scorecardresearch
 

10वीं में मिले 54 प्रतिशत, आज IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस की कर रहा पढ़ाई

हर साल CBSE बोर्ड की परीक्षा में कहीं कई छात्र बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो वहीं कई छात्र कम नंबर आने की वजह से मायूस हो जाते हैं. उन्हें लगता है कि अब उनका करियर खत्म हो गया है लेकिन जैनेंद्रजीत की कहानी ने छात्रों की पूरी सोच बदल दी है. उन्हें क्लास 10 में केवल 54 प्रतिशत नंबर मिले थे लेकिन अब वह  IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं. 

Advertisement
X
10वीं में मिले 54 प्रतिशत नंबर अब पास कर ली जेईई की परीक्षा.
10वीं में मिले 54 प्रतिशत नंबर अब पास कर ली जेईई की परीक्षा.

कक्षा 10वीं में 54% नंबर देखकर शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छात्र कभी IIT बॉम्बे तक पहुंचेगा. लेकिन जैनेंद्रजीत ने साबित कर दिया कि कम अंक मंजिल तय नहीं करते, मेहनत और जुनून करते हैं. आज वह IIT बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं. कई बार जब बोर्ड में नंबर कम आते हैं, तो छात्रों का आत्मविश्वास खत्म हो जाता है. उन्हें ऐसा लगता है कि उनका करियर खत्म हो गया है. लेकिन जैनेंद्रजीत की कहानी कई युवाओं को प्रेरित कर रही है. 10वीं में कम नंबर लाने के बाद भी उन्होंने कड़ी मेहनत की और IIT बॉम्बे में एडमिशन ले लिया. बता दें कि IIT बॉम्बे की कंप्यूटर साइंस कोर्स केवल टॉपरों को मिलती है. 

केवल 54 प्रतिशत के साथ बढ़ो आगे 

बता दें कि जैनेंद्रजीत को 10वीं में 54 फीसदी ही नंबर मिले थे. मैथ्स में उन्हें केवल 41 नंबर और साइंस में 48 नंबर ही मिले थे. लेकिन साल 2023 में जैनेंद्रजीत के कमबैक ने हर किसी को हैरान कर दिया. उन्होंने जेईई मेन की परीक्षा में 99.98 प्रतिशत और जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 349 (ओपन कैटेगरी) और ओबीसी रैंक 54 हासिल किया. उन्होंने लोगों को बता दिया कि कोई एक परीक्षा कभी भी किसी छात्र का भविष्य नहीं बता सकता है. 

अब IIT बॉम्बे में पढ़ाई 

इसके बाद से उन्होंने IIT बॉम्बे में एडमिशन लिया और पढ़ाई शुरू की. आईआईटी में उन्होंने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं की बल्कि नई तकनीकी और प्रैक्टिकल स्किल्स भी सीखीं. दिसंबर 2025 में उन्होंने बेंगलुरु की लूप हेल्थ कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर इंटर्न के रूप में काम किया. इसके अलावा उन्होंने किम्बल में भी समर इंटर्नशिप की. इन इंटर्नशिप के दौरान उन्हें कॉलेज में सीखी गई बातों को असल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स और समस्याओं पर लागू करने का अनुभव मिला, जिससे उनके करियर को आगे बढ़ने में मदद मिली. 

Advertisement

केवल मार्कशीट नहीं रखती मायने 

जैनेंद्रजीत की कहानी इस बात की याद दिलाती है कि स्कूल के अंक हमेशा यह नहीं बताते कि कोई व्यक्ति अंत में कहां पहुंचेगा. कक्षा 10 को अक्सर एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है, लेकिन यह एक लंबी यात्रा का मात्र एक चरण है. उनकी कहानी दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर तैयारी और एक असफलता से हार न मानने का रवैया किस प्रकार एक विद्यार्थी के भविष्य की दिशा बदल सकता है. आज वहीं छात्र जिसने कभी 10वीं में केवल 54 प्रतिशत मार्क्स हासल किए थे, अब IIT से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहा है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement