आशीष कुमार वर्मा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पोस्ट में अपने इस अनोखे करियर सफर के बारे में साझा किया. उन्होंने लिखा कि IIT दिल्ली छोड़ने के बाद उन्हें कम उम्र में ही दुनिया की बड़ी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट में काम करने का मौका मिला, जो उनके लिए एक बड़ा अनुभव रहा.
उन्होंने अपने पोस्ट में यह समझाते हुए बात शुरू की कि उन्होंने आईआईटी दिल्ली छोड़ने का फैसला क्यों किया, उन्होंने बताया कि छात्रों को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में बाटा जा सकता है. वे जो अपनी रुचियों का पता लगाने के लिए आईआईटी जैसे संस्थानों में शामिल होते हैं और वे जो पहले से ही जानते हैं कि वे क्या करना चाहते हैं.
वर्मा ने आगे लिखा कि आईआईटी पहले श्रेणी के छात्रों के लिए बेहतर माने जाते हैं क्योंकि वहां खोज और प्रयोग करने का अच्छा माहौल मिलता है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जिन छात्रों को अपने लक्ष्य का साफ पता है, उनके लिए हमेशा पारंपरिक पढ़ाई के रास्ते पर चलना जरूरी नहीं होता.
एडमिशन से पहले बना ली थी पहचान
आईआईटी दिल्ली में एडमिशन लेने से पहले आशीष ने तकनीकी क्षेत्र में पहले ही अपनी पहचान बना ली थी. उन्होंने बताया कि 18 साल की उम्र में वे दुनिया के सबसे युवा डेवलपर एक्सपर्ट बने, जापान के सकुरा साइंस प्रोग्राम में भाग लेने के बाद उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स पर मदद की और एक ऐप विकसित किया जिसे बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रदर्शित किया.

क्या है माइक्रोसॉफ्ट को चुनने की वजह?
माइक्रोसॉफ्ट को चुनने के पीछे का कारण बताते हुए वर्मा ने कहा कि सीखने के अवसर उनके इस फैसले का मुख्य कारण था. वह ऐसे माहौल में काम करना चाहते थे जहां उन्हें सीधे इंडस्ट्री के टॉप इंजीनियरों और क्रिएटर्स से सीखने का मौका मिले, खासकर वे लोग जो C# और टाइपस्क्रिप्ट जैसी तकनीकों पर काम कर चुके हैं. उन्होंने आगे कहा कि मैं इसमें किसी डिग्री या पहचान के लिए शामिल नहीं हुआ.
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भले ही AI काम को लागू करने में मदद कर सकता है, लेकिन असली विचार, रचनात्मकता और रुचि अक्सर उन अनुभवी लोगों से आती है जो इंडस्ट्री को आकार देते हैं. उन्होंने आगे बताया कि माइक्रोसॉफ्ट में काम करने के पीछे जो एक और कारण सबसे बड़ा था, वह ये था कि उन्हें काम करने की आजादी मिली, जिससे नए और अलग विचार सोच सके और जोखिम लेने का मौका मिला.
अपने अनुभव को उदाहरण बनाकर उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे डिग्री का इंतजार करने के बजाय सीधे कुछ बनाने और काम करने पर ध्यान दें. उन्होंने यह भी कहा कि आज तकनीक की वजह से सीखना पहले से कहीं आसान हो गया है, क्योंकि AI टूल्स, इंटरनेट और विशेषज्ञों तक सीधी पहुंच ने सीखने और आगे बढ़ने के नए रास्ते खोल दिए हैं.