देश की सबसे प्रीमियम ट्रेनों में गिनी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस अपनी तेज रफ्तार, आधुनिक सुविधाओं और आरामदायक सफर के लिए जानी जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस हाई-टेक ट्रेन को चलाने वाले लोको पायलट कैसे चुने जाते हैं, उन्हें कितनी सैलरी मिलती है और इसके लिए क्या योग्यता चाहिए? अगर आप भी वंदे भारत के लोको पायलट के तौर पर करियर बनाना चाहते हैं, तो जानिए चयन प्रक्रिया, ट्रेनिंग और सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी.
परफेक्ट है टाइमिंग
बता दें कि वंदे भारत चलाना केवल ट्रेन को आगे बढ़ाने जैसा नहीं है. यह बेहद सतर्कता, हाई-टेक पैनल कंट्रोलिंग और सेकंड-सेकंड की टाइमिंग का काम है. यही वजह है कि रेलवे इस नौकरी के लिए सबसे बेस्ड ड्राइवर को चुनाव करती है. इन्हें न केवल अच्छी सैलरी मिलती है बल्कि कई भत्ते भी मिलते हैं.
कितनी होती है सैलरी?
वंदे भारत के लोको पायलट की सैलरी की बात करें, तो इन्हें 7वें वेतन आयोग के हिसाब से लेवल-6 या लेवल-7 की होती है लेकिन अन्य भत्तों के बाद से इनकी इन-हैंड सैलरी और अधिक हो जाती है. वंदे भारत के लोको पायलट को हर महीने 90 हजार रुपये से लेकर 1,20,000 रुपये तक की इन-हैंड सैलरी मिल जाती है.
मिलती है कई अन्य सुविधाएं
इसमें बेसिक सैलरी के अलावा किलोमीटर रनिंग अलाउंस (KMA), नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम, महंगाई भत्ता (DA) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) शामिल होता है.
कैसे बन सकते हैं लोको पायलट?
बता दें कि रेलवे में सीधे वंदे भारत का लोको पायलट बनने का कोई विकल्प नहीं है. सबसे पहले RRB ALP (असिस्टेंट लोको पायलट) की एग्जाम पास करनी होती है. इसके बाद मालगाड़ी का असिस्टेंट और फिर लोको सीनियर लोको पायलट बनना पड़ता है. इसके बाद से पैसेंजर/एक्सप्रेस ट्रेनों का अनुभव मिलने के बाद ही बेस्ट ट्रैक रिकॉर्ड वाले ड्राइवर को वंदे भारत की जिम्मेदारी दी जाती है.
होनी चाहिए ये योग्यता
इन फील्ड में करियर बनाने के लिए आपको पास कुछ योग्यता होनी चाहिए. उम्मीदवारों के पास 10वीं पास ITI सर्टिफिकेट या डिप्लोमा या बीटेक की डिग्री होनी अनिवार्य है.
मेडिकल टेस्ट है जरूरी
पढ़ाई से ज्यादा सख्त लोको पायलट का मेडिकल टेस्ट होता है. इसमें आंखें 6/6 होनी चाहिए जो बिना चश्मे के है. अगर किसी को रंगों की पहचान में परेशानी होती है, तो वह इस जॉब के लिए अयोग्य माना जाता है.
कैसे होती है ट्रेनिंग?
वंदे भारत का इंजन आम ट्रेनों की तरह नहीं होता है. यह ट्रेन सेट है जिसमें अलग से इंजन नहीं होता है. इसमें ड्राइवरों को अलग से ट्रेनिंग दी जाती है. इनमें सिम्युलेटर ट्रेनिंग, डिजिटल डैशबोर्ड की समझ और क्विक रिफ्लेक्स और डिसीजन मेकिंग शामिल होते हैं.