उनके बच्चे दिल्ली में किस स्थिति में रह रहे हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा. छात्रों की मांग है कि PG और किराए के आवास में रहने वाले युवाओं की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए. इमारतों की सुरक्षा जांच, बिजली के तारों की व्यवस्था, आपातकालीन निकास और अन्य बुनियादी सुविधाओं की नियमित जांच होनी चाहिए.
छात्रों का कहना है कि घर से दूर रहकर पढ़ाई करने वाले युवाओं को सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षित और बेहतर माहौल भी मिलना चाहिए। माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ने के लिए बड़े शहरों में भेजते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही छात्रों और उनके परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है.