राजस्थान के रहने वाले शशांक की सफलता की कहानी हर उस युवा के प्रेरित करती है, जिसके पास कुछ करने का जूनून है. केवल 24 साल की उम्र में उन्होंने वो कर दिखाया है, जिसका सपना हजारों युवा सालों तक देखते हैं. शशांक एक गरीब परिवार से आते हैं. उनके पिता थोक की दुकान चलाते थे. पोस्ट के मुताबिक, उनकी हर महीने की कमाई केवल 3000 से 4000 रुपये होती थी, लेकिन पिता ने बेटे को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
कर्ज लेकर कराई पढ़ाई
बता दें कि कम आमदनी के बावजूद, उन्होंने बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और पढ़ाने के लिए कर्ज ले लिया. शशांक बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे और 12वीं पूरी करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग करने का फैसला किया.
पास कर ली परीक्षा
अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने जेईई की परीक्षा पास कर ली. साल 2018 में उन्होंने जेईई मेन्स में 330 स्कोर हासिल किया था. हालांकि,जेईई एडवांस्ड में उनका रैंक 20 था.
IIT बॉम्बे में एडमिशन
अच्छी रैंक होने से उन्हें IIT बॉम्बे में एडमिशन आसानी से मिल गया. गरीबी और संघर्ष से जूझते हुए यहां तक का सफर उनके लिए केवल एकेडमिक उपलब्धि नहीं थी बल्कि उससे ज्यादा थी. उन्होंने फिर कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की.
इन स्किल पर भी किया काम
IIT में एडमिशन मिलने के बाद उन्होंने केवल पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया बल्कि जॉब मार्केट के हिसाब से स्किल पर फोकस किया. इन स्किल में प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Python), C++, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), डेटा स्ट्रक्चर आदि शामिल हैं. शशांस की स्टोरी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @VikasAlwys के अकाउंट से शेयर की गई है.
1.5 करोड़ का पैकेज
पढ़ाई के दौरान ही शशांक ने A.P.T पोर्टफोलियो प्राइवेट लिमिटे़ड में इंटर्नशिप के साथ ही Quadeye ट्रेडिंग फर्म सिस्टम इंजीनियर और क्वांटिटेटिव स्ट्रैटेजिस्ट पद पर काम किया. हाल में वह जांस्कर कॉर्पोरेशन में एनालिस्ट हैं और उनका सालाना सैलरी करीब 1.5 करोड़ रुपये है और अगर मंथली सैलरी की बात करें तो लगभग 8.75 लाख रुपये है.