
क्या आप महज 18 महीनों में अपनी 'आज़ादी' खरीदने के लिए अपनी जीवनशैली की पसंदीदा चीज़ों का त्याग कर सकते हैं? एक महिला ने कॉर्पोरेट की 9-से-5 वाली नौकरी को अलविदा कहने के लिए हर महीने 40,000 रुपये बचाए. उन्होंने रेस्टोरेंट में खाना, सब्सक्रिप्शन, शॉपिंग, वीकेंड ट्रिप्स और सोशल इवेंट्स जैसी चीज़ों में कटौती की और 18 महीने में 7.2 लाख रुपये का फंड तैयार कर लिया.
रिया नाम की इस सोशल मीडिया यूजर (@riahassomethingtosay) ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर अपना यह अनुभव शेयर किया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है. रिया ने साफ किया कि यह सब कुछ कुर्बान करने के बारे में नहीं था. उन्होंने अपनी सेहत, पार्टनर के साथ समय और घर के अच्छे खाने से कभी समझौता नहीं किया. रिया ने बताया कि उन्होंने किन 5 चीज़ों में की कटौती, जो बनीं बचत का जरिया... आइए जानते हैं.
बाहर का खाना बंद (हर महीने ₹20,000 की बचत): रिया ने रेस्टोरेंट जाना, बाहर की कॉफी और ऑनलाइन फूड डिलीवरी पूरी तरह बंद कर दी. उन्होंने घर पर ही हर वक्त का खाना बनाना शुरू किया. मकसद भूखा रहना नहीं, बल्कि सेहतमंद और घर का बना खाना खाना था.
अनचाहे डिजिटल सब्सक्रिप्शन रद्द (हर महीने ₹5,000 की बचत): नेटफ्लिक्स, स्पॉटिफाई और ऐसे तमाम ऐप्स जिनका इस्तेमाल वे बहुत कम करती थीं, उन्हें कैंसल कर दिया. उन्हें अहसास हुआ कि वे ऐसी सेवाओं के पैसे दे रही थीं जिनका वे उपयोग ही नहीं करती थीं.

शॉपिंग पर पूरी तरह ब्रेक (हर महीने ₹10,000 की बचत): पूरे 18 महीनों तक उन्होंने कोई नया कपड़ा या सामान नहीं खरीदा. उन्होंने अपनी अलमारी में पहले से मौजूद कपड़ों का ही इस्तेमाल किया.
वीकेंड ट्रिप्स पर रोक (हर महीने ₹2,000 की बचत): घूमने-फिरने की शौकीन रिया के लिए यह फैसला थोड़ा कठिन था, लेकिन अपने बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वीकेंड ट्रैवल पर अस्थाई ब्रेक लगा दिया.
सोशल लाइफ और पार्टियों से दूरी (हर महीने ₹3,000 की बचत): रिया ने गैर-जरूरी शादियों, ब्रंच, जन्मदिन की पार्टियों और इवेंट्स में जाना कम कर दिया. उनका मानना था कि इस पड़ाव पर हर एक रुपया और हर एक घंटा कीमती है.
3 चीज़ें, जिनसे कभी समझौता नहीं किया
रिया ने कहा कि फिजूलखर्ची रोकने का मतलब अपनी जिंदगी को बेरंग बनाना नहीं था. रिया ने अपनी फिटनेस और जिम, पार्टनर के साथ बिताए जाने वाले शाम के समय और घर के पौष्टिक भोजन को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा.
7.2 लाख रुपये से खरीदी 'आज़ादी'
गणित बिल्कुल साफ था: ₹40,000 प्रति महीना × 18 महीने = ₹7.2 लाख. रिया के मुताबिक, यह सिर्फ पैसे बचाने का खेल नहीं था, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं को तय करने की कला थी. वे कहती हैं, "कटौती का मतलब खुद को किसी चीज़ से वंचित रखना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी क्या है."
दो साल पहले वे जिस जिंदगी की सिर्फ कल्पना करती थीं, आज वे उस आजाद जिंदगी को जी रही हैं और हर कदम को सोशल मीडिया पर डॉक्यूमेंट कर रही हैं.