वेट लॉस सीरीज कि पिछली कड़ी में हमने आपको बताया था कि वजन घटाने की शुरुआत कैसे करें और डाइट शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें. अब इस सीरीज के दूसरे पार्ट में हम आपको बताएंगे कि वेट लॉस के लिए आप जो खा रहे हैं उसमें कितना बदलाव करना है और इसके लिए फूड डायरी बनाना क्यों जरूरी है. इस बारे में डिटेल में AIIMS दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड ह्यूमन न्यूट्रिशन की डायटिशियन मोनिता गहलोत ने बताया है.
डायटिशियन मोनिता बताती हैं कि वजन घटाने के लिए अपने दिनभर के खानपान के पैटर्न को समझना जरूरी है. इसके लिए सबसे पहले अपनी ‘फूड डायरी’ बनाएं. एक बार में कम से कम 10-15 दिनों की डायरी बनाएं. इसमें सुबह उठने से लेकर रात तक आपने क्या-क्या खाया और पिया, उसे ईमानदारी से लिखें. नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात के भोजन के साथ-साथ बीच में खाए गए स्नैक्स, चाय-कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, बिस्किट, नमकीन, मिठाई या बाहर का खाना भी इसमें दर्ज करें. सिर्फ क्या खाया ही नहीं, बल्कि लगभग कितनी मात्रा में और किस समय खाया है यह भी लिखें.
फूड डायरी में यह भी नोट करें कि खाने के समय वास्तव में भूख लगी थी या खाने की इच्छा किसी दूसरी परिस्थिति से जुड़ी थी. मानसिक जैसे तनाव, गुस्सा थकान, अकेलापन या खुशी में मिठाई खाना. इसी तरह ऑफिस मीटिंग के दौरान स्नेक्स, सहकर्मियों के साथ अचानक कुछ खाना या बाहर से मंगाया गया खाना भी डायरी में नोट करें. इससे इमोशनल ईटिंग और अनजाने में होने वाली ईटिंग पैटर्न को पहचानने में मदद मिल सकती है.
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अपने ईटिंग पैटर्न को समझने की कोशिश करें
फूड डायरी पूरी होने के बाद उसे ध्यान से देखें और अपने ईटिंग पैटर्न को समझने की कोशिश करें. हो सकता है कि जरूरी मील्स बहुत ज्यादा न हों, लेकिन दिनभर में बार-बार होने वाली छोटी-छोटी ईटिंग आपकी कुल फूड और कैलोरी इनटेक को बढ़ा रही हो. जैसे चाय के साथ बिस्किट, शाम का स्नेक्स, शुगरी ड्रिंक्स, बार-बार कुछ मीठा खाना या वीकेंड में बाहर का खाना इस तरह स यह समझने में मदद करता है कि आपका ईटिंग पैटर्न में वास्तविक समस्या कहां है और किन आदतों में बदलाव की जरूरत है.
जो आदतें बदल सकती है उनकी पहचान करें
अब डायरी से उन हैबिट की एक अलग लिस्ट बनाएं जिनमें बदलाव की जरूरत है, उदाहरण के लिए, बिना भूख के बार-बार खाना, मीठी ड्रिंक की आदत, बहुत बड़े पोर्शन खा लेना, देर रात खाना या स्ट्रेस में मीठा खाना. हर आदत को एक साथ बदलने के बजाय पहले 2–3 ऐसी आदतों को चुनें जो सबसे ज्यादा बार दोहराई जा रही हैं.
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भूख और खाने की इच्छा में अंतर समझें
हर बार खाने की इच्छा का मतलब भूख होना जरूरी नहीं है. इसलिए खाने से पहले खुद से पूछें कि “क्या मुझे वास्तव में भूख लगी है या सिर्फ आदत, मानसिक तनाव या फिर किसी दूसरी परिस्थिति के कारण खा रहा हूं? इस छोटे से काम से आपको पता चल जाएगा कि आप भूख लगने पर खा रहे हैं या किसी दूसरे कारण से, हालांकि इसका मतलब भूख को दबाना या मील्स छोड़ना नहीं है, बल्कि अपनी वास्तविक ईटिंग पैटर्न को पहचानना है.
पहले पहचान करें और फिर बदलाव
अपनी डाइट हैबिट को समझे बिना अचानक डाइट में बड़े बदलाव करने के बजाय, पहले यह तय करें कि बदलाव की जरूरत कहां और क्यों है. किसी व्यक्ति के लिए समस्या खाने के पोर्शन साइज में हो सकती है, किसी के लिए बार- बार कुछ न कुछ खाने की आदत में और किसी के लिए शुगरी ड्रिंक्स या इमोशनल ईटिंग में, इसलिए हमेशा ध्यान रखें कि डाइट में बदलाव हमेशा आपके ईटिंग बिहेवियर के हिसाब से होनी चाहिए.
वजन बढ़ने का कारण केवल फूड नहीं है
डायटिशियन मोनिता कहती हैं कि हमारा वजन केवल किसी एक फूड आईटम या एक मील की वजह से नहीं बढ़ता, वजन पर लंबे समय तक हमारी कुल डाइट पैटर्न, फिजिकल एक्टिविटी, नींद, मानसिक तनाव, दवाएं और कुछ मेडिकल कंडीशन का भी प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए अपनी डायटरी हैबिट्स और लाइफस्टाइल का भी आकलन करना जरूरी है.
अगली सीरीज में हम समझेंगे कि रोज की डाइट में किन बदलावों से शुरुआत करें और भोजन में जरूरी न्यूट्रिएंट्स का संतुलन कैसे बनाए रखें.